(●) मंत्रिमंडल ने 2000 रूपये मूल्य तक के डेबिट कार्ड/भीम यूपीआई/एईपीएस के लेन-देन पर लागू एमडीआर शुल्क की भरपाई करने की मंजूरी दी
15 दिसम्बर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 2000 रूपये मूल्य तक के सभी डेबिट कार्ड/भीम यूपीआई/आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (एईपीएस) लेन-देन पर लागू मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) दो वर्ष की अवधि के लिए सरकार द्वारा वहन करने की मंजूरी दे दी है। यह 01 जनवरी, 2018 से प्रभावी होगा और इसकी बैंकों को अदायगी की जाएगी।
वित्तीय सेवाओं के विभाग के सचिव, इलेक्ट्रोनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में सचिव और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के सीईओ को मिलाकर बनाई गई एक समिति ऐसे लेन-देन के औद्योगिक खर्च ढांचे को देखेगी, जिससे अदायगी के स्तरों का पता लगाने का आधार तैयार किया जाएगा।
इस मंजूरी के परिणामस्वरूप 2000 रूपये से कम मूल्य के किसी भी लेन-देन के लिए उपभोक्ता और व्यापारी को एमडीआर के रूप में इस तरह के अतिरिक्त बोझ से परेशान नहीं होना पड़ेगा। इससे इस प्रकार के लेन-देन के लिए डिजिटल भुगतान मोड को लोग अधिक अपनाएंगे। चूंकि इस तरह के लेन-देन का प्रतिशत काफी अधिक है, इससे कम नकदी की अर्थव्यवस्था की दिशा में बढ़ने में मदद मिलेगी।
अनुमान लगाया गया है कि 2000 रूपये से कम मूल्य वाले लेन-देन के संबंध में बैंकों को वित्त वर्ष 2018-19 में 630 करोड़ रूपये और वित्त वर्ष 2019-20 में 883 करोड़ रूपये की एमडीआर अदायगी की जाएगी।
बिक्री के व्यापारी पीओएस पर जब भुगतान किया जाता है, एमडीआर की अदायगी व्यापारी द्वारा बैंक को की जाती है, इसे देखते हुए अनेक लोग डेबिट कार्ड रखने के बजाय नकद भुगतान करते है। इसी प्रकार से भीम यूपीआई प्लेटफॉर्म और एईपीएस के जरिये व्यापारियों को किये गये भुगतान पर एमडीआर चार्ज किया जाता है।
(●) मंत्रिमंडल ने पूर्वोत्तर क्षेत्र (सिक्किम सहित) स्थित औद्योगिक इकाइयों को पूंजी निवेश सब्सिडी देने की मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने पूर्वोत्तर औद्योगिक निवेश और संवर्द्धन नीति (एनईआईआईपीपी), 2007 की केन्द्रीय पूंजी निवेश सब्सिडी योजना (सीसीआईएसएस), 2007 के अंतर्गत सिक्किम सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र स्थित चार औद्योगिक इकाइयों को 264.67 करोड़ रूपये की पूंजी निवेश सब्सिडी देने की मंजूरी दी है।
सीसीईए ने 500 करोड़ रूपये तक पूंजी निवेश सब्सिडी दावों की मंजूरी के लिए वित्तीय शक्तियों को भी संशोधित किया है, जिन्हें वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा मंजूरी दी जाएगी। इससे दावों का तेजी से निपटारा हो सकेगा।
औद्योगिक इकाइयों को सब्सिडी प्रदान करने के लिए न केवल परिचालन इकाइयों को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि वर्तमान निवेशकों के साथ-साथ पूर्वोत्तर राज्यों में संभावित निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।
सरकार पूर्वोत्तर क्षेत्र में औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए इस योजना को लागू कर रही है।
(●) मंत्रिमंडल ने कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन लिमिटेड की दूसरी वित्तीय पुनर्संरचना को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन लिमिटेड (केआरसीएल) की दूसरी वित्तीय पुनर्संरचना को मंजूरी दी है। केआरसीएल रेल मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम है।
रेल मंत्रालय के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति द्वारा धारित 4,079.51 करोड़ रूपये की राशि के गैर संचयी छुड़ा सकने योग्य वरीयता शेयरों (आरपीएस) को अनिवार्यता परिवर्तनीय गैर संचयी वरीयता शेयरों (सीसीपीएस) में परिवर्तित करने की मंजूरी दी। इससे नये लेखांकन मानक आईएनडी-एएस के लागू होने के बाद कंपनी का शुद्ध मूल्य बढ़ जाएगा।
• कार्यान्वयन नीति और लक्ष्य:
केआरसीएल को आईएनडी-एएस के अनुसार पिछले वर्ष के तुलन पत्र के आंकड़ों अर्थात् 31 मार्च, 2016 और 01 अप्रैल, 2015 को व्यवसाय आरंभ करने के आंकड़ों को पेश करना होगा। 31 मार्च, 2015 से गैर संचयी छुडा सकने योग्य वरीयता शेयरों (आरपीएस) को अनिवार्यता परिवर्तनीय गैर संचयी वरीयता शेयरों (सीसीपीएस) में परिवर्तित करने से केआरसीएल का शुद्ध मूल्य धनात्मक हो जाएगा।
• प्रमुख प्रभाव:
केआरसीएल का शुद्ध मूल्य धनात्मक बना रहेगा।
केआरसीएल का धनात्मक शुद्ध मूल्य का रहना बाजार से निधि जुटाने के लिए अर्थक्षम ब्याज दर पर ऋण लेने, रेटिंग एजेंसी के बेहतर क्रेडिट रेटिंग प्राप्त करने, नए ठेकों के लिए बोली लगाने के लिए पात्र होने और कोंकण रेलवे मार्ग पर विभिन्न स्वीकृत परियोजनाओं को शुरू करने के लिए अनिवार्य है।
केआरसीएल को डीपीई के दिशा-निर्देशों के अनुमार बीमारू कंपनी की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा।
• पृष्ठभूमि:
कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार वित्त वर्ष 2016-17 से जिन कंपनियों का 31 मार्च, 2014 को शुद्ध मूल्य 500 करोड़ रूपये अथवा अधिक है, उन्हें लेखों को तैयार करने तथा संकलित करने में आईएनडी-एएस (आईएफआरएस के आधार पर लागू किए गए लेखांकन मानक) को लागू करना होगा। आईएनडी-एएस के अनुसार, गैर संचयी छुड़ा सकने योग्य वरीयता शेयरों को ‘’संयोजित वित्तीय घटकों’’ के रूप में माना जाएगा और इन्हें दो घटकों – अन्य इक्विटी और वित्तीय देयता के रूप में दर्शाया जाएगा। अन्य इक्विटी, वरीयता शेयरों की छुड़ा सकने योग्य राशि में देयता घटक को घटाकर प्राप्त होने वाले राशि का द्योतक है।
अत: केआरसीएल द्वारा भारत के राष्ट्रपति के लिए (रेल मंत्रालय के माध्यम से) जारी गैर संचयी छुड़ा सकने योग्य वरीयता शेयरों के एक भाग को केआरसीएल के तुलन-पत्र में ‘इक्विटी पूंजी’ के स्थान पर ‘बाहरी देयता’ के रूप में दर्शाया जाएगा और केआरसीएल का शुद्ध मूल्य ऋणात्मक हो जाएगा।
केआरसीएल का शुद्ध मूल्य ऋणात्मक होने के परिणाम इस प्रकार होंगे:-
• केआरसीएल की क्रेडिट रेटिंग खराब होगी
• केआरसीएल द्वारा बाजार से धन जुटाने में कठिनाई होगी
• केआरसीएल द्वारा नये ठेकों के लिए बोली लगाने में कठिनाई होगी और
• केआरसीएल को डीपीई के दिशा-निर्देशों के अनुसार ‘बीमारू कंपनी’ के रूप में श्रेणीबद्ध किया जाएगा।
उपरोक्त को देखते हुए केआरसीएल ने अनुरोध किया है कि वह भारत के राष्ट्रपति के नाम (रेल मंत्रालय के माध्यम से) पर धारित मौजूदा तरजीही शेयरों को 31 मार्च, 2015 से अनिवार्यत: परिवर्तनीय गैर संचयी वरीयता शेयरों में परिवर्तित किया जाए, क्योंकि आईएनडी-एएस के अंतर्गत शेयर पूंजी को सीसीपीएस के रूप में समझा जा सकता है।
(●) मंत्रिमंडल ने भारत और कोलम्बिया के बीच कृषि और मत्स्य पालन के क्षेत्र में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर की मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि और मत्स्य पालन के क्षेत्र में भारत और कोलम्बिया के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर की मंजूरी दी है।
समझौता ज्ञापन कृषि और मत्स्य पालन के निम्नलिखित क्षेत्रों में सहयोग प्रदान करेगा :-
• आधुनिक कृषि पद्धतियां/दृष्टिकोण
• कृषि संबंधी नये यांत्रिकीकरण
● कृषि विपणन के सफल मॉडल
• बीज उत्पादन के लिए कृषि कंपनियों के सहयोग से परियोजनाएं बनाना
• बागवानी (सब्जियां, फल और फूल में आधुनिक उत्पादन मॉडल और मूल्य सृजन प्रक्रियाएं
• एसपीएस विशेषज्ञों की सूचना/आपसी दौरे का आदान-प्रदान
● जटरोफा और कराया
● तिलहन और ऑयल पाम के अनुसंधान में सहयोग
• उद्योग से संबंधित समुद्री मछली पकड़ना, जल कृषि और मत्स्य पालन के क्षेत्र में अनुसंधान और प्रशिक्षण
• जुगाली करने वाले छोटे और बड़े पशु (मवेशी, भेड़, बकरी) और सुअरों की उत्पादकता, रोग और निदान तथा
•सुअर के मांस का प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन
समझौता ज्ञापन के अंतर्गत विचाराधीन अवधि के दौरान अगले दो वर्षों के लिए कार्य योजना बनाने/उसे अंतिम रूप देने के लिए एक संयुक्त कार्य दल गठित किया जाएगा। समझौता ज्ञापन शुरू में पांच वर्ष की अवधि के लिए मान्य होगा और जब तक किसी एक पक्ष द्वारा इसे समाप्त किए जाने की इच्छा/इरादा व्यक्त न किया जाए तब तक अगले पांच वर्षों की अवधि के लिए यह स्वत: विस्तारित हो जाएगा।
(●) मंत्रिमंडल ने केंद्र द्वारा प्रायोजित योजना राष्ट्रीय आयुष मिशन को 01 अप्रैल, 2017 से 31 मार्च, 2020 तक जारी रखने को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में केंद्र द्वारा प्रायोजित योजना राष्ट्रीय आयुष मिशन को 01 अप्रैल, 2017 से 31 मार्च, 2020 तक जारी रखने को मंजूरी दी गई। इस पर तीन वर्ष के अवधि के दौरान 2400 करोड़ रुपये का लागत-खर्च आएगा। मिशन की शुरूआत सितंबर, 2014 में की गई थी।
● विशेषताएं :
राष्ट्रीय आयुष मिशन का क्रियान्वयन आयुष मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सस्ती आयुष सेवाएं उपलब्ध कराना है, जो सबकी पहुंच में हों। इसकी अन्य विशेषताएं इस प्रकार हैं –
• आयुष अस्पतालों और डिस्पेंसरियों का उन्नयन।
• प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों में आयुष सुविधाएं।
• आयुष शिक्षण संस्थानों, राज्य सरकार, आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी एवं होम्योपैथी फार्मेंसियों के उन्नयन के जरिये राज्य स्तरीय संस्थागत क्षमता को मजबूत करना।
• आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी एवं होम्योपैथी प्रवर्तन प्रणाली और औषधि जांच प्रयोगशालाएं।
• बेहतर कृषि तौर-तरीकों को अपनाकर जड़ी-बूटियों की खेती को समर्थन, ताकि इनके भंडारण और वितरण संरचना के विकास तथा कच्चे माल की लगातार आपूर्ति की जा सके।
राष्ट्रीय आयुष मिशन देश में और खासतौर से कमजोर एवं दूरदराज के इलाकों में आयुष स्वास्थ्य सेवाएं/ शिक्षा उपलब्ध कराकर राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश सरकारों के प्रयासों को समर्थन दे रहा है, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं के अंतराल को दूर किया जा सके। मिशन के तहत इन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसके अलावा वार्षिक योजनाओं के लिए अधिक संसाधनों को पूरा करने के लिए प्रावधान भी किए जाते हैं।
● मिशन के संभावित परिणाम इस प्रकार हैं –
• आयुष सेवाएं प्रदान करने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की संख्या बढ़ाने और दवाओं तथा प्रशिक्षित श्रम शक्ति की बेहतर उपलब्धता के जरिये आयुष स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच।
• हर तरह की सुविधाओं से लैस आयुष शिक्षा संस्थानों की संख्या बढ़ाकर आयुष शिक्षा में सुधार।
• सख्त प्रवर्तन प्रणाली से लैस बेहतर फार्मेसियों और औषधि जांच प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ाकर बेहतर आयुष दवाओं की उपलब्धता में सुधार।
• प्रतिरोधक स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों के रूप में योग और प्राकृतिक चिकित्सा को अपनाने के लिए जागरूकता पैदा करना।
• जड़ी-बूटियों के कच्चे माल की बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करना और निर्यात बढ़ाना।
● पृष्ठभूमिका :
राष्ट्रीय आयुष मिशन का उद्देश्य आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी एवं होम्योपैथी जैसी प्राचीन भारतीय चिकित्सा विरासत को मजबूत बनाना है। ये स्वास्थ्य सुविधा के क्षेत्र में अपार ज्ञान का भंडार हैं। भारतीय औषधि प्रणालियों की यह विशेषता है कि वे सबकी पहुंच में हैं, उनमें विविधता मौजूद है, ये दवाएं सस्ती हैं तथा आम जनता के बड़े वर्ग में इनकी स्वीकृति है। तुलनात्मक रूप से ये दवाएं कम खर्चीली हैं और देशवासियों के एक बड़े वर्ग की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम हैं।
(●) मंत्रिमंडल ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तहत मेट्रो रेलवे सुरक्षा आयोग के कार्य निष्पादन के लिए मेट्रो रेलवे सुरक्षा आयुक्त के एक मंडल कार्यालय के सृजन को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तहत रेल सुरक्षा के आयोग में मेट्रो रेलवे सुरक्षा आयोग, जैसी कि ‘मेट्रो रेल (परिचालन एवं रखरखाव) अधिनियम, 2002’ में परिकल्पना की गई है, के कार्यों के निष्पादन के लिए सभी सहायक अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ मेट्रो रेल सुरक्षा के आयुक्त के एक मंडल कार्यालय के सृजन को मंजूरी दी है।
मंत्रिमंडल ने दो वर्तमान रेल सुरक्षा आयुक्तों (सीआरएस) को दो मंडलों का अतिरिक्त प्रभार सौंपने की भी अनुमति दी जो उनके वर्तमान अधिकार क्षेत्र के भीतर अपने अधिकारों का प्रयोग करेंगे। ये मंडल सीएमआरएस, नई दिल्ली के अधिकार क्षेत्र के अधीन नहीं होंगे।
मेट्रो रेलवे सुरक्षा के आयुक्त का पद नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तहत रेल सुरक्षा आयोग में एचएजी (वेतन स्तर 15) में होगा। एक मंडल कार्यालय के लिए वेतन पर अनुमानित व्यय लगभग 59,39,040 रूपये वार्षिक होगा। संगठन की आरम्भिक स्थापना के अतिरिक्त मंडल कार्यालय के लिए संभावित व्यय 7,50,000 रूपये वार्षिक होगा।
इन पदों के सृजन से वर्तमान एवं विभिन्न आगामी रेल परियोजनाओं के संबंध में यात्री सुरक्षा एवं मेट्रो रेल परिचालन संबंधित मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित किया जाना सुनिश्चित होगा, जैसा कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तहत रेल सुरक्षा के आयोग में ‘मेट्रो रेल (परिचालन एवं रखरखाव) अधिनियम, 2002’ में प्रावधान है।
● कार्यान्वयन कार्य नीति एवं लक्ष्य:-
मेट्रो रेलवे सुरक्षा के आयुक्त के पद को संघ लोक सेवा आयोग के परामर्श से नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा रेल मंत्रालय के इच्छुक अधिकारियों के नामांकन के माध्यम से भारतीय रेलवे इंजीनियरिंग सेवाओं (आईआरएसई, आईआरएसईई, आईआरएसएसई, आरएसएमई) के संवर्ग एवं आईआरटीएस से भरा जाएगा। यह आरम्भिक रूप से रेल सुरक्षा आयोग में रेल सुरक्षा आयुक्त के लिए भर्ती नियमों के अनुसार होगा। पदों को भरने की प्रक्रिया की शुरूआत दो महीने के अंदर कर दी जाएगी।
मेट्रो रेलवे सुरक्षा के उपायुक्त (डिप्टी सीएमआरएस) एवं सहायक कर्मचारियों के पदों के सृजन का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के समक्ष रखा जाएगा। अनुमोदन प्राप्त हो जाने पर, पद के सृजन के लिए आदेश तत्काल जारी कर दिये जाएंगे।
● पृष्ठभूमि:-
नागरिक उड्डयन मंत्रालय (भारत सरकार) के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत कार्यरत रेल सुरक्षा आयोग रेल यात्रा की सुरक्षा एवं रेल परिचालन से संबंधित कार्यों का निष्पादन करता है तथा रेल अधिनियम 1989 के तहत उस पर कुछ विशेष वैधानिक कार्यों के निष्पादन की भी जिम्मेदारी है। ये कार्य प्रकृति में निरीक्षण संबंधी, जांच संबंधी और परामर्शदात्री हैं। आयोग रेल अधिनियम के तहत निर्मित कुछ विशेष नियमों तथा समय-समय पर जारी कार्यकारी निर्देशों के अनुरूप कार्य करता है। आयोग का सबसे महत्वपूर्ण दायित्व यह सुनिश्चित करना है कि यात्री यातायात के लिए खोली गई प्रत्येक ऩई रेल लाइन रेल मंत्रालय द्वारा अनुशंसित मानकों एवं निर्देशों के अनुरूप हों तथा नई रेल लाइन हर लिहाज से यात्री यातायात के परिचालन के लिए सुरक्षित हो। यह आमान परिवर्तन, लाइनों को डबल करने तथा मौजूदा लाइनों के विद्युतीकरण जैसे अन्य कार्यों पर भी लागू होता है। आयोग बड़ी रेल दुर्घटनाओं की वैधानिक जांच भी करता है तथा भारत में रेल सुरक्षा को बेहतर बनाने की अनुशंसा करता है।
यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने तथा सुरक्षा प्रमाणीकरण में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए “मेट्रो रेलवे (परिचालन एवं रखरखाव) अधिनियम, 2002” को लागू करते हुए आवास एवं शहरी मामले मंत्रालय ने मेट्रो रेलवे के संबंध में मेट्रो रेलवे सुरक्षा के आयुक्त को ऐसे ही दायित्व प्रदान किये हैं। सीएमआरएस नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तहत रेलवे सुरक्षा के मुख्य आयुक्त के प्रशासनिक नियंत्रण में रहेगा।
(●) मंत्रिमंडल ने हैदराबाद में परिचालनगत सामुद्रिक विज्ञान के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित करने पर यूनेस्को के साथ समझौते को मंज़ूरी दी
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने यूनेस्को के श्रेणी-2 केन्द्र (सी2सी) के रूप में हैदराबाद में परिचालनगत सामुद्रिक विज्ञान के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित करने को मंज़ूरी दे दी है।
इस समझौते का उद्देश्य हिंद महासागर के किनारों (आईओआर), भारतीय और अटलांटिक महासागर से जुड़े अफ्रीकी देशों, यूनेस्को के ढांचे के अंतर्गत लघु द्वीपीय देशों के लिए क्षमता निर्माण की दिशा में प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना करना है। परिचालनगत सामुद्रिक विज्ञान मछुआरों, आपदा प्रबंधन, जहाजरानी, बंदरगाह, तटीय राज्यों, नौसेना, तट रक्षक, पर्यावरण, दैनिक परिचालन को सुचारू रूप से चलाने के लिए अपतटीय उद्योगों जैसे विभिन्न क्षेत्रों को सूचनाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रणालीगत सामुद्रिक विज्ञान अध्य्यन आयोजित करने के लिए एक कारगर गतिविधि है।
केन्द्र सरकार क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण, ज्ञान साझा करने और सूचनाओं के आदान प्रदान जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सहायता मुहैया कराएगा। भारत यूनेस्को की कार्य योजना के प्रभाव और दृश्यता को बढ़ाकर यूनेस्को और इसके अंतर सरकारी सामुद्रिक विज्ञान आयोग (आईओसी) के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत का प्रतिनिधित्व कर सकता है।
यूनेस्को श्रेणी-2 केन्द्र की स्थापना हिंद महासागर में भारत को एक अग्रणी देश के रूप में उभरने का अवसर प्रदान करेगी। यह भारत को हिन्द महासागर की सीमाओं से जुड़े दक्षिण एशियाई और अफ्रीकी देशों सहित हिन्द महासागर के अंतर्गत आने वाले देशों के साथ सहयोग बढ़ाने और रिश्तों को सुधारने में भी मदद करेगा। केंद्र समुद्री और तटीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों का समाधान निकालने की दिशा में दुनियाभर में तकनीकी और प्रबंधन क्षमता को बनाने की आवश्यकता को पूरा करेगा और समुद्र से जुड़े प्राकृतिक खतरों से कुशलतापूर्वक निपटने के लिए पर्याप्त माहौल तैयार करेगा। यह केन्द्र समुद्र वैज्ञानिक अनुसंधान क्षमता निर्माण से जुड़े सतत विकास लक्ष्य-14 (एसडीजी-14) को प्राप्त करने में अहम योगदान दे सकता है, जो लघु द्वीपीय विकासशील राष्ट्रों और सबसे कम विकसित देशों को मदद करने के भारत के वादे को भी पूरा करेगा।
सी2सी छात्रों और अन्य प्रतिभागियों के कौशल में विकास करने के प्रति कृतसंकल्प है, जिससे देश के भीतर और बाहर रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे। सी2सी की स्थापना से भारत में रोज़गार निर्माण के लिए सहायक विकास की दिशा में वृद्धि की भी उम्मीद है। वर्तमान में यह केन्द्र हैदराबाद में भारतीय समुद्री सूचना सेवा केन्द्र (आईएनसीओआईएस) पर उपलब्ध स्टेट ऑफ द आर्ट सुविधा के साथ परिचालनगत है। अब तक इस केन्द्र से परिचालनगत सामुद्रिक विज्ञान की विभिन्न विधाओं में 681 वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है, इनमें 576 वैज्ञानिक भारतीय और 105 वैज्ञानिक दुनियाभर के अन्य देशों से हैं। इस केन्द्र में ईमारत और प्रशिक्षण छात्रावास जैसी अन्य आधारभूत सुविधाओं को स्थापित किया जा रहा है। इस पूरी योजना एवं समझौते के अंतर्गत दुनियाभर से वैश्विक स्तर की प्रतिभाओं और प्रशिक्षुओं को आमंत्रित करने और दीर्घ अवधि के पाठ्यक्रम (3-9 महीने) का खाका तैयार करने का प्रावधान भी किया गया है।
(●) मंत्रिमंडल ने पूर्वोत्तर के लिए एनएलसीपीआर योजना को मार्च, 2020 तक जारी रखने की मंजूरी दी
● नई योजना, एनईएसआईडीएस मार्च, 2020 तक शुरू करने की मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 90:10 की निधियन पद्धति वाली मौजूदा नॉन लेप्सेबल सेन्ट्रल पूल ऑफ रिर्सोसेज (एनएलसीपीआर) योजना को 5300.00 करोड़ रूपये के खर्च के साथ मार्च, 2020 तक जारी रखने की मंजूरी दी है। इससे वर्तमान परियोजनाओं को पूरा किया जा सकेगा।
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने केन्द्रीय क्षेत्र की नई योजना ‘‘पूर्वोत्तर विशेष बुनियादी ढांचा विकास योजना’’ (एनईएसआईडीएस) को केन्द सरकार की शत-प्रतिशत सहायता के साथ 2017-18 से शुरू करने की भी मंजूरी दे दी, ताकि मार्च, 2020 तक विनिर्दिष्ट क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के सृजन से संबंधित अंतरों को पाटा जा सके।
● एनईएसआईडीएस की विशेषताएं:
नई योजना व्यापक तौर पर निम्नलिखित क्षेत्रों के अंतर्गत बुनियादी ढांचे के सृजन को शामिल करेगी।
जलापूर्ति, विद्युत, सम्पर्क और विशेषकर पर्यटन को बढ़ावा देने वाली परियोजनाओं से संबंधित भौतिक बुनियादी ढांचा;
शिक्षा और स्वास्थ्य के सामाजिक क्षेत्रों का बुनियादी ढांचा
● एनईएसआईडीएस के लाभ:
एनईएसआईडीएस की नई योजना के अंतर्गत सृजित की जाने वाली परिसम्पत्तियों से न केवल क्षेत्र में स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा सुविधाएं मजबूत होगी, बल्कि इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। यह योजना आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र के समग्र विकास में उत्प्रेरक की भूमिका निभाएगी।
(●) कैबिनेट ने चमड़ा एवं फुटवियर क्षेत्र में रोजगार सृजन के लिए विशेष पैकेज को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने चमड़ा एवं फुटवियर क्षेत्र में रोजगार सृजन के लिए विशेष पैकेज को मंजूरी दे दी है। इस पैकेज में 2017-18 से लेकर 2019-20 तक के तीन वित्त वर्षों के दौरान 2600 करोड़ रुपये के स्वीकृत व्यय के साथ ‘भारतीय फुटवियर, चमड़ा एवं सहायक सामान विकास कार्यक्रम’ का कार्यान्वयन शामिल है।
● प्रमुख प्रभाव
केन्द्रीय क्षेत्र की इस योजना से चमड़ा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा, चमड़ा क्षेत्र से जुड़ी विशिष्ट पर्यावरणीय चिंताएं दूर होंगी, अतिरिक्त निवेश में सहूलियत होगी, रोजगार सृजन होगा और उत्पादन में वृद्धि होगी। ज्यादा कर प्रोत्साहन मिलने से इस क्षेत्र में व्यापक निवेश को आकर्षित किया जा सकेगा और इस क्षेत्र के सीजनल स्वरूप को ध्यान में रखते हुए श्रम कानून में सुधार से उत्पादन स्तर में वृद्धि संभव हो पाएगी।
विशेष पैकेज में तीन वर्षों के दौरान 3.24 लाख नये रोजगारों को सृजित करने की क्षमता है और इससे फुटवियर, चमड़ा एवं सहायक सामान क्षेत्र पर संचयी असर के रूप में दो लाख रोजगारों को औपचारिक स्वरूप प्रदान करने में मदद मिलेगी।
● भारतीय फुटवियर, चमड़ा एवं सहायक सामान विकास कार्यक्रम का विवरण
मानव संसाधन विकास (एचआरडी) उप-योजना : एचआरडी उप-योजना में 15,000 रुपये प्रति व्यक्ति की दर से बेरोजगार व्यक्तियों को प्लेसमेंट से संबद्ध कौशल विकास प्रशिक्षण, 5000 रुपये प्रति कर्मचारी की दर से कार्यरत कामगारों को कौशल उन्नयन प्रशिक्षण और प्रति व्यक्ति 2 लाख रुपये की दर से प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए सहायता देने का प्रस्ताव है। कौशल विकास प्रशिक्षण घटक से संबंधित सहायता प्राप्त करने के लिए 75 प्रतिशत प्रशिक्षित व्यक्तियों का प्लेसमेंट अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। इस उप-योजना के तहत 696 करोड़ रुपये के प्रस्तावित परिव्यय के साथ तीन वर्षों के दौरान 4.32 लाख बेरोजगार व्यक्तियों को प्रशिक्षित करने/कौशल प्रदान करने, 75000 मौजूदा कर्मचारियों का कौशल उन्नयन करने और 150 मुख्य प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित करने का प्रस्ताव है।
चमड़ा क्षेत्र के एकीकृत विकास (आईडीएलएस) की उप-योजना : आईडीएलएस उप-योजना के तहत मौजूदा इकाइयों के आधुनिकीकरण/तकनीकी उन्नयन के साथ-साथ नई इकाइयों की स्थापना के लिए सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को नये संयंत्र एवं मशीनरी की लागत के 30 प्रतिशत की दर से और अन्य इकाइयों को संयत्र एवं मशीनरी की लागत के 20 प्रतिशत की दर से बैकएंड निवेश अनुदान/सब्सिडी प्रदान करके रोजगार सृजन सहित विनिर्माण एवं निवेश को प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव है। इस उप-योजना के तहत 425 करोड़ रुपये के प्रस्तावित परिव्यय के साथ 3 वर्षों के दौरान चमड़ा, फुटवियर एवं सहायक सामान और कलपुर्जा क्षेत्र की 1000 इकाइयों को प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव है।
संस्थागत सुविधाओं की स्थापना की उप-योजना : इस उप-योजना के तहत तीन वर्षों के दौरान 147 करोड़ रुपये के प्रस्तावित परिव्यय के साथ फुटवियर डिजाइन एवं विकास संस्थान (एफडीडीआई) के कुछ मौजूदा परिसरों का उन्नयन करके उन्हें ‘उत्कृष्टता केंद्रों’ में तब्दील करने और प्रस्तावित मेगा चमड़ा क्लस्टरों, जो परियोजना संबंधी प्रस्तावों पर आधारित होंगे, के आसपास पूर्ण सुविधाओं से युक्त तीन नये कौशल केंद्रों की स्थापना के लिए एफडीडीआई को सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव है।
मेगा चमड़ा, फुटवियर एवं सहायक सामान क्लस्टर (एमएलएफएसी) उप-योजना : एमएलएफएसी उप-योजना का उद्देश्य मेगा चमड़ा, फुटवियर एवं सहायक सामान क्लस्टर की स्थापना करके चमड़ा, फुटवियर एवं सहायक सामान क्षेत्र को बुनियादी ढांचागत सहायता प्रदान करना है। उपयुक्त परियोजना लागत के 50 प्रतिशत तक श्रेणीबद्ध सहायता देने का प्रस्ताव है, जिसमें भूमि की लागत शामिल नहीं होगी और इसके तहत अधिकतम सरकारी सहायता 125 करोड़ रुपये तक सीमित होगी। तीन वर्षों के दौरान 3-4 नये एमएलएफएसी को आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए 360 करोड़ रुपये का परिव्यय प्रस्तावित किया गया है।
चमड़ा प्रौद्योगिकी, नवाचार एवं पर्यावरणीय मुद्दों से जुड़ी उप-योजना : इस उप-योजना के तहत परियोजना लागत के 70 प्रतिशत की दर से साझा अपशिष्ट शोधन संयंत्रों (सीईटीपी) के उन्नयन/स्थापना के लिए सहायता देने का प्रस्ताव है। इस उप-योजना के तहत राष्ट्रीय स्तर की क्षेत्रवार उद्योग परिषद/संघ को सहायता देने के साथ-साथ चमड़ा, फुटवियर एवं सहायक सामान क्षेत्र के लिए विजन दस्तावेज तैयार करने हेतु भी मदद दी जाएगी। इस उप-योजना हेतु तीन वर्षों के लिए प्रस्तावित परिव्यय 782 करोड़ रुपये है।
चमड़ा, फुटवियर एवं सहायक सामान क्षेत्र में भारतीय ब्रांडों को प्रोत्साहन देने की उप-योजना : इस उप-योजना के तहत ब्रांड के संवर्धन के लिए स्वीकृत पात्र इकाइयों को सहायता देने का प्रस्ताव है। इसके तहत तीन वर्षों के दौरान प्रत्येक साल सरकारी सहायता कुल परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तय करना प्रस्तावित है, जो प्रत्येक ब्रांड के लिए अधिकतम 3 करोड़ रुपये होगी। इस उप-योजना के तहत 90 करोड़ रुपये के प्रस्तावित परिव्यय के साथ 3 वर्षों के दौरान अंतर्राष्ट्रीय बाजार में 10 भारतीय ब्रांडों का संवर्धन करने का प्रस्ताव है।
चमड़ा, फुटवियर एवं सहायक सामान क्षेत्र के लिए अतिरिक्त रोजगार प्रोत्साहन की उप-योजना: इस उप-योजना के तहत ईपीएफओ में नामांकन कराने वाले चमड़ा, फुटवियर एवं सहायक सामान क्षेत्र के सभी नये कर्मचारियों के लिए उनके नियोजन के प्रथम तीन वर्षों के दौरान कर्मचारी भविष्य निधि में 3.67 प्रतिशत का नियोक्ता योगदान करने का प्रस्ताव है। यह उप-योजना 15000 रुपये तक का वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए मान्य होगी। 100 करोड़ रुपये के प्रस्तावित परिव्यय से संबंधित क्षेत्रों में लगभग 2,00,000 रोजगारों को औपचारिक करने में मदद मिलेगी।
● विशेष पैकेज में श्रम कानूनों के सरलीकरण के लिए उपाय और रोजगार सृजन के लिए प्रोत्साहन भी शामिल हैं, जिनका उल्लेख नीचे किया गया है –
आयकर अधिनियम की धारा 80जेजेएए का दायरा बढ़ाना : किसी कारखाने में वस्तुओं के उत्पादन में संलग्न भारतीय कंपनी द्वारा नये कर्मचारी को तीन वर्षों तक अदा किये गये अतिरिक्त पारिश्रमिक पर उसे टैक्स कटौती का लाभ देने हेतु आयकर अधिनियम की धारा 80जेजेएए के तहत किसी कर्मचारी के लिए एक वर्ष में न्यूनतम 240 दिनों के रोजगार के प्रावधानों में और ज्यादा ढील देकर फुटवियर, चमड़ा एवं सहायक सामान क्षेत्र के लिए इसे न्यूनतम 150 दिन कर दिया जाएगा। यह कदम इस क्षेत्र के सीजनल स्वरूप को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है।
निश्चित अवधि के रोजगार की शुरुआत : विश्व भर से व्यापक निवेश आकर्षित करने के लिए औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 की धारा 15 की उप धारा (1) के तहत निश्चित अवधि वाले रोजगार की शुरुआत करके श्रम संबंधी मुद्दों के नियामकीय ढांचे को दुरुस्त करने का प्रस्ताव है। चमड़ा, फुटवियर एवं सहायक सामान उद्योग के मौसमी (सीजनल) स्वरूप को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है।
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