--राजीव रंजन नाग
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज।
●सुरक्षा कवच तोड़ कर हजारों युवाओं ने ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा
दिल्ली पुलिस ने शनिवार को चार पूर्व मुख्यमंत्रियों - पिनाराई विजयन, ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और माणिक सरकार - के साथ-साथ हज़ारों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इनमें युवा और कई राजनीतिक दलों के प्रमुख नेता भी शामिल थे। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके और नेता आशुतोष रांका और सौरव दास को दिल्ली में उतरते ही प्लेन से हिरासत में ले लिया गया। इनमें यूट्यूबर ध्रुव राठी भी शामिल थे, जिन्हें पड़ोसी गुरुग्राम से हिरासत में लिया गया था। कांग्रेस ने 12 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया।
दिपके तब तक पुलिस हिरासत में रहे जब तक उनकी दादी का महाराष्ट्र में उनके होमटाउन में निधन की खबर न आ गई। पुलिस ने कहा कि उन्हें बताया गया था कि वह अंतिम संस्कार के लिए जा सकते हैं, लेकिन शाम तक यह साफ़ नहीं था कि उन्हें रिहा किया जाएगा या नहीं।
हालांकि, अधिकारियों द्वारा लगाई गई सख़्त पाबंदियों के बावजूद, राष्ट्रीय राजधानी में कई जगहों जैसे आईटीओ, सफ़दरजंग फ़्लाईओवर और दिल्ली हाट, दक्षिण दिल्ली, इंडिया गेट,संसद मार्ग, जनपथ आदि पर भीड़ जमा होती रही।
पुलिस की अनुमति न देने से लेकर मेट्रो स्टेशन बंद करने, युवाओं और छात्र नेताओं को हिरासत में लेने, रेलवे सेवाएँ रोकने और सुरक्षा के भारी इंतज़ाम, इंटरनेट बंद करने औरह पुरमुख कार्यकर्ओं को घरो से हिरासत में लेने की पुलिसिया कार्रवाई करने तक दिल्ली पुलिस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञान कुमार के ख़िलाफ़ नियोजित विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। युवा प्रदर्शनकारियों ने मज़बूत इरादे के साथ जवाब दिया और पुलिस की सख़्त कार्रवाई के बावजूद हजारों कार्यकर्ताओं ने विरोध जारी रखा है।
इस दौरान 7,000 से ज़्यादा प्रर्दशनकारियों को हिरासत में लिया। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाकर्मी प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए उनकी ओर दौड़ते देखे गए। हालाँकि, अधिकारियों द्वारा लगाई गई अभूतपूर्व पाबंदियों के बावजूद, राष्ट्रीय राजधानी में कई जगहों पर खास कर लुटियंस क्षेत्र में प्रर्दशकारियों के सैलाब ने गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस द्वारा रचा गया सुरक्षा का तानाबाना रखे रह गए। गृह मंत्री अमित शाह और होम सेक्रेटरी गोविंद मोहन खुद हालात पर नजर रख रहे थे। दिल्ली पुलिस और सेंट्रल पैरामिलिट्री फोर्स के कम से कम 25,000 जवान तैनात किए गए थे। अनुमति न देने से लेकर मेट्रो स्टेशन बंद करने, युवा और छात्र नेताओं को हिरासत में लेने, रेलवे सेवाएँ रोकने और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती तक, दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी थी। युवा प्रदर्शनकारियों ने मज़बूत इरादे के साथ जवाब दिया। और पुलिस की सख़्त कार्रवाई के बावजूद विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के लिए जंतर-मंतर पर इकट्ठा होने की कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की अपील का पर हजारों लोगों, खासकर युवा विरोध प्रर्दशन में शामिल हुए। हिरासत में लिए गए लोगों में चार पूर्व मुख्यमंत्री शामिल थे जिनमें आप के अरविंद केजरीवाल, तृणमूल कांग्रेस की संस्थापक ममता बनर्जी, और लेफ्ट के पिनाराई विजयन और माणिक सरकार शामिल हैं।
भारी पुलिस और पैरामिलिट्री तैनाती, बैरिकेड्स और आने-जाने पर पाबंदियों के बीच, विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश करने पर लोगों को राष्ट्रीय राजधानी में कई जगहों पर हिरासत में लिया गया। नेहा बोरा पुलिस के निशाने पर थीं, जिन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया। नेहा बोरा की लीडरशिप में स्टूडेंट ऑर्गनाइज़ेशन एआईएसए ने जंतर-मंतर से करीब 10 किलोमीटर दिल्ली हाट के पास धरना देने की कोशिश की, लेकिन वहां जमा हुए लोगों को पुलिस ने बल पुर्वक वैन में धकेल दिया।
शनिवार को चेन्नई में एक स्टूडेंट आउटरीच इवेंट में शामिल होने गए विपक्ष के नेता (लोकसभा) राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि "सभी नेताओं को अरेस्ट करो। सभी युवाओं को अरेस्ट करो। हम सबको अरेस्ट करो। हम तुम्हें घेर रहे हैं, और हम पीछे नहीं हटेंगे। मेरे शब्द याद रखना: हमारे पास पहले से ही वह जानकारी है जिसकी हमें ज़रूरत है... भारत के युवाओं, मुझे तुम पर गर्व है। प्रोटेस्ट करते रहो। हम तुम्हारे साथ खड़े हैं।" सीजेपी की प्रर्दशन को आज कांग्रेस का समथर्न मिला। इससे पहले कांग्रेस पार्टी ऐसा करने से परहेज कर रही थी।
'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में, उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी "डेमोक्रेसी को खत्म कर रहे हैं"। उन्होंने कहा, "उनका 15 साल का पॉलिटिकल ड्रामा खत्म हो रहा है... देश के खिलाफ किए गए अपराधों के लिए उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा।"
गांधी ने इस हफ्ते चार दिन दिल्ली में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। शुक्रवार को, इण्डिया ब्लॉक ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक मेमोरेंडम सौंपा। शनिवार को, हिरासत में लिए गए लोगों में कम्युनिस्ट पार्टियों के नेता एमए बेबी, बृंदा करात और दीपांकर भट्टाचार्य के अलावा एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण, आप के संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज और गोपाल राय, और टीएमसी (ममता) नेता डेरेक ओ'ब्रायन, डोला सेन और साकेत गोखले शामिल थे। कार्रवाई की तैयारी में, सरकार, पुलिस और दूसरी एजेंसियों ने दिल्ली मेट्रो को कुछ हद तक बंद कर दिया था। 45 मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद रहे और 250 से ज़्यादा ट्रेनें कैंसिल कर दीं, इसके अलावा जंतर मंतर के आसपास चार किलो मीटर के दायरे में इंटरनेट भी सस्पेंड कर दिया, जो दिल्ली के बीचों-बीच 18वीं सदी की एक ऑब्जर्वेटरी है और कम से कम तीन दशकों से विरोध प्रदर्शन की जगह के तौर पर काम कर रही है। भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने आज के प्रर्दशन को अराजक बताया और कहा कि 'अराजकता हार गई।'
https://www.indiainside.org/post.php?id=10658