
हावड़ा - पश्चिम बंगाल, इंडिया इनसाइड न्यूज।
हावड़ा के सलकिया स्थित 68 नंदीबागान बाई लेन में आयोजित ऐतिहासिक दासबाड़ी कोजागरी लक्ष्मी पूजा ने वर्ष 2026 में अपना 72वाँ वर्ष पूरा किया। यह सात दशकों से अधिक समय से चली आ रही एक गौरवशाली पारिवारिक परंपरा का प्रतीक है। हावड़ा की सबसे पुरानी कोजागरी लक्ष्मी पूजाओं में से एक मानी जाने वाली इस पूजा की विशेषता पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन और अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने के प्रति परिवार की प्रतिबद्धता है।
इस पूजा की शुरुआत फणीभूषण दास ने की थी। उनके निधन के बाद पूजा के आयोजन की जिम्मेदारी उनके भाई सुबल चंद्र दास ने संभाली। वर्तमान में यह परंपरा स्वर्गीय सुबल चंद्र दास के पुत्र, अधिवक्ता बप्पादित्य दास, उनकी माता मीना दास और बहन तनुश्री दास के सहयोग से आगे बढ़ रही है।
इस पूजा का भट्टाचार्य पुरोहित परिवार के साथ भी लंबे समय से संबंध रहा है। निबारन भट्टाचार्य इस परिवार के मूल पुरोहित थे। उनके बाद उनके पुत्र विजय भट्टाचार्य इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं और वर्तमान में पूजा के धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराते हैं।
72वीं वार्षिक कोजागरी लक्ष्मी पूजा का आयोजन रविवार 25 अक्टूबर, 2026 को किया गया। इसी दिन श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण भी किया गया। इसके बाद अगले कुछ दिनों तक उत्सव जारी रहा और बुधवार 28 अक्टूबर, 2026 को मां लक्ष्मी की प्रतिमा के विसर्जन के साथ इसका समापन हुआ। इस अवसर पर स्थानीय निवासियों, पड़ोसियों, प्रतिष्ठित समाजसेवियों और विशिष्ट पत्रकारों की उपस्थिति ने इस आयोजन को स्थानीय समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण सामुदायिक उत्सव बना दिया।
पश्चिम बंगाल सरकार में नगर मामलों एवं संसदीय कार्य विभाग के राज्य मंत्री उमेश राय ने मंगलवार 27 अक्टूबर, 2026 को पूजा में भाग लिया। वे प्रत्येक वर्ष इस पूजा में शामिल होते हैं। उनकी नियमित उपस्थिति दासबाड़ी की कोजागरी लक्ष्मी पूजा के साथ उनके लंबे जुड़ाव तथा सलकिया, हावड़ा की इस धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा के प्रति उनके संबंध को दर्शाती है।
दासबाड़ी परिवार द्वारा इस पूजा का निरंतर आयोजन उनकी अटूट आस्था, पारिवारिक विरासत और पारंपरिक बंगाली धार्मिक रीति-रिवाजों को आने वाली पीढ़ियों तक जीवित रखने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
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