--राजीव रंजन नाग
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “यह अनपढ़ सरकार, जो अंबानी और अडानी की गुलाम है, तभी सत्ता में रह सकती है जब वे लोकतंत्र को खत्म कर दें और वे यही करने की कोशिश कर रहे हैं।” विरोध प्रदर्शन के दौरान सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया। वीडियो में "आप" की सीनियर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी को पुलिस द्वारा घसीटते हुए ले जाते देखा गया। मुम्बई, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दूसरे राज्यों में ऐसे ही विरोध प्रर्दशन देखा गया।
इन विरोध प्रदर्शनों के केंद्र में चुनाव आयोग और 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) से जुड़े मुद्दे हैं, जिसके तहत देश भर में करोड़ों 'इनएक्टिव' (निष्क्रिय) वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं। पिछले महीने 'इंडियन एक्सप्रेस' ने खुलासा किया था कि दो अन्य चुनाव आयुक्तों को दरकिनार कर ज्ञानेश कुमार एक-तरफा फैसले ले रहे हैं। इस रिपोर्ट ने विपक्ष के 'वोट चोरी' के आरोपों को फिर से हवा दे दी।
दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार (2 अक्टूबर) जंतर-मंतर पर सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। ये प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को स्पेशल इंटेंसिव रिविजन एक्सरसाइज में उनके एकतरफा फैसलों के कारण हटाने की मांग को लेकर तय विरोध प्रदर्शन के दौरान थे। जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में आप, कांग्रेस और वामपंथी दलों के सदस्य शामिल थे। पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी और सार्वजनिक सुरक्षा का हवाला देते हुए नई दिल्ली ज़िले में कई तरह की पाबंदियां लगाई थीं।
जंतर-मंतर पर मुख्य विरोध स्थल की ओर जाने वाले लगभग सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई थी, साथ ही पुलिस की भारी तैनाती, दंगा कंट्रोल फोर्स और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के लिए दिल्ली पुलिस की बसों को स्टैंडबाय पर रखा गया था। जनपथ और टॉलस्टॉय रोड पर मल्टी-बैरल टियर गैस लॉन्चर से लैस दंगा कंट्रोल गाड़ियां खड़ी कर दी गई थीं। जैसे-जैसे दिन चढ़ा, दिल्ली पुलिस के प्रोटेस्ट करने वालों के साथ बदसलूकी के वीडियो भी सामने आए। जनपथ और टॉलस्टॉय रोड के चौराहे पर पुलिस की मौजूदगी।
"ज्ञानेश कुमार चले जाएं वरना उन्हें बाहर निकाल दिया जाएगा।" सैकड़ों स्टूडेंट, वकील और प्रोफेसर जंतर-मंतर के पास जमा हुए, जबकि भीड़ में 'वोट चोर, गद्दी छोड़', 'नरेंद्र मोदी मुर्दाबाद', 'ज्ञानेश कुमार हाय हाय' के नारे गूंज रहे थे। दिल्ली विश्वविद्यालय के एक छात्र अर्नव गांधी ने बताया। ज्ञानेश कुमार से, मैं कहना चाहूंगा, ‘अपने आप चले जाओ वरना जनता तुम्हें भी धर्मेंद्र प्रधान की तरह बाहर निकाल देगी। उन्होंने कहा - मीडिया खुद को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहते हैं लेकिन वे वास्तव में तानाशाही का पहला स्तंभ हैं। हम बस थक गए हैं और निराश हैं और मैं चाहता हूं कि सरकार यह समझे कि छात्रों के पास सिस्टम के खिलाफ बार-बार विरोध करने से बेहतर काम हैं।'
जैसे ही अधिक प्रदर्शनकारी टॉल्स्टॉय और जनपथ रोड के चौराहे पर इकट्ठा हुए, पुलिस ने उन्हें बसों में जबरदस्ती डालना शुरू कर दिया। जमीन पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने इस सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया कि बंदियों को कहां ले जाया जा रहा है या कितनों को हिरासत में लिया गया है।
महिला प्रदर्शनकारियों के साथ भी दिल्ली पुलिस ने बुरा बर्ताव किया। पुलिस कर्मियों की एक बड़ी टुकड़ी बैरिकेड वाले इलाके से प्रदर्शनकारियों की ओर बढ़ी और उन्हें टॉलस्टॉय रोड पर और पीछे धकेल दिया। प्रदर्शनकारियों ने ‘जब जब मोदी डरता है पुलिस को आगे करता है’, ‘एक समोसा, दो चाय, ज्ञानेश कुमार है’ और ‘पुलिस के दम पर यह सरकार, नहीं चलेगी अब की बार’ जैसे नारे लगाए।
प्रदर्शनकारियों में सिस्टम से निराशा और मोदी सरकार के प्रति गुस्सा साफ़ दिख रहा था। हालांकि, ह्यूमर और सटायर, जो कुछ महीने पहले नेशनल कैपिटल में हुए जेन-जी विरोध प्रदर्शनों की एक खास बात थी, आज के विरोध प्रदर्शन में भी कम नहीं थे। मार्केटिंग स्ट्रेटजिस्ट और क्रिएटर, उत्कर्ष, जो सिर्फ़ अपने पहले नाम से जाने जाते हैं, ने प्रोटेस्ट साइट पर डांस करना शुरू कर दिया। “देश में बहुत सी चीज़ें गलत हो रही हैं, और इन चीज़ों को ठीक करने का एकमात्र तरीका वोट देना है। अगर हमसे वह अधिकार भी छीन लिया गया, तो हम क्या करेंगे? तब यह डेमोक्रेसी नहीं रहेगी।” उन्होंने प्रोटेस्ट के लिए डांस क्यों चुना, इस पर उत्कर्ष ने कहा, “हमने पुलिस से कहा ‘तुम वैसे भी किसी और के कहने पर नाच रहे हो, तो हमारे साथ भी नाचो’”।
एक रिटायर्ड प्रोफेसर, अवधेश कुमार ने मोदी सरकार की तानाशाही ज्यादतियों पर अपनी निराशा ज़ाहिर की और कहा, “क्या डेमोक्रेसी में राजा चुनता है कि किसे वोट देना है? यह राजशाही है या डेमोक्रेसी?”
उधर, मुंबई में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) ने भी प्रदर्शन किया। शिवाजी पार्क पहुंचे हज़ारों प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए वहां भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। महात्मा गांधी की जयंती के मौके पर आयोजित रैली में सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि राष्ट्रपिता को इससे बड़ी श्रद्धांजलि और क्या हो सकती है। उन्होंने कहा, "यहां मौजूद हर व्यक्ति गांधी है। गांधी कभी नहीं मरते।" सूत्रों के मुताबिक, विरोध प्रदर्शन के दौरान 700 से ज़्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। उन्हें नई दिल्ली इलाके से बाहर अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में ले जाया गया और ज़रूरी कागज़ी कार्रवाई व कानूनी औपचारिकताओं के बाद उन्हें रिहा कर दिया जाएगा।
मुंबई में, पुलिस से रैली की इजाज़त न मिलने के बावजूद हज़ारों लोग जीजेपी के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। पास के दादर रेलवे स्टेशन से आने वाले रास्तों पर बैरिकेड लगा दिए गए थे, लेकिन प्रदर्शनकारी शिवाजी पार्क पहुँचने में कामयाब रहे, जो बड़ी राजनीतिक रैलियों के लिए जाना जाता है। उनके हाथों में तिरंगा और कुमार के इस्तीफ़े की माँग करने वाले प्लेकार्ड थे। महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गांधी के अलावा नसीरुद्दीन शाह, शबाना आज़मी और विशाल ददलानी जैसी हस्तियाँ भी वहाँ मौजूद थीं।
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