तंबाकू उत्पादों पर 85 सचित्र चेतावनी निरस्त करना युवा पीढ़ी के लिए नुकसानदायक



नई दिल्ली, 03 जनवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

तंबाकू उत्पादों पर 85 प्रतिशत तस्वीरों वाली चेतावनी को लेकर कर्नाटक हाई कोर्ट के 15 दिसंबर 2017 को दिए गए फैसले पर वकीलों, समाजसेवियेां ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होने हाइकोर्ट के फैसले को बच्चों, युवकों के स्वास्थ्य के लिए हानि पहुँचाने वाला और सरकार के प्रयासों को नुकसान पहुँचाने वाला बताया है। कर्नाटक हाई कोर्ट के 15 दिसंबर 2017 को सिगरेट एवं तम्बाकू उत्पाद (पैकेजिंग एवं लेबलिंग) संशोधन विनिमयन, 2014 को निरस्त कर देने का फैसला दिया था। सिगरेट के पैकेटों पर 85 प्रतिशत तस्वीरों वाली चेतवानी छापने वाली अधिसूचना सरकार द्वारा 15 दिसंबर, ,2017 को जारी की गई थी। बहुत लंबे संघर्ष के बाद इनका क्रियान्वयन अप्रैल, 2016 से शुरू हो पाया था। इसके कारण तस्वीरों वाली चेतावनी छापने वाला भारत विश्व में 136वें स्थान से ऊपर उठकर अप्रत्याशित रूप से तीसरे पर पहुँच गया था। इस निर्णय के कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा भारत को पुरस्कृत भी किया गया था। इतना ही नहीं इसके लिए विश्व के कई देशों ने भारत की सराहना भी की थी।

कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले में न्यायधीश बी• वी• नागराथन ने कहा कि इस तरह की तस्वीरों वाली और लिखी हुई तम्बाकू उत्पादों के सेवन के कारण कैंसर होने की चेतावनी अनावश्यक है, क्योंकि चेतावनी के सुझाव चिकित्सा की दृष्टि से साबित किए गए नहीं हैं और सार्वभौमिक रूप इसे स्वीकार नहीं किया गया है।

इस फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट के वकील सुश्री एश्वर्या भाटी ने कहा है कि तम्बाकू सेवन के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले परिणामों पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान ने अपनी रिपोर्ट फरवरी, 2011 में सुप्रीम कोर्ट में पेश की है। इस रिपेार्ट में स्पष्ट तौर पर तम्बाकू सेवन का संबंध कैंसर से स्थापित किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने मुरली देवड़ा बनाम सरकार (वर्ष 2001) के मामले में यह स्वीकार किया है कि धूम्रपान फेफड़े के कैंसर और अन्य बीमारियों का कारण है। वर्ष 2013 के एक अन्य मामले, लाखों लोगों के स्वास्थ्य बनाम भारत सरकार एवं अन्य में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने यह माना है कि इन उत्पादों के सेवन से कैंसर रोगियों की संख्या में तेजी आएगी।

सुश्री भाटी ने कहा कि सिगरेट एंव अन्य तम्बाकू उत्पाद (निषेध) अधिनियम (कोटपा) के विवरण एंव कारणों से यह निर्विवाद रूप से साबित होता है कि तम्बाकू सेवन के कारण अकाल मृत्यु, विकलांगता और भारी आर्थिक हानि होती है। तम्बाकू सेवन से विभिन्न तरह के रोग पैदा होने पर साबित होने के कारण ही संसद ने कानून बनाया है।

इंडियन अस्थमा केयर सोसायटी के धर्मवीर कटेवा ने भारत सरकार के सिगरेट एंव अन्य तंबाकू उत्पादों के पैकेटों पर वर्ष 2016 में 85 प्रतिशत तस्वीरों वाली चेतावनी छापने को अनिवार्य करने के सरकार के निर्णय को सही ठहराया है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं के स्वास्थ्य की रक्षा करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण निर्णय था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की कॉन्फरेंस ऑफ द पार्टिज के सातवें सत्र का उद्घाटन करते हुए केन्द्रीय स्वास्थ्य परिवार एवं कल्याण मंत्री जे• पी• नड्डा ने कहा था कि हम विश्व स्वास्थ्य संगठन फ्रेमवर्क कन्वेंशन फॉर तम्बाकू कंट्रोल (एफसीटीसी) के अप्रसारी रोग कार्यक्रम एवं हस्तक्षेप को वर्ष 2015 के बाद के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के रूप में सुदृढ़ करने तथा इसके क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर ट्विटर पर ट्विट कर कहा था कि आइए ‘‘आज हम तम्बाकू सेवन के खतरों के प्रति जागरूकता फैलाने तथा देश में तम्बाकू सेवन को कम करने के लिए काम करने की शपथ लें।’’ तम्बाकू ने सिर्फ उन लोगों के जीवन को दुष्प्रभावित करता है जो इसका सेवन करते हैं बल्कि उनके जीवन पर भी असर डालता है जो इसका सेवन करने वालों के आसपास रहते हैं। तम्बाकू को ना कह कर, आइए हम स्वस्थ भारत की नींव रखें।

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