27 दिसम्बर 2017, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
(●) ट्रेनों में महिला कम्पांर्टमेंट
रेलवे अधिनियम 1989 की धारा 58 में ट्रेनों में महिला यात्रियों के लिए स्थान निर्धारित करने का प्रावधान है। इसी के अनुसार भारतीय रेल ने यात्रियों को ले जाने वाली ट्रेनों में महिला यात्रियों के लिए निम्नलिखित स्थान निर्धारित किया है।
लम्बी दूरी की मेल / एक्सप्रेस रेलगाडियों की स्लीपर श्रेणी में महिलाओं के लिए 6 बर्थों का आरक्षण कोटा।
स्लीपर क्लास में प्रति कोच 4 लोवर बर्थ तथा वातानुकूलित 3 टीयर (3 एसी) तथा वातानुकूलित 3 टीयर (2एसी) में प्रति कोच 2 लोवर बर्थ का सम्मिलित कोटा, वरिष्ठ नागरिकों / 45 वर्ष और उससे ऊपर की आयु की महिला यात्रियों तथा अकेली यात्रा कर रही गर्भवती महिला के लिए है। राजधानी एक्सप्रेस, दुरंतो तथा पूरी तरह वातानुकूलित / एक्सप्रेस ट्रेनों में इस कोटे के अंतर्गत सामान्य मेल/ एक्सप्रेस रेलगाडियों में प्रति कोच 3 लोवर बर्थ की तुलना में 3एसी में प्रति कोच 4 लोवर बर्थ का प्रावधान है।
द्वितीय श्रेणी सह, सामान्य सह, गार्ड कोच वाली लम्बी दूरी की अधिकतर रेलगाडियों में महिलाओं के लिए द्वितीय श्रेणी का स्थान।
ईएमयू (इलेक्ट्रीकल मल्टीपल यूनिट) / डीएमयू (डीजल मल्टीपल यूनिट) / एमएमटीएस (मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम) ट्रेनों तथा स्थानीय सवारी गाडि़यों में मांग तथा उपलब्धता के अनुसार महिला यात्रियों के लिए अनारक्षित कोच कम्पार्टमेंट में स्थान।
मुम्बई, कोलकाता, सिकन्दराबाद, चेन्नई उपनगरीय तथा दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सक्सनों पर लेडीज स्पेशन ईएमयू/ एमईएमयू / एमएमपी सेवाएं।
महिला यात्रियों सहित विभिन्न श्रेणियों के यात्रियों के लिए स्थान निर्धारण, मांग आधार तथा स्थान उपलब्धता के आधार पर किया जाता है। यह एक निरंतर प्रक्रिया होती है।
रेलवे की पुलिस निगरानी राज्य का विषय है। अपराध रोकना, मामलों का पंजीकरण, उनकी जांच तथा रेल परिसरों और चलती ट्रेनों में कानून और व्यवस्था बनाये रखने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है, जिसे राज्य सरकारें सरकारी रेल पुलिस (जीआरपी) / जिला पुलिस के माध्यम से करती है। लेकिन यात्रियों को बेहतर सुरक्षा प्रदान करने में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) जीआरपी के प्रयासों का पूरक है।
● महिला यात्रियों सहित सभी यात्रियों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए भारतीय रेल निम्नलिखित कदम उठा रहा है :
विभिन्न राज्यों की सरकारी रेल पुलिस द्वारा रोजाना 2200 ट्रेनों की सुरक्षा के अतिरिक्त कमजोर और चिन्ह्ति मार्गों / सेक्शनों पर 2500 रेलगाडियों (औसतन) की सुरक्षा दैनिक स्तर पर रेलवे सुरक्षाबल द्वारा की जाती है।
भारतीय रेल के लगभग 394 स्टेशनों पर लगाये गये सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी की जाती है ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
महानगरों में चलने वाली लेडीज स्पेशन ट्रेनों की सुरक्षा का कार्य आरपीएफ की महिला कर्मियों द्वारा किया जाता है। चलती ट्रेन में सुरक्षा दस्ते को रास्ते में तथा ठहरने वाले स्टेशनों पर लेडीज कोच में अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा गया है।
ट्वीटर / फेसबुक आदि विभिन्न सोसल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से भारतीय रेल महिला यात्रियों सहित सभी यात्रियों से नियमित संपर्क से रहता है ताकि यात्रियों की सुरक्ष बढ़ाई जा सके और उनकी सुरक्षा चिंताओं को दूर किया जा सके।
संकट में फंसे यात्रियों की सुरक्षा संबंधी सहायता के लिए भारतीय रेल में सुरक्षा हेल्पलाईन नम्बर 182 को कामकाजी बनाया गया है।
क्लोज सर्किट टेलिविजन नेटवर्क, एक्सेस कंट्रोल के माध्यम से कमजोर स्टेशनों की निगरानी के लिए एकीकृत सुरक्षा प्रणाली की स्वीकृति दी गई है ताकि 202 से अधिक रेलवे स्टेशनों पर निगरानी व्यवस्था सुधारी जा सके।
महिलाओं के लिए आरक्षित कम्पार्टमेंट में पुरूष यात्रियों का प्रवेश रोकने के लिए नियमित रूप से अभियान चलाया जाता है और किसी व्यक्ति को दोषी पाये जाने पर रेलवे अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत मुकदमा चलाया जाता है।
अपराध रोकने, मामलों का पंजीकरण उनकी जांच और चलती रेलगाडियों के साथ साथ रेल परिसरों में कानून और व्यवस्था के लिए रेलवे सुरक्षा बल, राज्य पुलिस / जीआरपी अधिकारियों से संवाद करता है।
यह सूचना 27/12/2017 (बुधवार) को लोकसभा में रेल राज्य मंत्री राजेन गोहेन द्वारा एक प्रश्न के दिये गये लिखित उत्तर पर आधारित है।
(●) रेल यात्रियों के लिए हेल्पलाइन
अखिल भारतीय यात्री सुरक्षा हेल्पलाइन नंबर 182 रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ) के डिवीजनल सुरक्षा नियंत्रण कक्षों से चलाई जा रही है। आरपीएफ कर्मी 24 घंटे इसकी निगरानी करते हैं। कठनाई के समय जो यात्री हेल्पलाइन पर संपर्क करता है उस स्थिति में उस अधिकार क्षेत्र का डिवीजनल सुरक्षा नियंत्रण कक्ष कार्रवाई करता है। शिकायत की प्रकृति, रेलगाड़ी/यात्री की स्थिति इत्यादि प्राप्त करके रेलगाड़ी के साथ चलने वाले स्टाफ के जरिए फौरन सहायता प्रदान की जाती है। दूसरी स्थिति में अगले स्टेशन पर जहां भी आरपीएफ या जीआरपी तैनात है, वहां उक्त सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा जिन शिकायतों के संदर्भ में पुलिस या रेलवे के अन्य विभागों की कार्रवाई आवश्यक होती है, उसके लिए हर संभव सहायता दी जाती है। आरपीएफ का स्टाफ यात्रियों से फिडबैक लेकर यात्री को दी जानी वाली सहायता का मूल्यांकन करता है। सुरक्षा हेल्पलाइन नंबर 182 की शुरूआत से नवंबर 2017 तक कुल 37882 यात्रियों को सहायता प्रदान की गई।
यह सूचना रेल राज्य मंत्री राजेन गोहेन द्वारा लोकसभा में एक प्रश्न के दिए गए लिखित उत्तर पर आधारित है।
(●) रेल यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी
भारतीय रेल और विशेष रूप से दिल्ली और मुंबई के बीच पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में वित्त वर्ष 2017-18 (अप्रैल 2017 से नवंबर 2017) के दौरान यात्रियों की संख्या में क्रमशः 0.68 प्रतिशत और 0.99 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
भारतीय रेल त्यौहारों और विशेष अवसरों के दौरान विशेष रेलगाड़ियां चलाता है ताकि यातायात को सुविधाजनक बनाया जा सके। विभिन्न सेक्टरों में विशेष रेलगाड़ियां सतत प्रक्रिया के तहत चलाई जाती हैं।
मांग के आधार पर विशेष शुल्क पर विशेष गाड़ियां चलाई जाती है। ये गाड़ियां निर्धारित समय सारणी के अतिरिक्त चलाई जाती हैं और द्वितीय श्रेणी आरक्षित डिब्बों के बुनियादी किराए पर दस प्रतिशत अधिक दर से शुल्क लिया जाता है। इसी तरह अन्य श्रेणियों के लिए बुनियादी किराए का तीस प्रतिशत की दर से किराया होता है।
उपरोक्त के अलावा मांग के आधार पर सुविधा गाड़ियां भी चलाई जाती हैं। सुविधा गाड़ियों का न्यूनतम किराया तत्काल टिकट के किराये के बराबर होता है। इसका आधार उपलब्ध बर्थ पर शुरुआती बीस प्रतिशत की दर होती है और उसके बाद बीस प्रतिशत के स्लैब के आधार पर किराये में बढ़ोतरी की जाती है। यह बढ़ोतरी तत्काल किराये से अधिकतम तीन गुना तक हो सकती है।
उपरोक्त गाड़ियों में द्वितीय श्रेणी को आरक्षित या अनारक्षित घोषित किया जा सकता है और उसी के अनुरूप शुल्क देय होता है। अनारक्षित द्वितीय श्रेणी का किराया सुपरफास्ट मेल/एक्सप्रेस गाड़ियों के सामान्य किराये के अनुरूप होता है।
मांग के आधार पर विशेष शुल्कों पर विशेष गाड़ियां और सुविधा गाड़ियां चलाई जाती हैं। इन गाड़ियों का किराया अधिक होता है क्योंकि प्रतीक्षा सूची की निगरानी, डिब्बों की व्यवस्था, आवश्यक कर्मचारियों की तैनाती और सेवा प्रदान करने की प्रक्रिया तुरंत करनी होती है। इसके अलावा यात्री गाड़ियों की परिचालन लागत हर वर्ष बढ़ती जा रही है और यात्री किराये के लिए सब्सिडी दी जाती है।
यह सूचना रेल राज्य मंत्री राजेन गोहेन द्वारा लोकसभा में एक प्रश्न के दिए गए लिखित उत्तर पर आधारित है।
(●) असंगठित क्षेत्र में कामगारों की पहचान
असंगठित कामगार सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008 में असंगठित कामगार की परिभाषा दी गयी है तथा ऐसे कामगार को इस बात की पुष्टि करने की कि वह एक असंगठित कामगार है, स्वघोषणा करने की व्यवस्था की गयी है।
भारत में असंगठित कामगारों का कोई केन्द्रीयकृत राष्ट्रीय डाटाबेस नहीं है। असंगठित कामगारों के लिए एक राष्ट्रीय मंच बनाने का विनिश्चय किया गया है। केन्द्रीय सरकार ने 402.7 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से कामगारों को बिना कोई स्मार्ट कार्ड जारी किये एक अद्वितीय आई-डी अर्थात असंगठित कामगार पहचान संख्या (यूडब्ल्यूआईएन) तथा आधार वरियता प्राप्त पहचान संख्या आवंटित करने का एक प्रस्ताव पास किया है जो अगले दो वर्ष 2017-2018 तथा 2018-2019 के दौरान कार्यान्वित किया जाएगा।
यह सूचना श्रम तथा रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संतोष कुमार गंगवार ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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