नई दिल्ली, 07 फरवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
(●) मंत्रिमंडल ने कौशल विकास, व्यवसायिक शिक्षा तथा प्रशिक्षण में सहयोग पर ब्रिटेन तथा उत्तरी आयरलैंड के साथ समझौते ज्ञापन पर हस्ताक्षर को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कौशल विकास, व्यवसायिक शिक्षा तथा प्रशिक्षण में सहयोग पर ब्रिटेन तथा उत्तरी आयरलैंड के साथ समझौते ज्ञापन पर हस्ताक्षर को मंजूरी दे दी है।
इस समझौता ज्ञापन से व्यावसायिक शिक्षा तथा प्रशिक्षण और कौशल विकास के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग प्रगाढ़ बनाने का मार्ग प्रशस्त होगा।
विदेशी देशों से सहयोग करने से भारतीय कौशल इको-प्रणाली मजबूत बनाने में मदद मिलेगी और इससे बेहतर रोजगार संभावनाओं के लिए युवा को कुशल बनाया जा सकेगा। यह समझौता ज्ञापन भारत तथा ब्रिटेन के उद्योग तथा प्रशिक्षण संस्थानों के बीच अभिनव साझेदारी के लिए रूपरेखा तैयार करेगा और भारत में कौशल प्रशिक्षण प्रयासों को बढ़ाने में सहायता करेगा। समझौते ज्ञापन को लागू करने संबंधी परियोजना के धन पोषण का स्वरूप दोनों पक्षों द्वारा परस्पर रूप से सहमत अलग समझौतों में दिया जाएगा।
पृष्ठभूमि
भारत और ब्रिटेन के लिए कौशल विकास राष्ट्रीय प्राथमिकता है और द्विपक्षीय साझेदारी का महत्वपूर्ण भाग है। दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने नवंबर 2016 में सहयोग के प्राथमिकता वाले एक क्षेत्र के रूप में कौशल विकास और उद्यमिता कोस्वीकृत किया था।
(●) मंत्रिमंडल ने दीवाला और दीवालियापन संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2017 के स्थान पर दीवाला और दीवालियापन (संशोधन) विधेयक, 2017 को स्वीकृति दी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्थानापन्न विधेयक में किये गये परिवर्तनों को पूर्वव्यापी स्वीकृति दे दी है। इस विधेयक ने दीवाला और दीवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक 2017 का स्थान लिया और दीवाला और दीवालियापन संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2018 के रूप में संसद द्वारा पारित किया गया है।
यह संशोधन स्पष्टता लायेगा और सुनिश्चित करेगा कि दीवाला कॉर्पोरेट व्यक्ति की निपटान प्रक्रिया में ऐसे गैर इरादा व्यक्ति शामिल नहीं है और जिस व्यक्ति का खाता अनुत्पादक परिसंपत्ति के रूप में वर्गीकृत है उसे समान अवसर दिया जाए।
(●) मंत्रिमंडल ने 2018 मौसम के लिए कोपरा के न्यूकनतम समर्थन मूल्यं में वृद्धि को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने ‘’मिलिंग कोपरा’’ की उचित औसत गुणवत्ता के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2017 के 6500 रूपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 2018 के लिए 7500 रूपये प्रति क्विंटल करने की स्वीकृति दे दी है। ‘’बाल कोपरा’’ की उचित औसत गुणवत्ता के लिए भी न्यूनतम समर्थन मूल्य 2017 के 7685 रूपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 2018 के लिए 7750 रूपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है।
कोपरा के न्यूनतम समर्थन मूल्य से किसानों को उपयुक्त न्यूनतम मूल्य सुनिश्चित होने तथा नारियल की खेती में निवेश और इस प्रकार देश में उत्पादन और उत्पादकता बढ़ने की आशा है।
भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (नैफेड) तथा भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड (एनसीसीएफ) नारियल उत्पादक राज्यों में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूल्य संवर्धन कार्य करने के लिए केन्द्रीय नोडल एजेंसियों के रूप में काम करना जारी रखेंगे।
(●) मंत्रिमंडल ने स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के लिए मानव संसाधनों को सुदृढ बनाने की योजना को मंजूरी दी
• कम सेवा वाले क्षेत्रों में 24 नये मेडिकल कॉलेज खोले जायेंगे मेडिकल कॉलेजों में 18,058 स्नातक और स्नातकोत्तर सीटें बढ़ायी जायेंगी 248 नर्सिंग और मिडवाइफरी स्कूल स्थापित किये जायेंगे
स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा को प्रोत्साहन देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रीमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने चालू योजना को जारी रखने तथा स्वास्थ्य और चिकित्सा योजनाओं के लिए 2019-20 तक 14,930.92 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत से मानव संसाधन के अतिरिक्त चरण प्रारंभ करने की स्वीकृति दे दी है।
प्रमुख विशेषताएं :
ए. नये मेडिकल कॉलेज
2019-20 तक चरण-। के अंतर्गत पहले से स्वीकृत वर्तमान जिला / रेफरल अस्पतालों को जोड़कर 58 नये मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से संबंधित चालू योजना को जारी रखना।
2021-22 तक चरण-।। के अंतर्गत वर्तमान जिला /रेफरल अस्पतालों से जोड़कर 24 नये मेडिकल कॉलेजों का चयन और स्थापना।
चरण-।। में प्रस्तावित 24 नये मेडिकल कॉलेजों के स्थानों का चयन चुनौती मोड में चिन्ह्ति कम सेवा वाले क्षेत्रों के अंदर किया जाएगा।
चरण-। के दौरान केन्द्रीय हिस्से के अंतर्गत जारी योजना के लिए 5,587.68 करोड़ रूपये की राशि प्रस्तावित है। चरण-।। में केन्द्रीय हिस्से के रूप में 2021-22 तक 3,675 करोड़ रूपये खर्च किये जायेंगे। इसमें से 2,600 करोड़ रूपये 2019-2020 तक खर्च किये जायेंगे।
बी. मेडिकल सीटों में बढोत्तरी : वर्तमान राज्य सरकार/ केन्द्र सरकार के मेडिकल कॉलेजों को उन्नत बनाने की केन्द्र प्रायोजित जारी योजना के परिणामस्वरूप :
2020-21 तक स्नातक (यूजी) की 10 हजार सीटों की वृद्धि तथा
8,058 स्नातकोत्तर (पीजी) सीटें (2018-19 तक चरण-। में 4,058 तथा 2020-21 तक चरण-।। में 4,000)
यूजी सीटें बढ़ाने में केन्द्रीय हिस्से की राशि 7,795 करोड़ रूपये है और यह राशि 2021-22 तक खर्च की जा सकेगी। इसमें से 4,536 करोड़ रूपये की राशि 2019-20 तक खर्च की जाएगी।
चरण-।। के अंतर्गत पीजी सीटों की वृद्धि पर केन्द्रीय हिस्से के रूप में 3,024 करोड़ रूपये की राशि 2021-22 तक खर्च की जाएगी। इसमें से 1,700 करोड़ रूपये 2019-20 तक खर्च किये जायेंगे। 317.24 करोड़ रूपये की शेष केन्द्रीय हिस्से की राशि पीजी सीटों के पहले चरण के लिए खर्च की जाएगी।
सी नर्सिंग योजना : निम्नलिखित की स्थापना के लिए योजना जारी रखना और पूरी करना :
112 ऑक्सिलियरी नर्सिंग तथा मिडवाईफरी (एएनएम) स्कूल तथा
2019-20 तक देश के कम सेवा वाले जिलों में 136 जनरल नर्सिंग मिडवाईफरी (जीएनएम) स्कूल।
नर्सिंग योजना 2019-20 तक 190 करोड़ रूपये से उन स्कूलों के लिए लागू और पूरी की जाएगी जहां कार्य प्रारंभ हो गये हैं।
प्रभाव : नये मेडिकल कॉलेजों की स्थापना तथा एमबीबीएस तथा पीजी सीटों की बढ़ोत्तरी से
स्वास्थ्य पेशेवरों की उपलब्धता बढ़ेगी
देश में मेडिकल कॉलेजों का वर्तमान भौगोलिक वितरण नियंत्रित होगा
देश में किफायती चिकित्सा शिक्षा को प्रोत्साहन मिलेगा
जिला अस्पतालों की वर्तमान आधारभूत संरचना का उपयोग होगा तथा
सरकारी क्षेत्र में तृतीयक स्वास्थ्य सेवा में सुधार होगा
प्रत्येक 3-5 संसदीय क्षेत्रों में कम से कम एक मेडिकल कॉलेज और राज्य में कम से कम एक सरकारी मेडिकल कॉलेज सुनिश्चित करने की योजना बनाई गई है। यह पाया गया कि योजना के चरण-।। में 24 नये मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति की आवश्यकता होगी ताकि तीन संसदीय क्षेत्रों में एक मेडिकल कॉलेज हो जो कम सेवा वाले क्षेत्रों को कवर करे। योजना के चरण-।। में नये मेडिकल कॉलेजों के लिए स्थानों का चयन चुनौती मोड में चिन्ह्ति ब्लॉकों के अंदर राज्य सरकारों द्वारा किया जाएगा।
लाभ : योजना के निम्नलिखित लाभ होंगे :
देश में एमबीबीएस की 10000 तथा पीजी की 8000 अतिरिक्त सीटें बनेंगी।
सरकारी और निजी क्षेत्र में सीट उपलब्धता संख्या में अंतर कम होगा।
सीटों की संख्या बढ़ने से डॉक्टरों /विशेषज्ञों /मेडिकल फैक्लटी की कमी दूर होगी और वांछित डॉक्टर आबादी अनुपात हासिल होगा।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पीजी शिक्षण सुविधा उन्नत होगी।
अध्ययन के नये और ऊंचे पाठ्यक्रम शुरू होंगे।
चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा अनुसंधान तथा क्लिनिकल इलाज की गुणवत्ता में सुधार होगा।
पृष्ठभूमि : सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) 3 के अनुसार सभी आयु के लोगों के स्वस्थ्य जीवन और चिकित्सा देखभाल को प्रोत्साहित करने के लिए सतत विकास आवश्यक है और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सिफारिशों के अनुसार 1000 की आबादी पर एक डॉक्टर होना चाहिए। स्वास्थ्य क्षेत्र में मानव संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता तथा स्वास्थ्य में मानव संसाधन (एचआरएच) के लिए डब्ल्यूएचओ के मानकों को पूरा करने के लिए योजनाओं का प्रस्ताव किया गया है ताकि स्वास्थ्य क्षेत्र में अधिक मानव संसाधन हो यानी देश में अधिक डॉक्टर और नर्स उपलब्ध हों।
(●) मंत्रिमंडल ने दोहरे कराधान को टालने तथा राजकोषीय अपवंचन निषेध के लिए भारत - चीन समझौता संशोधन प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर और पुष्टि को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आय पर कर के मामले में दोहरे कराधान को टालने तथा राजकोषीय अपवंचन रोकने के लिए भारत चीन के बीच हुए समझौते में संशोधन करने वाले प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर और पुष्टि को मंजूरी दे दी है।
अन्य परिवर्तनों के अलावा यह प्रोटोकॉल सूचना आदान प्रदान प्रावधानों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार अद्यतन बनाता है। इसके अलावा यह प्रोटोकॉल आधार संकुचन और लाभ अंतरण (बीईपीएस) परियोजना, जिसमें भारत ने बराबरी से भाग लिया था, की कार्रवाई रिेपार्ट के अंतर्गत संधि संबंधी न्यूनतम मानकों को लागू करने के लिए अपेक्षित परिवर्तनों को भी शामिल करेगा। न्यूनतम मानकों के अतिरिक्त यह प्रोटोकॉल बीईपीएस की कार्रवाई रिपोर्ट के अनुरूप दोनों पक्षों द्वारा सहमत परिवर्तन भी लाएगा।
(●) मंत्रिमंडल ने सहयोग कार्यक्रम के लिए भारत ऑस्ट्रेलिया समझौता ज्ञापन (एमओयू) हस्ताक्षर को स्वीकृति दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आर्थिक कार्य विभाग (भारतीय आर्थिक सेवा संवर्ग) तथा ऑस्ट्रेलिया सरकार के कोषागार के बीच 3 महीनों के सहयोग कार्यक्रम के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर की स्वीकृति दे दी है।
कार्यक्रम के अंतर्गत ऑस्ट्रेलिया सरकार के कोषागार के एक अधिकारी को आर्थिक कार्य विभाग, वित्त मंत्रालय को स्थानांतरित किया जाएगा तथा आर्थिक कार्य विभाग के भारतीय आर्थिक सेवा संवर्ग द्वारा नामित भारतीय आर्थिक सेवा के एक अधिकारी (उप सचिव/ निदेशक स्तर) को ऑस्ट्रेलिया सरकार के कोषागार को स्थानांतरित किया जाएगा। यह समझौता 3 महीनों के लिए है और 15 जनवरी 2018 या बाद से प्रारंभ होगा। दोनों समझौता ज्ञापनों की अवधि तीन महीने के असाइनमेंट की अवधि पूरी होने पर समाप्त हो जाएगी और इसका विस्तार नहीं किया जाएगा। दोनों पक्षों के बीच परस्पर परामर्श और करार के बाद इस कार्यक्रम को अगले वर्षों मे दोहराया जा सकेगा।
प्रमुख प्रभाव : ऑस्ट्रेलिया भारत का प्रमुख द्विपक्षीय साझीदार है। प्रस्तावित कार्यक्रम से दोनों देशों के बीच मौजूदा आर्थिक नीति संबंधी विषयों की समझ गहरी होगी और साथ ही भविष्य में सहयोग के अवसरों के अधिक द्वार खुलेंगे। इस कार्यक्रम से भावी अधिकारियों को बहुमूल्य और उत्कृष्ट विकास के अवसर मिलेंगे तथा उन्हें विश्व के श्रेष्ठ व्यवहारों की जानकारी भी मिलेगी।
(●) मंत्रिमंडल ने युवा मामलों में सहयोग के लिए भारत और ट्यूनिशिया के बीच हुए समझौता-ज्ञापन का संज्ञान लिया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने युवा मामलों में सहयोग के लिए भारत और ट्यूनिशिया के बीच हुए समझौता-ज्ञापन का संज्ञान लिया। समझौता-ज्ञापन पर नई दिल्ली में 30 अक्टूबर 2017 को हस्ताक्षर किए गये थे।
समझौता-ज्ञापन का उद्देश्य भारतीय युवाओं में अंतर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य की रचना करना है, ताकि विचारों, मूल्यों और संस्कृति को प्रोत्साहन दिया जाए तथा युवाओं को शांति और समझ को बढ़ाने के लिए संलिप्त किया जाए।
यह समझौता-ज्ञापन पांच वर्षों के लिए मान्य होगा। इसमें सहयोग के निम्नलिखित क्षेत्र शामिल हैं-
युवा आदान-प्रदान कार्यक्रमों का आयोजन
अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों और गोष्ठियों के लिए निमंत्रण का आदान-प्रदान
मुद्रित सामग्रियों, फिल्मों, अनुभवों, शोध और अन्य सूचनाओं का आदान-प्रदान
युवा शिविरों, युवा उत्सवों और अन्य सहयोगी युवा गतिविधियों, अध्ययन यात्राओं, लघु कार्यशालाओं तथा युवा संबंधी मामलों पर आयोजित गोष्ठियों इत्यादि में भागीदारी।
(●) मंत्रिमंडल ने अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा ‘रोजगार और शांति तथा लचीलेपन संबंधी मर्यादित कार्य (संख्या 205)’ के मद्देनजर अनुमोदन के नये लेख-पत्र को संसद में पेश करने को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) द्वारा ‘रोजगार और शांति तथा लचीलेपन संबंधी मर्यादित कार्य (संख्या 205)’ के मद्देनजर अनुमोदन के नये लेखपत्र को संसद में पेश करने को मंजूरी प्रदान की। जून 2015 में जिनेवा में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन के 106वें सत्र में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने इस अनुमोदन को स्वीकार किया था। भारत ने अनुमोदन को अपनाने का समर्थन किया था।
आईएलओ के हर सदस्य देश के लिए यह जरूरी है कि वे लेखपत्रों को अपने सक्षम प्राधिकार के सामने पेश करें। भारत को इसे संसद में पेश करना है। संसद की सूचना के लिए लेखपत्र को पेश करना कोई फौरी शर्त नहीं है। आईएलओ अनुमोदन गैर-बाधित उपकरण है। उसका उद्देश्य राष्ट्रीय नीति प्रक्रिया के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत उपलब्ध कराना है।
अनुमोदन के तहत सदस्य देशों को दिशा-निर्देश प्रदान किये जाएंगे, ताकि वे रोजगार और मर्यादित कार्य के लिए उपाय कर सकें। इसका उद्देश्य रोकथाम, बहाली शांति और लचीलापन है, जिसके तहत टकराव और आपदाओं के समय पैदा होने वाले संकटों का सामना करना है।
अनुमोदनों में सभी मानवाधिकारों के प्रति सम्मान और कानून का राज सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है, जिनमें बुनियादी सिद्धांतों के प्रति सम्मान, काम करने के दौरान अधिकार तथा अंतर्राष्ट्रीय श्रम मानक शामिल हैं। इनमें खासतौर से वे अधिकार और सिद्धांत शामिल हैं, जो रोजगार तथा मर्यादित कामों से संबंधित हैं।
अनुमोदन में सामाजिक सुरक्षा के उपायों के विकास और उन्हें मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया है, ताकि संकटों की रोकथाम की जा सके और बहाली तथा लचीलेपन का निर्माण संभव हो। अनुमोदनों में कहा गया है कि सदस्य देश शांति को बढ़ावा देने, संकटों की रोकथाम करने और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए विस्तृत कार्यप्रणाली तैयार करें। इसके तहत सदस्यों को रोजगार और मर्यादित कार्य अवसरों के मद्देनजर स्थानीय आर्थिक बहाली को प्रोत्साहन देना है, सामाजिक-आर्थिक एकीकरण करना है, सामाजिक सुरक्षा प्रदान करनी है और सामाजिक समावेश करना है। इसके अलावा सतत विकास तथा लघु और मझौले उपक्रमों के मद्देनजर उपक्रमों को इसमें शामिल होना चाहिए, ताकि संवर्धन एवं सामान्य स्थिति कायम करने के लिए कर्मचारियों तथा कामगार संगठनों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
अनुमोदन संख्या 205, टकरावों और आपदाओं से उत्पन्न संकट की स्थिति द्वारा प्रभावित अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों के कामगारों और रोजगार चाहने वालों तथा नियोक्ताओं सहित संकट के निवारण में संलिप्त कामगारों पर लागू है।
(●) मंत्रिमंडल ने महापत्तन प्राधिकरण विधेयक 2016 में परिवर्तनों को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संसद में लंबित महापत्तन प्राधिकरण विधेयक 2016 में सरकारी संशोधनों को शामिल करने की स्वीकृति दे दी है। यह संशोधन विभाग संबंधी संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों पर आधारित हैं।
निम्नलिखित परिवर्तन शामिल किये गये हैं :
पत्तन में सेवारत कर्मचारियों में से पत्तन प्राधिकरण बोर्ड में नियुक्त किये जाने वाले श्रम प्रतिनिधियों की संख्या एक से दो तक बढा दी गई है।
कर्मचारियों के हित का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किया जाने वाला सदस्य 3 वर्ष के एक कार्यकाल के लिए पद पर बना रहेगा और लगातार दो बार से अधिक अवधि के लिए नहीं रहेगा। बोर्ड में उसकी सदस्यता उसके सेवानिवृत्त होने के साथ ही समाप्त हो जाएगी।
पत्तन प्राधिकरण बोर्ड में स्वतंत्र सदस्यों की संख्या न्यूनतम दो से अधिकतम चार होगी।
महापत्तन न्यास अधिनिम 1963 के अंतर्गत प्रत्येक व्यक्ति, जो न्यासी बोर्ड से ऐसी किसी तारीख से पहले कोई सेवानिवृत्ति लाभ प्राप्त कर रहा था, वह बोर्ड से ऐसे लाभ प्राप्त करता रहेगा।
प्रत्येक महापत्तन का बोर्ड किसी विकास अथवा पत्तन सीमाओं के अंतर्गत और उनसे संबंधितभूमि पर बनी अवसंरचना और स्थापित की जाने वाली अवसंरचना के संबंध में विशिष्ट मास्टर प्लान तैयार करने के लिए हकदार है और मास्टर प्लान पर किसी स्थानीय अथवा राज्य सरकार के किसी प्राधिकरण, जो भी हों, के विनियम लागू नहीं होंगे।
पीपीपी परियोजनाओं के लिए अधिनियम के लागू होने के बाद रियायत प्राप्तकर्ता बाजार की शर्तों पर प्रशुल्क निर्धारित करने में स्वतंत्र होगा।
इस अधिनियम के प्रावधान के अंतर्गत बोर्ड द्वारा अथवा बोर्ड की ओर से प्राप्त सभी धन पत्तनों के ऐसे सामान्य खाते और खातों में जमा किया जाएगा जो बोर्ड द्वारा वित्त मंत्राल, भारत सरकार के दिशा निर्देशों के अनुसार समय-समय पर किसी राष्ट्रीयकृत बैंक के साथ खोले जाने हैं।
एडजुकेटरी बोर्ड के पीठासीन अधिकारी और सदस्यों की तैनाती चयन समिति की सिफारिशों पर केन्द्र सरकार द्वारा की जाती है।
केंद्र सरकार एडजुकेटरी बोर्ड को पीठासीन अधिकारी अथवा किसी सदस्य को निर्धारित तरीकेसे हटाने का अधिकार प्राप्त हैं।
निरस्त और सेविंग के अंतर्गत एक सेविंग फंड रखा गया है ताकि बम्बई पत्तन न्यास अधिनियम, 1879 और कोलकाता पत्तन न्यास अधिनियम, 1890 के अंतर्गत सम्पत्ति के म्युनिसिपल आंकलन के संबंध में मुम्बई तथा कोलकाता पत्तन द्वारा प्राप्त किया जा रहा मौजूदा लाभ जारी रहेगा।
(●) मंत्रिमंडल ने मनोनयन और पीएससी व्यवस्था के तहत छोड़ दी गई खोजों के संबंध में ओएनजीसी और ओआईएल की 60 गैर-मौद्रिकृत खोजों के लिए छोटे तेल क्षेत्र (डीएसएफ) नीतिबोली दौर 11 को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में खोजे गये छोटे क्षेत्र नीति बोली राउंड 2 के अंतर्गत चिन्ह्ति 60 खोजे गये छोटे क्षेत्रों और गैर मौद्रिकृत खोजों के लिए 14 अक्टूबर 2015 को अधिसूचित खोजे गये छोटे क्षेत्र नीति विस्तार को स्वीकृति दे दी है। इनमें से 22 क्षेत्र /खोज तेल और प्राकृतिक गैस आयोग (ओएनजीसी) लिमिटेड के 5 ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) के तथा 12 नयी खोज तथा लाइसेंसिंग नीति (एनईएलपी) ब्लॉकों से 12 छोडे गये क्षेत्र /खोज हैं। इसके अतिरिक्त 21 क्षेत्र/ खोज डीएसएफ बोली राउंड 1 में शेष हैं, जिसकी पेशकश की गई थी लेकिन निवेशक की ओर से पर्याप्त रूचि नहीं दिखाने के कारण ठेका नहीं दिया गया था।
विवरण :
इन खोजोंमें अनुमान किया गया है कि 194.65 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) तेल तथा उसके बराबर गैस होगी।
इन तेल क्षेत्रों को तेजी से विकसित और मौद्रिकृत किया जाएगा जिससे तेल और गैस उत्पादन में मजबूती आयेगी और परिणामस्वरूप देश की ऊर्जा सुरक्षा बढेगी।
अनुमान है कि इन तेल क्षेत्रों में निवेश से 28,000 से अधिक प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष और लाभकारी रोजगार का सृजन होगा।
इस नीति का विस्तार भविष्य की बोली राउंड के लिए किया गया है। पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस सचिव, सचिव (व्यय) तथा विधि सचिव वाली अधिकारसम्पन्न सचिवों की समिति आदर्श राजस्व हिस्सेदारी ठेका,प्रस्ताव आमंत्रण नोटिस (एनआईओ) तथा खोजे गये छोटे क्षेत्रों की बोली राउंड 2 के दस्तावेजों को अंतिम रूप देगी और स्वीकृति करेगी।
ठेका प्रदान करने की स्वीकृति ईसीएस की सिफारिशों के आधार पर पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस मंत्री और वित्त मंत्री द्वारा दी जाएगी।
(●) मंत्रिमंडल ने ‘’प्रधानमंत्री अनुसंधान अध्येता (पीएमआरएफ)’’ कार्यान्वयन को मंजूरी दी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज 2018-19 से 7 वर्ष की अविध के लिए 1650 करोड़ रूपये की कुल लागत की ‘’प्रधानमंत्री अनुसंधान अध्येता (पीएमआरएफ)’’ योजना को स्वीकृति दे दी है।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्र की प्रगति और विकास के लिए अभिनव प्रयोग तथा प्रौदयोगिकी के महत्व पर बल दिया है। यह फेलोशिप योजना प्रधानमंत्री के नवाचार के माध्यम से विकास के सपने को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इस योजना की घोषणा बजट भाषण 2018-19 में की गई थी।
इस योजना के अंतर्गत आईआईएससी/ आईआईटी /एनआईटी / आईआईएसईआर/ आईआईआईटी से विज्ञान एंव प्रौदयोगिकी विषयों में बी.टेक.अथवा समेकित एम.टेक. अथवा एमएससी पास करने वाले अथवा अंतिम वर्ष के सर्वोत्तम छात्रों को आईआईटी/ आईआईएससी में पीएचडी कार्यक्रम में सीधा प्रवेश दिया जाएगा। ऐसे छात्र जो पात्रता मानदंड पूरा करते हैं और जिन्हें पीएमआरएफ दिशा निर्देशों में निर्धारित चयन प्रक्रिया के जरिए छांटा गया है, को पहले 2 वर्षों के लिए 70,000 रूपये प्रति माह, तीसरे वर्ष के लिए 75,000 रूपये प्रति माह तथा चौथे और 5वें वर्ष में 80,000 रूपये प्रति माह की फेलोशिप प्रदान की जाएगी। इसके अलावा प्रत्येक अध्येता को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और सेमिनारों में शोध पत्र प्रस्तुत करने के लिए उनकी विदेश यात्रा से संबंधित खर्च को पूरा करने के लिए 5 वर्ष की अवधि के लिए 2 लाख रूपये का शोध अनुदान दिया जाएगा। वर्ष 2018-19 की अविध से प्रारंभ 3वर्ष में अधिकतम 3000 फेलो का चयन किया जाएगा।
यह योजना विज्ञान और प्रौदयोगिकी के अग्रणी क्षेत्रों में स्वदेशी रूप से शोध करने के लिए देश में उपलब्ध प्रतिभा के दोहन में सहायक होगी। इस योजना के तहत शोध एक ओर हमारी राष्ट्रीय प्राथमिकता को हल करेगा और दूसरी ओर देश की प्रमुख शैक्षिक संस्थाओं में गुणवत्तापरकसंकाय की कमी दूर करेगा।
(●) मंत्रिमंडल ने पारे पर मिनामाता समझौते की पुष्टि को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने पारे पर मिनामाता समझौते की पुष्टि को मंजूरी दी। इसके साथ ही पुष्टि किये गये समझौते को सौंपने के जरिए भारत समझौते का पक्ष बन गया है।
पारे पर मिनामाता समझौते की पुष्टि की मंजूरी के तहत पारा आधारित उत्पादों और पारा यौगिकों संबंधी प्रक्रियाओं के संबंध में 2025 तक की अवधि निर्धारित की गयी है।
पारे पर मिनामाता समझौता एक सतत विकास के संबंध में कार्यान्वित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को पारे तथा पारे के यौगिकों के उत्सर्जन से बचाना है।
समझौते के तहत पारे के दुष्प्रभावों से बचाव होगा और विकासशील देशों के विकास की सुरक्षा हो सकेगी।
पारे पर मिनामाता समझौता से उपक्रमों को प्रेरणा मिलेगी कि वे पारा-मुक्त विकल्पों को अपनायें और अपनी निर्माण प्रक्रियाओं में पारा मुक्त प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल करें। इससे अनुसंधान एवं विकास में तेजी आएगी तथा नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा।
(●) मंत्रिमंडल ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधीन स्वायत्तशासी निकायो को युक्तिसंगत बनाने का मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधीन स्वायत्तशासी निकायो को युक्तिसंगत बनाने को मंजूरी दी। इन निकायों में राष्ट्रीय आरोग्य निधि (आरएएन) और जनसंख्या स्थिरता कोष (जेएसके) शामिल हैं। इनके कामकाज को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के तहत करने का भी प्रस्ताव है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधीन स्वायत्तशासी निकायों को युक्तिसंगत बनाने में अंतर-मंत्रालयी परामर्श तथा इन निकायों के मौजूदा उप-नियमों की समीक्षा शामिल है।
राष्ट्रीय आरोग्य निधि का गठन एक पंजीकृत सोसायटी के रूप में किया गया था, ताकि केन्द्रीय सरकारी अस्पतालों में उपचार कराने वाले निर्धन मरीजों को वित्तीय चिकित्सा सहायता दी जा सके। अग्रिम धन राशि इन अस्पतालों को चिकित्सा निरीक्षकों को दी जाएगी, जो हर मामले को देखते हुए सहायता प्रदान करेंगे। चूंकि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग अस्पतालों को धनराशि प्रदान करता है इसलिए विभाग द्वारा अस्पतालों को सीधे अनुदान दिया जा सकता है। इस तरह आरएएन का कामकाज स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधीन लाया जाएगा। आरएएन, सोसायटी की प्रबंध समिति सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के प्रावधानों के तहत स्वायत्तशासी निकायों को रद्द करने के लिए बैठक करेगा। इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्री के कैंसर रोगी निधि को भी विभाग को स्थानांतरित कर दिया जाएगा। इसके लिए एक वर्ष का समय रखा गया है।
जनसंख्या स्थिरता कोष वर्ष 2003 में 100 करोड़ रुपये की निधि के साथ स्थापित किया गया था। इसका उद्देश्य जनसंख्या स्थिरीकरण रणनीतियों को प्रति जागरूकता बढ़ाना था। जेएसके लक्षित आबादी के मद्देनजर विभिन्न गतिविधियों का आयोजन करता है। मंत्रालय द्वारा जेएसके का कोई लगातार वित्तपोषण नहीं किया जाता। जनसंख्या स्थिरीकरण रणनीतियों के निजी और कार्पोरेट वित्तपोषण की जरूरत होती है, जो जेएसके के जरिए संभव है। यद्यपि जेएसके जनसंख्या स्थिरीकरण रणनीतियों में अहम भूमिका निभाता रहेगा, लेकिन एक स्वायतशासी निकाय के रूप में उसका अस्तित्व आवश्यक नहीं होगा। इस प्रकार एक स्वायशासी निकाय के रूप में जेएसके को बंद किया जा सकता है क्योंकि निधि के तौर पर उसका कामकाज विभाग द्वारा संभव है।
पृष्ठभूमि:
व्यय प्रबंधन आयोग कि सिफारिशों के आधार पर नीति आयोग ने 19 स्वायतशासी निकायों की समीक्षा की थी। ये सभी निकाय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधीन थे और उन्हें सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत कायम किया गया था। नीति आयोग ने समीक्षा समिति को अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें इन निकायों को युक्तिसंगत बनाने की सिफारिशें की गयी हैं। सरकार का मुख्य प्रयास यह है कि स्वायशासी निकायों की समीक्षा की जाए और उन्हें युक्तिसंगत बनाया जाए, ताकि उनके कामकाज, प्रभाव और कार्यकुशलता में सुधार हो, वित्तीय और मानव संसाधनों का उचित इस्तेमाल हो, मौजूदा निति में उनकी प्रासंगिकता एवं प्रशासन में इजीफा हो और उनकी निगरानी उचित तरीके से हो सके। समिति ने आरएएन और जेएसके को बंद करने की तथा उनके कामकाज को मंत्रालय के अधीन लाने की सिफारिश की है।
(●) मंत्रिमंडल ने कानून प्रवर्तन प्रशिक्षण के लिए भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय सहयोग-ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने कानून प्रवर्तन प्रशिक्षण के लिए भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय सहयोग-ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने को मंजूरी प्रदान की है। इस सहयोग-ज्ञापन पर अमेरिका के संघीय कानून प्रवर्तन प्रशिक्षण केन्द्र (एफएलईटीसी) और भारत के पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (बीपीआर एण्ड डी) के बीच हस्ताक्षर किये जाने हैं।
इस सहयोग-ज्ञापन से भारत-अमेरिका होमलैंड सुरक्षा संवाद के तत्वावधान में दोनों देशों के बीच सहयोग में बढ़ोत्तरी का मार्ग प्रशस्त होगा।
सहयोग-ज्ञापन से प्रशिक्षण, प्रशिक्षण सामग्री, प्रशिक्षकों की गुणवत्ता इत्यादि के मानकों में सुधार करने में सहायता होगी। इससे देश में पुलिसबलों के कामकाज में सुधार होगा और ‘स्मार्ट पुलिस’ की अवधारणा पूरी होगी।
भारत और अमेरिका अपनी भूमि तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करने और आतंकवादी हमलों द्वारा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को रोकने के मद्देनजर साझा हित रखते हैं। इसके अलावा दोनों देश आतंकवाद और अंतर्देशीय अपराधों से उनके सभी स्वरूपों तथा रूपों के खिलाफ लड़ने के मामलों में भी साझा हित रखते हैं।
पृष्ठभूमि:
अमेरिका के राष्ट्रपति जब नवंबर 2010 में भारत पधारे थे, तब दोनों पक्षों ने होमलैंड सुरक्षा संवाद कार्यप्रणाली स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की थी। यह कार्यप्रणाली भारत-अमेरिका आतंकवाद विरोधी पहल पर हस्ताक्षर करने के अनुरूप है।
होमलैंड सुरक्षा संवाद के तहत 6 उप-समूहों का गठन किया गया, जिनके दायरे में निम्नलिखित क्षेत्र हैं-
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, यातायात, बंदरगाह, सीमा और समुद्री सुरक्षा
महानगर पुलिस प्रणाली और संघीय राज्य तथा स्थानीय भागीदारों के बीच सूचना साझा करना
गैर कानूनी वित्तपोषण, नकदी की तस्करी, वित्तीय धोखाधड़ी और जाली मुद्रा
साइबर सूचना
क्षमता निर्माण, और
प्रौद्योगिकी उन्नयन
भारत और अमेरिका के बीच होमलैंड सुरक्षा संवाद के अंग के रूप में क्षमता निर्माण के लिए एक उप-समूह की स्थापना की गयी है। इसका उद्देश्य अमेरीकी प्राधिकारों के सहयोग से भारत में काम करने वाली कानून प्रर्वतन एजेंसियों का क्षमता निर्माण है। ये एजेंसियां सभी 6 उप-समूहों से जुड़ी हैं, जिन्हें होमलैंड सुरक्षा संवाद में शामिल किया गया है। भारत और अमेरिका में क्षमता निर्माण के कामकाज से संबंधित सभी प्रमुख संस्थानों के बीच संरचनात्मक सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके मद्देनजर अमेरिकी पक्ष ने अमेरिका के एफएलईटीसी और उसके भारतीय समकक्ष बीपीआर एण्ड डी के बीच एक सहयोग-ज्ञापन का प्रस्ताव किया है।
(●) मंत्रिमंडल ने वर्गीकरण के मानकों को बदलने के लिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रम विकास अधिनियम, 2006 में संशोधन तथा लोकसभा में लंबित एमएसएमईडी (संशोधन) विधेयक, 2015 को वापस लेने के प्रस्ताव को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रमों के वर्गीकरण के आधार में बदलाव को मंजूरी दी है। इसे ‘संयंत्र एवं मशीनरी/उपकरण में निवेश’ से बदलकर ‘वार्षिक कारोबार’ में बदलने का प्रस्ताव है।
इस कदम से व्यापार करने में आसानी होगी और वर्गीकृत वृद्धि के नियम बनेंगे और जीएसटी के दायरे में नयी कर प्रणाली वजूद में आएगी।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रम विकास (एमएसएमईडी) अधिनियम, 2006 की धारा 7 में संशोधन हो जाएगा और माल तथा सेवाओं के संबंध में वार्षिक कारोबार को ध्यान में रखते हुए इकाईयों को इस प्रकार परिभाषित किया जाएगा-
जहां 5 करोड़ रुपये से अधिक का वार्षिक कारोबार नहीं होगा, वहां सूक्ष्म उपक्रम को एक इकाई के रूप में परिभाषित किया जाएगा।
जहां वार्षिक कारोबार 5 करोड़ से अधिक, लेकिन 75 करोड़ से ज्यादा नहीं होगा, वहां लघु उपक्रम को एक इकाई के रूप में परिभाषित किया जाएगा।
जहां वार्षिक कारोबार 75 करोड़ रुपये से अधिक है परंतु 250 करोड़ रुपये से अधिक नहीं, वहां मध्यम उपक्रम को एक इकाई के रूप में परिभाषित किया जाएगा।
इसके अलावा केन्द्र सरकार अधिसूचना के जरिए कारोबार सीमा में बदलाव कर सकती है, जो एमएसएमईडी अधिनियम की धारा 7 में उल्लेखित सीमा से तिगुनी से अधिक नहीं हो सकती।
मौजूदा एमएसएमईडी अधिनियम (धारा 7) में निर्माण इकाईयों के संबंध में संयंत्र और मशीनरी में निवेश तथा सेवा उपक्रमों के लिए उपकरण में निवेश के आधार पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उपक्रमों का वर्गीकरण करता है। संयंत्र और मशीनरी में निवेश का मानक स्व-घोषणा है जिसके लिए प्रमाणीकरण और लेन देन की लागत आवश्यक है।
जीएसटी नेटवर्क के संबंध में कारोबार के आंकड़ों को भरोसेमंद माना जा सकता है। इसके साथ अन्य उपायों के तहत भी संयंत्र एवं मशीनरी/उपकरण, रोजगार के संबंध में निवेश के आधार पर वर्गीकरण संभव है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और निरीक्षण की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। इसके अलावा व्यापार करने की आसानी में भी इजाफा होगा। संशोधन से सरकार को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रमों के वर्गीकरण में लचीला रूख अपनाने में मदद मिलेगी ताकि बदलते आर्थिक परिदृश्य में विकास हो सके। इस संबंध में एमएसएमईडी अधिनियम में संशोधन की आवश्यकता नहीं रहेगी।
वर्गीकरण के मानकों में बदलाव से व्यापार करने में होने वाली आसानी को बढ़ावा मिलेगा। परिणामस्वरूप वृद्धि होगी तथा देश के एमएसएमई क्षेत्र में प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार को बढ़ाने का रास्ता खुलेगा।
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