विशेष फोकस पूर्वोत्तर क्षेत्र पर



नई दिल्ली, 14 फरवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

(●) सूक्ष्‍म, लघु व मझौले उद्यमों के पुनर्वर्गीकरण से विनिर्माण क्षेत्र को सहायता मिलेगी : वस्‍त्र मंत्री

केन्‍द्रीय वस्‍त्र मंत्री स्‍मृति जुबिन ईरानी ने कहा है कि सूक्ष्म, लघु व मझौले उद्यमों के पुनर्वर्गीकरण तथा 250 करोड़ रुपये वार्षिक टर्नओवर वाली कम्‍पनियों को कर में 5 प्रतिशत की छूट से विनिर्माण क्षेत्र को सहायता मिलेगी व कपड़ा क्षेत्र में रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। 13 फरवरी को मीडिया को जानकारी देते हुए उन्‍होंने कहा कि रेशम और कृत्रिम धागों पर सीमा शुल्‍क में वृद्धि से बाजार में सस्‍ते चीन निर्मित परिधान उत्‍पाद की बाढ़ को कम करने में मदद मिलेगी। इससे पावरलूम क्षेत्र के घरेलू विनिर्माताओं को लाभ मिलेगा।

वस्‍त्र क्षेत्र के लिए 2016 में 6000 करोड़ रुपये के विशेष प्रोत्‍साहन की घोषणा की गई थी। 1800 करोड़ रुपया पहले ही जारी किया जा चुका है। वर्तमान वित्‍तवर्ष में 300 करोड़ रुपये जारी किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वस्‍त्र उद्योग में कौशल विकास के लिए हुए आवंटन में 100 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हस्‍त निर्मित और मशीन द्वारा निर्मित परिधानों के सदंर्भ में जीएसटी में किए गए सुधार से व्‍यापार करने में आसानी हुई है। धागों पर जीएसटी दर 18 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत कर दी गई है। परिधान क्षेत्र के लिए व्‍यापारिक योजना का समर्थन 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत कर दिया गया है। स्मृति जुबिन ईरानी ने परिधान क्षेत्र में 16 प्रतिशत की वृद्धि दर का श्रेय सब्सिडी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्‍वयन को दिया। मुद्रा ऋण योजना के तहत 28000 बुनकरों को 138 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी गई। परिधान क्षेत्र में काम करने वाले 1.8 लाख लोगों ने औपचारिक रूप से कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (ईपीएफओ) में खाता खोला है।

उन्होंने कहा कि हस्‍तकला शिविरों का दूसरा दौर देश के विभिन्‍न भागों में आयोजित किया जाएगा। इस महीने 19 से 24 तारीख तक आयोजित होने वाले इन शिविरों का विशेष फोकस पूर्वोत्‍तर क्षेत्र होगा। उन्‍होंने बुनकरों को प्रोत्‍साहन देने के उद्देश्‍य से संसद सदस्‍यों को इन शिविरों में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह करते हुए पत्र लिखा है। वस्‍त्र मंत्री तथा मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारी इन शिविरों में भाग लेंगे। पहले दौर में पिछले वर्ष 7 से 17 अक्‍तूबर तक देश के 247 जिलों में 394 शिविर आयोजित किए गए थे।


(●) वस्‍त्र मंत्रालय का विशेष फोकस पूर्वोत्तर क्षेत्र पर

केन्‍द्रीय वस्‍त्र मंत्री स्‍मृति जुबिन इरानी ने कहा कि वस्‍त्र मंत्रालय द्वारा पूर्वोत्तर राज्‍यों में कपड़ा क्षेत्र के विकास एवं आधुनिकीकरण को सर्वोच्‍च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्‍होंने कहा कि इससे पूर्वोत्तर क्षेत्र की विशेषकर महिलाओं के लिए और ज्‍यादा रोजगार सृजित होंगे तथा इसके फलस्‍वरूप पूर्वोत्तर राज्‍यों में सड़कों, बिजली एवं जलापूर्ति जैसी बुनियादी ढांचागत सुविधाओं में वृद्धि होगी। इसके साथ ही कार्यालयों के निर्माण कार्य में भी तेजी आएगी।

वर्ष 2009-10 की हथकरघा गणना के अनुसार देश भर में 23.77 लाख हथकरघे हैं जिनमें से 16.47 लाख हथकरघे (69.28 प्रतिशत) पूर्वोत्तर क्षेत्र में हैं।

पूर्वोत्तर क्षेत्र के सात राज्‍यों यथा असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, नगालैंड, मिजोरम और त्रिपुरा में सिले-सिलाए परिधान तैयार करने वाली 21 विनिर्माण इकाइयां हैं। इन इकाइयों ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में कपड़ा उद्योग को काफी बढ़ावा दिया है और इसके साथ ही पूर्वोत्तर क्षेत्र से सिले-सिलाए परिधानों के निर्यात में उल्‍लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस क्षेत्र में रेशम उद्योग के विकास के लिए 690 करोड़ रुपये का उपयोग किया गया है।

दो वर्षों की रिकॉर्ड अ‍वधि में पूर्वोत्तर क्षेत्र के सातों राज्‍यों में से प्रत्‍येक राज्‍य में तीन फैक्टरियां पूरी तरह से परिचालन में आ गई हैं। हर फैक्‍टरी में तकरीबन 1200 लोग कार्यरत हैं जिनमें से ज्‍यादातर महिलाएं हैं। ये फैक्‍टरियां स्‍थानीय उद्यमियों के स्‍वामित्‍व में हैं और विभिन्‍न एजेंसियां जैसे कि भारतीय वस्‍त्र उत्‍पादक संघ, अरविन्‍द मिल्‍स और परिधान निर्यात संवर्धन परिषद इन इकाइयों को सिले-सिलाए परिधानों के लिए ऑर्डर दे रही हैं। मंत्रालय का मुख्‍य उद्देश्‍य वस्‍त्र उत्‍पादन के कुल मूल्‍य में वृद्धि करना, तकनीकी उन्‍नयन, क्षमता में सुधार, घरेलू बाजारों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना और कलस्‍टरों की स्‍थापना को बढ़ावा देना है।

वस्‍त्र मंत्रालय ने सिले-सिलाए परिधान तैयार करने वाली प्रत्‍येक इकाई, जिसे ‘अपेरल गारमेंट यूनिट (एजीयू)’ कहते हैं, को 18 करोड़ रुपये की धनराशि मुहैया कराई गई है। राष्‍ट्रीय भवन निर्माण निगम ने इन सातों राज्‍यों में इकाइयों का निर्माण किया है। यहां तैयार किए जाने वाले परिधानों का निर्यात न केवल देश के अन्‍य हिस्‍सों, बल्कि पड़ोसी देशों को भी किया जा रहा है क्‍योंकि कुछ पूर्वोत्तर राज्‍यों ने बांग्‍लादेश और म्‍यांमार के साथ व्‍यापार संबंध स्‍थापित किए हैं।

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