05 जनवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
(●) राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण नीति
सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद (पैकेजिंग और लेबेलिंग) संशोधन नियम, 2014 पर अधीनस्थ विधान समिति (सीओएसएल) 16वीं लोकसभा ने अपनी 11वीं रिपोर्ट में एक “राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण नीति” का निर्माण करने की आवश्यकता महसूस की जो कि समान तथा व्यावहारिक होनी चाहिए। राष्ट्रीय स्तर पर सचिवों की एक अंतर्मंत्रालयी समिति का गठन किया गया है।
सिगरेट तथा अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन पर निषेध तथा व्यापार और वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति और वितरण का विनियमन) अधिनियम, 2003 (सीओटीपीए, 2003) के विभिन्न प्रावधानों के प्रवर्तन का उत्तरदायित्व राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों पर है।
वर्ष 2007-08 में इस मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (एनटीसीपी) को आरंभ किया गया जिसका एक उद्देश्य सीओटीपीए, 2003 के तहत प्रावधानों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना भी था।
एनटीसीपी के तहत राज्य और जिला स्तरीय समन्वय समितियां इसके कार्यान्वयन का पर्यवेक्षण करने के लिए हैं।
प्रत्येक वित्तीय वर्ष के दौरान राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा प्रस्तुत तिमाही रिपोर्टें और राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के साथ समीक्षा बैठकें कार्यक्रम के कार्यान्वयन के निगरानी तंत्र का गठन करती हैं। इसके अतिरिक्त राज्य कार्यक्रम कार्यान्वयन योजना (पीआईपी) प्रक्रिया के माध्यम से अपने राज्य में आयोजित वार्षिक गतिविधियों का ब्यौरा प्रस्तुत करते हैं और राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ द्वारा इसकी जांच की जाती है। इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम के कार्यान्वयन पर राष्ट्रीय कार्यक्रम समन्वय समिति (एनपीसीसी) की बैठकों के दौरान विचार-विमर्श किया जाता है।
मंत्रालय ने राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को पत्र लिखा है कि वे एक ऐसा तंत्र विकसित करने पर विचार करें जो उन खुदरा दुकानों को निगम प्राधिकरण/स्थानीय प्राधिकरण के माध्यम से अनुमति/प्राधिकारपत्र इस शर्त/प्रावधान के साथ प्रदान करें कि तंबाकू उत्पादों की बिक्री करने के लिए प्राधिकृत दूकानें टॉफी, कैन्डी, चिप्स, बिस्किट, सॉफ्ट ड्रिंक आदि जैसे गैर-तंबाकू उत्पाद, जो कि विशेष रूप से बच्चों के लिए होती हैं, की बिक्री नहीं कर सकती हैं।
सिगरेट तथा अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन पर निषेध तथा व्यापार और वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति और वितरण का विनियमन) संशोधन नियमावली, 2011 के साथ पठित सीओटीपीए, 2003 की धारा 6 (क) के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों को तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर रोक है तथा सीओटीपीए, 2003 की धारा 6 (ख) के अनुसार किसी शैक्षिक संस्थान के 100 गज की परिधि के भीतर तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर निषेध है।
राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों से सीओटीपीए, 2003 के तहत प्राप्त तिमाही रिपोर्टों से यह स्पष्ट है कि इस धारा का उल्लंघन हुआ है और तद्नुसार उल्लंघनकर्ताओं पर जुर्माना लगाकर कार्यवाही की जा रही है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल द्वारा लोकसभा में लिखित में उत्तर दिया गया।
(●) स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी क्षेत्र का निवेश
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को उनके समग्र संसाधन समूह के तहत उनके वार्षिक कार्यक्रम कार्यान्वयन योजनाओं (पीआईपी) में राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा की गई मांग के आधार पर सार्वजनिक निजी भागीदारी के माध्यम से स्वास्थ्य परिचर्या सेवाओं के प्रावधानों के लिए सहायता सहित उनके स्वास्थ्य प्रणालियों को सुदृढ़ बनाने के लिए तकनीकी तथा वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। एनएचएम के अंतर्गत राज्यों को उन सेवाओं को अनुबंध पर लेने अथवा आउटसोर्स करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है ताकि जन स्वास्थ्य सुविधा केन्द्रों में देखभाल की प्रभावकारिता और गुणवत्ता में सुधार हो सके अथवा निजी क्षेत्र को जन स्वास्थ्य सुविधा केन्द्रों अथवा उनके द्वारा महसूस की गई जरूरतों के आधार पर निजी क्षेत्र में महत्वपूर्ण अंतराल दूर हो सके। इसके लिए एनएचएम के अतंर्गत राज्यों तथा अन्य पणधारकों के साथ परामर्श के आधार पर, सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) प्रारूप के अंतर्गत स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं के प्रावधान के लिए निम्नलिखित सेवाओं हेतु राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को दिशा-निर्देश परिचालित किए गए हैं:
• आपातकालीन परिवहन सेवा
• चल-चिकित्सा इकाई सेवा
• निःशुल्क नैदानिक सेवा पहल का प्रावधान (निःशुल्क पैथोलॉजिकल सेवाएं, निःशुल्क टेलीरेडियोलॉजी सेवाएं, निःशुल्क सीटी-स्कैन सेवाएं)
• जैव चिकित्सा उपकरण प्रबंधन रख-रखाव कार्यक्रम
राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम
• स्वास्थ्य सुविधा केन्द्रों में अस्पताल अपशिष्ट प्रबंधन, छटाई, उपचार और निपटान सेवाओं का प्रावधान
• पीपीपी के अंतर्गत एनजीओ द्वारा स्वास्थ्य सुविधा केन्द्रों का प्रबंधन
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे द्वारा लोकसभा में लिखित में उत्तर दिया गया।
(●) महिलाओं में स्तनपान के बारे में जागरूकता
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 4 (2015-16) के अनुसार, देश में तीन वर्ष से कम आयु के 41.6 प्रतिशत बच्चों को जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान कराया गया।
इसके अलावा, राज्य/संघ राज्य क्षेत्र द्वारा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय केस्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) पोर्टल पर अपलोड किए गए डाटा के अनुसार, 1,83,10,666 नवजात शिशुओं को 2016-17 के दौरान जन्म लेने के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराया गया।
स्तनपान व्यवहार को प्रोत्साहन देने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम “मदर्स एब्सोल्युट एफेक्शन (एमएए)” लागू किया है।
• इस कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य स्टाफ और प्रत्यायित सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा) के क्षमता निर्माण हेतु उपयुक्त स्तनपान व्यवहार और साथ ही 360 डिग्री आईईसी (सूचना, शिक्षा और संप्रेषण)/बीसीसी (व्यवहार परिवर्तन संप्रेषण) कार्यकलापों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
• इसके अलावा, इस एमएए कार्यक्रम के तहत ग्रामीण स्तर पर आशा कर्मियों द्वारा माताओं से संपर्क करना एक प्रमुख कार्यकलाप है जिसका लक्ष्य भारत में सामुदायिक प्रतिभागिता द्वारा महिलाओं में स्तनपान की महत्ता के संबंध में जागरूकता बढ़ाना है।
• एमएए कार्यक्रम में स्वास्थ्य केन्द्रों में स्तनपान को प्रोत्साहन देने तथा साथ ही समुदाय में महिलाओं को उपयुक्त स्तनपान व्यवहार के लिए कुशल परामर्श सहयोग देते हुए महिलाओं को जागरूक बनाने की संकल्पना की गई है।
जन्मपूर्व परिचर्या परामर्श और साथ ही ग्रामीण स्वास्थ्य और पोषण दिवस बैठकों के दौरान, गर्भवती माताओं में स्तनपान प्रोत्साहन को कोर थिमेटिक क्षेत्र माना गया है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे द्वारा लोकसभा में लिखित में उत्तर दिया गया।
(●) स्वास्थ्य परिचर्या प्रदान करने वाली प्रणाली
जन स्वास्थ्य राज्य का एक विषय होने के कारण इसके कार्यान्वयन की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्यों की है। तथापि, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रमुख कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत भारत सरकार द्वारा राज्यों को उनकी स्वास्थ्य परिचर्या प्रदानगी प्रणाली के सुदृढ़ीकरण हेतु आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। देश में स्वास्थ्य परिचर्या प्रदानगी प्रणाली के सुदृढ़ीकरण हेतु विभिन्न स्वास्थ्य परिचर्या कार्यकलापों के आरम्भ होने से लेकर अब तक एनएचएम के तहत राज्यों/संघ शासित को कुल 1,76,097.44 करोड़ रु की राशि जारी की गई।
• टिप्पणी :
1. वित्तीय वर्ष 2017-18 हेतु निर्गत धनराशि 05.12.2017 तक अद्यतन है और अनंतिम है
3. व्यय में वर्ष के आरम्भ होने पर केन्द्रीय निर्गमन राज्य निर्गमन तथा शेष बचत शामिल है। वित्तीय वर्ष 2017-18 (एफएमआर के अनुसार 30.09.2017 तक) के व्यय अनंतिम हैं।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे द्वारा लोकसभा में लिखित में उत्तर दिया गया।
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