--अभिजीत पाण्डेय
पटना - बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज।
■15 सितंबर से 31 अक्टूबर तक मिशन मोड में चलेगा विशेष अभियान
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के विशेष अभियान में जमाबंदी सुधार के लिए यदि स्थल पर मापी की जरूरत पड़ती है, तो रैयत को इसके लिए न तो अलग से आवेदन करना होगा और न ही कोई मापी शुल्क देना होगा। विभाग विशेष सर्वेक्षण अमीनों की सहायता से आवश्यकतानुसार स्थल पर निःशुल्क मापी कराएगा। इसका उद्देश्य जमाबंदी को मूल अभिलेख और वास्तविक स्थल स्थिति के अनुरूप शुद्ध एवं अद्यतन करना है।
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि जमीन से जुड़े रिकॉर्ड में सुधार के लिए आम रैयत को किसी अतिरिक्त प्रक्रिया या शुल्क के बोझ में नहीं डाला जाएगा। विभाग का लक्ष्य केवल जमाबंदी में सुधार करना नहीं, बल्कि उसे शुद्ध, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है। उन्होंने अधिकारियों को अभियान को पूरी गंभीरता के साथ मिशन मोड में संचालित करने का निर्देश दिया।
15 सितंबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले जमाबंदी अद्यतीकरण एवं नामांतरण उत्तराधिकार विशेष अभियान के दौरान प्रत्येक अंचल में डिजिटाइज्ड जमाबंदी का रजिस्टर-2 की स्कैन प्रति से मिलान किया जाएगा। रैयत के नाम, पिता के नाम, खाता-खेसरा, रकबा, लगान सहित अन्य विवरण में अंतर मिलने पर नियमानुसार सुधार किया जाएगा। शून्य रकबा, शून्य लगान और मिसिंग सूचनाओं को भी दुरुस्त किया जाएगा।
अभियान के दौरान अभिलेखों के सत्यापन में जहां स्थल की स्थिति स्पष्ट करने के लिए मापी आवश्यक होगी, वहां विशेष सर्वेक्षण अमीनों की सहायता ली जाएगी। संबंधित रैयत को मापी के लिए अलग से आवेदन देने की आवश्यकता नहीं होगी। विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई कर निःशुल्क मापी कराई जाएगी।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकारी या सार्वजनिक भूमि, जल-निकाय, सीलिंग जमाबंदी, न्यायालय में लंबित विवाद अथवा मूल अभिलेख और स्थल की स्थिति में गंभीर विरोधाभास वाले मामलों में समुचित जांच के बिना नामांतरण नहीं किया जाएगा।
अभियान में मृत जमाबंदीदारों की पहचान राजस्व कर्मचारी अपने हलका क्षेत्र में करेंगे। वैध उत्तराधिकारियों से आवश्यक दस्तावेज प्राप्त कर अंचल अधिकारी को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बाद उत्तराधिकार नामांतरण की कार्रवाई शुरू होगी। निर्विवाद मामलों में 14 दिनों की नोटिस अवधि पूरी होने के बाद आदेश पारित कर करेक्शन स्लिप जारी की जाएगी तथा जमाबंदी और लगान मांग को अद्यतन किया जाएगा।
अंचल अधिकारी प्रतिदिन की प्रगति भूमि सुधार उप-समाहर्ता एवं अपर समाहर्ता को देंगे। अपर समाहर्ता जिले के नोडल पदाधिकारी होंगे और समाहर्ता नियमित समीक्षा करेंगे। विभाग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अभियान की लगातार निगरानी करेगा।
गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भूमि सुधार उप-समाहर्ता प्रत्येक अंचल के पांच प्रतिशत, अपर समाहर्ता दो प्रतिशत और समाहर्ता एक प्रतिशत मामलों का रैंडम वेरिफिकेशन करेंगे। विभाग ने 31 अक्टूबर तक अभियान का निर्धारित लक्ष्य पूरा करने और लापरवाही की स्थिति में जवाबदेही तय करने का निर्देश दिया है।
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