
--विजया पाठक, एडिटर - जगत विजन, रायपुर - छत्तीसगढ़, इंडिया इनसाइड न्यूज।
■स्व-सहायता समूह की महिलाओं को बाहर कर निजी कंपनी को 42 करोड़ के टेंडर जारी करने की योजना
■क्या मुख्यमंत्री साय मंत्री गजेन्द्र यादव और सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह पर करेंगे कार्यवाही?
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय लगातार राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। लेकिन उन्हीं के सरकार के कुछ मंत्री और अफसर साय सरकार की छवि को धूमिल करने में जुटे हुए हैं। दरअसल पिछले दिनों राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से जारी हुए एक टेंडर ने राज्य सरकार की कार्यशैली और उसकी मंशा पर सवालियां निशान लगा दिया है। आमजनता में चर्चा इस बात को लेकर होने लगी है कि एक तरफ जहां सरकार बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ पर लगातार जोर दे रही है। वहीं, शासन का ध्यान बेटियों के स्वास्थ्य पर बिल्कुल नहीं है। सरकार बेटियों के स्वास्थ्य के मामले पर पूरी तरह से आंख में पट्टी और कान में ढिप्पी लगाकर बैठ गई है। शासकीय स्कूलों में छात्राओं को वितरित किये जाने वाले सैनेटरी नेपकिन की वितरण व्यवस्था पर स्कूल शिक्षा विभाग में बड़ी लापरवाही सामने आई है। विभाग के आला अधिकारियों ने विभाग के मुखिया के कहने पर न सिर्फ सैनेटरी नेपकिन वितरण व निर्माण संबंधी कार्य पर अंकुश लगा दिया है बल्कि अपनी चहेती और पसंदीदा कंपनी को टेंडर जारी करने के लिए सभी सेवा शर्ते उसके अनुरूप तैयार कर दी है, जिससे टेंडर उसी कंपनी को मिल सके जिसे मंत्री देना चाहते हैं।
●42 करोड़ के टेंडर पर लगी मंत्री जी की निगाहें
विभागीय सूत्रों के अनुसार स्कूल शिक्षा विभाग के सर्व शिक्षा अभियान के तहत लगभग 42 करोड़ रुपये के टेंडर की प्रक्रिया का आदेश मुख्यमंत्री डॉ. विष्णुदेव साय ने पिछले दिनों एक बैठक में दिया था। विभाग के बाबू से लेकर अधिकारी तक सभी इस बड़े और मोटी राशि के टेंडर की प्रक्रिया में अपने-अपने हितों को साधने के हिसाब से जुट गये और आला अधिकारियों ने इस टेंडर प्रक्रिया के प्रस्ताव को पूरा तैयार कर लिया। जब विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस प्रस्ताव को लेकर सचिव स्कूल शिक्षा विभाग डॉ. कमलप्रीत सिंह के पास लेकर पहुंचे तो पूरी बाजी ही पलट गई। दरअसल कमलप्रीत सिंह ने स्कूल शिक्षा विभाग के मंत्री गजेन्द्र यादव के इशारे पर टेंडर की प्रक्रिया में शामिल की गई सभी शर्तों को बदल दिया और मंत्री गजेन्द्र यादव के अनुसार उसमें से स्व-सहायता समूह की महिलाओं को बाहर निकालने संबंधी शर्त डाल दी। आलम यह हुआ कि मंत्री और सचिव महोदय ने मिलकर वार्षिक आय 210 करोड़ रुपये कर दी जिससे स्व-सहायता समूह की महिलाएं इसमें दूर-दूर तक शामिल न हो सकें।
●छात्राओं के स्वास्थ्य से लापरवाही का जिम्मेदार कौन?
अब जब स्कूल शिक्षा विभाग के मंत्री गजेन्द्र यादव की भ्रष्टाचारी सोच और सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह की मंशा सामने आ गई तो उन्होंने जानबूझकर इस टेंडर को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। मंत्री और सचिव की इस सांठगांठ ने एक बार फिर लाखों छात्राओं के स्वास्थ्य को खतरे में डाल दिया है। सूत्रों के अनुसार निविदा टेण्डर शर्तों में सुरक्षा निधि से जुड़े शर्त में 180 दिन) की डिमाण्ड ड्रफ्ट की मांग की गई थी जबकि भारत में समस्त राष्ट्रीयकृत बैंक 90 दिनों की अवधि के लिए चेक और डिमाण्ड ड्राफ्ट जारी करते हैं। यह भी बताया जाता है कि विपरीत 90 के बजाय 180 दिनों की मियाद अवधि की शर्त से कई कंपनियाँ टेण्डर निविदा से बाहर हो गई है। ऐसी स्थिति में वही कंपनियां सरकारी टेण्डर पाने में कामयाब होते नजर आ रही है जिनके लिए विशेष तौर पर टेण्डर की सेवा शर्ते निर्धारित की गई थी। आखिर छात्राओं के साथ बरती जा रही इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन है।
●अधिकतर राज्यों में समूह की महिलाएं कर रही हैं निर्माण
मंत्री गजेन्द्र यादव और सचिव की जुगलबंदी ने जिस चालाकी से राज्य की स्व-सहायता समूह की महिलाओं को इस टेंडर की प्रक्रिया से बाहर निकाला है वह सोचने वाली बात है। क्योंकि मध्यप्रदेश सहित गुजरात, महाराष्ट्र के अलावा कई ऐसे अन्य राज्य भी है जहां छात्राओं के लिए वितरित की जा रही सैनेटरी नेपकिन का निर्माण और वितरण व्यवस्था का कार्य स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा स्व-सहायता समूह की महिलाओं को दिया जाता है। लेकिन छत्तीसगढ़ में यह पहली बार हुआ है कि स्व-सहायता समूह की महिलाओं को बाहर का रास्ता दिखाकर एक निजी कंपनी को बड़ा टेंडर जारी करने की तैयार की जा रही है। जबकि मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तक खुद भी स्व-सहायता समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से सबल बनाने के लिए निरंतर कोशिश कर रहे हैं लेकिन साय मंत्रीमंडल के भ्रष्टाचारी मंत्री गजेन्द्र यादव साय सरकार की इमेज की मिट्टी पलीत करने में लगे हुए हैं।
●450 करोड़ का पुराना माल खपाने की तैयारी
सूत्रों के अनुसार मंत्री गजेन्द्र यादव जिस कंपनी को टेंडर जारी करना चाहते हैं उसकी पहली शर्त यह है कि वह पहले पुराने और एक्सपायर सैनेटरी नेपकिन की डिलीवरी करेगी। जिसकी कीमत लगभग 450 करोड़ रुपये बताई जा रही है। ऐसे में भ्रष्टाचारी गजेन्द्र यादव छात्राओं के स्वास्थ्य से लापरवाही करते हुए लगभग 100 करोड़ रुपये चट कर जाने की योजना पर काम कर रहे हैं। आखिर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपनी नाक के नीचे चल रहे भ्रष्टाचार के इस मायाजाल को तोड़ने में क्यों कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। अगर उन्हें सही मायने में राज्य के भीतर सुशासन व्यवस्था लाना है और राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना है तो आवश्यक है कि गजेन्द्र यादव और डॉ. कमलप्रीत सिंह जैसे भ्रष्टाचारी लोगों पर लगाम लगाएं। क्योंकि इससे न सिर्फ छात्राओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होगा बल्कि राज्य और मुख्यमंत्री साय की छवि पर भी प्रश्नचिन्ह लगेंगे।
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