नई दिल्ली 29 जून। राजधानी के सरकारी व गैर सरकारी शिक्षण संस्थाओं के आसपास रंग बिरंगे पाउचों में बिकने वाला जहर बहुत ही आसानी से मिल रहा है जो कि आने वाली भावी पीढ़ी के लिए बेहद नुकसानदायक है। दिन प्रतिदिन युवाओं में बढ़ती धूम्रपान उत्पादों की लत को रोक पाने मे पुलिस व शिक्षा विभाग की अह्म भूमिका है। इसलिए अब पुलिस, शिक्षा विभाग ने संबध हैल्थ फाउंडेशन व मैक्स इंडिया फाउंडेशन के साथ मिलकर दिल्ली के सभी शिक्षण संस्थाओं केा तंबाकु मुक्त बनाने के लिए अभियान का आगाज दिल्ली नगर निगम की स्कूलों से किया गया है। इस दौरान शिक्षण संस्थाओं को तंबाकू मुक्त बनाने के लिए एक गाईडलाइन भी जारी की गई जिसके तहत शिक्षण संस्थाओं को तंबाकू मुक्त किया जायेगा। जिसके तहत 5 हजार 229 सरकारी व गैर सरकारी शिक्षण संस्थाओं को तंबाकू मुक्त किया जाना है। ग्लोबल एडल्ट टोबेको सर्वे (गेटस 2017) के अनुसार देशभर में तंबाकू उत्पादों के 15 से 24 वर्ष तक के 12.4 प्रतिशत युवा इसके उपयोगकर्ता है।
संबध हैल्थ फाउंडेशन के संजय सेठ ने कहा कि बच्चों व भावी युवा पीढ़ी को तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादों से बचाना सबसे बड़ा कठिन कार्य है इसलिए यदि स्कूल स्तर से ही ऐसे संस्कार इन बच्चों में डाले जाए कि वे इनसे हमेशा दूर रहें तो इनके भविष्य को सुरक्षित, शारिरीक व मानसिक रुप से ताकतवर बनाया जा सकेगा। इसके लिए शिक्षकों के साथ साथ अभिभावकों को भी सकारात्मक रुप से सहयेाग करना चाहिए।
सेठ ने कहा कि दिल्ली में 24.3 प्रतिशत (30 लाख) लोग किसी न किसी रुप में तंबाकू उत्पादों का प्रयोग करतें है वंही देश में 14.6 प्रतिशत विद्यार्थी किसी न किसी रूप में तम्बाकू उत्पादेां का उपयोग कर रहे है। दिल्ली में प्रतिदिन 81 बच्चे इसकी शुरुआत करतें है वंही देश में 5500 बच्चे हर दिन तंबाकू सेवन की शुरुआत करते हैं और वयस्क होने की आयु से पहले ही तम्बाकू के आदी हो जाते हैं। इसी कारण दिल्ली में प्रतिवर्ष 10 हजार 6 सौ लोग अपनी जान गंवा देते है। तंबाकू उपयोगकर्ताओं में से केवल 3 प्रतिशत ही इस लत को छोड़ने में सक्षम हैं। इसीलिए यह आवश्यक है कि हम बच्चों को तम्बाकू सेवन की पहल करने से ही रोके।
मैक्स इंडिया फाउंडेशन की मोहिनी दलजीत सिंह ने कहा कि तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादों के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी देते हुए इससे बच्चों का शारिरीक व मानसिक विकास रुक जाता है, जिससे वे पढ़ाई में भी अपना मन नही लगा पाते। इसलिए प्राईमरी स्तर से बच्चों में इन नशों के प्रति संदेश डाले जाते है तो उनमें इसकी लत लगने की संभावनांए घट जाती है।
वे बतातीं है कि इनमें एक चौथाई ऐसे विद्यार्थी है जिनके माता पिता में से कोई एक या दोनों धूम्रपान करते है। हालाकि तंबाकू के उपयोग का कोई सुरक्षित स्तर नहीं है। तंबाकू उत्पादों के उपभोक्ताओ की सुरक्षा इसी में है वह पूरी तरह इसके उपयोग को रोक दे।
शिक्षा निदेशालय के एमसीडी नार्थ के डायरेक्टर कृष्ण कुमार ने बताया कि उतरी दिल्ली नगर निगम की सभी सरकारी व गैर सरकारी शिक्षण सस्थाओं को तंबाकू मुक्त बनाने के लिए केाटपा (सिगरेट एंव अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003 ) अधिनियम के तहत सभी शिक्षण संस्थाओं को निर्देश जारी कर दिये गए है। जिसमें 20 जुलाई 2017 तक सभी शिक्षण संस्थाओं को धारा 4 एंव 6 ब के तहत् तंबाकू मुक्त घोषित किया जाना है। जिसमें इन शिक्षण संस्थाओं के अंदर व बाहर परिसर में चेतावनी बोर्ड लगेंगे। इसके साथ ही सभी प्रधानाध्यापकों को अपने क्षेत्राधिकार में आने वाली शिक्षण संस्थाओं को शीघ्र तंबाकू मुक्त शिक्षण घेाषित करने को कहा गया है। इसमें कोई भी इन संस्थानेां में इस तरह के उत्पादों का प्रयोग नही करेगा, माचिस, एस्ट्रे, शिक्षण संस्थाओं के एक सौ गज के दायरे में किसी भी के तंबाकू उत्पाद की बिक्री निषेध की चेतावनी का प्रदर्शन तथा शिक्षण संस्थाओं में तंबाकू के दुष्प्रभावेां पर विभिन्न गतिविधियों का आयेाजन करना शामिल है।
वे बतातें है कि इन शिक्षण संस्थाओं के प्रधानाध्यापकेां को दो तरह से अपने शिक्षण संस्थाओं को तंबाकू मुक्त बनाने की रिपोर्ट करने को कहा गया है। जिसमें पहले स्तर में सभी प्रधानाध्यापक अपने शिक्षण संस्थान को तंबाकू मुक्त शिक्षण करके जोनल आफिसर को रिपोर्ट करेंगे। वंही सभी जोनल आफिसर अपने क्षेत्राधिकार में आने वाली शिक्षण संस्थाओं का डाटा एकत्रित कर शिक्षा निदेशालय को भेजेंगे।
दिल्ली नार्थ के डीसीपी जतिन नरवाल ने कहा कि शिक्षण संस्थाओं में ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान अधिकतर तंबाकू बेचने वाले वेंडर ने दुकाने हटा ली लेकिन अब जुलाई माह में शुरु हेा रही शिक्षण संस्थाओं के आसपास किसी भी तरह के तंबाकू उत्पादों का विक्रय नही हो इसको सुनिश्चित किया जाना है। इसमें स्थानीय जनता का सहयेाग जरुरी है। नरवाल ने कहा कि क्षेत्र की सभी शिक्षण संस्थाओं के आसपास तंबाकू इत्यादि उत्पादों का विक्रय न हो इसके लिए सभी शिक्षण संस्थाओं के प्रतिनिधियों के सहयोग से इन्हे तंबाकू मुक्त बनाया जायेगा। इसके पालन नही करने पर कोटपा में चालान करने की कार्यवाही की जायेगी।
डीसीपी ने कहा कि सभी शिक्षण संस्थाओं के आसपास किसी प्रकार के तंबाकू उत्पादों को नाबालिगों से बिकवाते या कोई बेचता हुआ पाया गया तो उसके खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम के तहत कार्यवाही होगी। जिसमें एक लाख का जुर्माना व सात साल की सजा का प्रावधान है।
वायॅस ऑफ टोबेको विक्टमस (वीओटीवी) सरंक्षक व कैंसर रोग विशेषज्ञ डा० सोरव गुप्ता ने बताया कि यदि कम्र में ही युवाओं को तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादेां से बचा लिया जाये तो उनमें बाद में इनको शुरु करने की संभावनांए कम हो जाती है। बच्चों एंव युवाओं को बचाने के लिए अह्म कदम उठाना बहुत जरूरी है। किशोर उम्र के जो लडके लड़कियां धूम्रपान करतें है, उनमें से अधिकतर लोग तंबाकू से जुड़ी बीमारियेां से पीडि़त हो जातें है। औसतन धम्रपान करने वाले व्यक्ति की आयु धूम्रपान करने वाले व्यक्ति की तुलना में 22 से 26 प्रतिशत तक घट जाती है।
यह है नियम
अधिनियम 4
केाटपा की धारा 4
शिक्षण संस्थाओं के अंदर की और इसकी रोकथाम की सूचना।
अधिनियम 6 ब
सभी शिक्षण संस्थाओं से 100गज की दूरी में तंबाकू उत्पादों की बिक्री निषेध। शिक्षण संस्थाओं के बाहर की और इसकी रोकथाम की सूचना।
जुर्माना
सार्वजनिक स्थल,महाविद्यालय परिसर के अंदर व चारदीवारी के सौ गज के दायरे में किसी भी प्रकार के तंबाकू उत्पादों की बिक्री या सेवन करते पाए जाने पर कोटपा कानून के तहत 200 रुपये तक का जुर्माना किया जा सकता है।
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