
--राजीव रंजन नाग, नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज।
2 जनवरी को, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर नगर निगम में अतिरिक्त आयुक्त (जल आपूर्ति) के पद पर तैनात रोहित सिसोनिया और अन्य अधिकारियों को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से 30 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। पिछले साल 29 दिसंबर को भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त फैलने की घटना सामने आई, जिसके कारण कई लोगों की मौत हो गई और 400 से अधिक मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा।
रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में 18 अगस्त को एक जांच रिपोर्ट सौंपी गई। यह रिपोर्ट उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की एकल-सदस्यीय न्यायिक समिति द्वारा तैयार की गई थी। रिपोर्ट में 2017 बैच के आईएएस अधिकारी सिसोनिया और तत्कालीन कार्यकारी अभियंता (जल आपूर्ति) संजीव श्रीवास्तव को "मुख्य रूप से जिम्मेदार" ठहराया गया है। उन पर निरीक्षण में कई कमियां रखने, मरम्मत कार्य ठीक से न करने और पानी की पाइपलाइन बदलने की परियोजनाओं में देरी करने का आरोप है, जिसके कारण यह त्रासदी हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, बैक्टीरिया फैलने का मुख्य कारण पीने के पानी में सीवेज का पानी मिलना था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि दो पाइपलाइनें एक-दूसरे के समानांतर बिछी हुई थीं और समय के साथ वे क्षतिग्रस्त हो गई थीं। रिपोर्ट में बताया गया है कि खराब पानी की पाइपलाइन को बदलने की टेंडर प्रक्रिया में 72 दिनों की देरी हुई। यह देरी 15 अक्टूबर से 26 दिसंबर के बीच हुई - यानी इस त्रासदी के होने से कुछ ही दिन पहले। हालांकि, अस्पताल के रिकॉर्ड के आधार पर, रिपोर्ट में इस त्रासदी से केवल 22 मौतों का संबंध बताया गया है।
निलंबन के नौ महीने बाद, 13 अक्टूबर को सिसोनिया का तबादला कर दिया गया। उन्हें 'किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग' में उप सचिव के पद से हटाकर रायसेन का कलेक्टर (डीसी) नियुक्त किया गया। सिसोनिया ने गुरुवार (15 अक्टूबर) को डीसी के रूप में अपना कार्यभार संभाल लिया। कांग्रेस पार्टी ने सिसोनिया को रायसेन का डीसी नियुक्त करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार की कड़ी आलोचना की है। कांग्रेस की राज्य इकाई के प्रमुख जीतू पटवारी ने 'एक्स' पर लिखा, "भारत के पहले 'वॉटर प्लस सिटी' इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी की त्रासदी में 36 लोगों की मौत हो गई थी! इस आपराधिक घटना के बाद, प्रशासनिक अधिकारी रोहित सिसोनिया को पद से हटा दिया गया था, लेकिन अब मोहन यादव सरकार ने उन्हें रायसेन का कलेक्टर बना दिया है।"
उन्होंने आगे कहा, "भागीरथपुरा के पीड़ित परिवार आज भी न्याय और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। भाजपा सरकार को सबसे पहले यह बताना चाहिए कि जांच आयोग की रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई की गई है, और संबंधित अधिकारी को कलेक्टर नियुक्त करने से पहले किन तथ्यों पर विचार किया गया था?"
राज्य में नियुक्तियों की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए पटवारी ने आगे कहा, "क्या 'ट्रांसफर इंडस्ट्री' अब एक 'ट्रांसफर फैक्ट्री' में बदल गई है? महत्वपूर्ण पदों पर जवाबदेही के बजाय भाई-भतीजावाद को प्राथमिकता दी जा रही है! मुख्यमंत्री जी, भागीरथपुरा के पीड़ितों को न्याय दिलाएं! जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करें! जिम्मेदारी तय करें!
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