सहकारिता, तकनीक और वित्तीय सेवाओं के समन्वय से सशक्त होगा किसान : डॉ. प्रेम कुमार



--अभिजीत पाण्डेय
पटना - बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज।

सहकारिता, तकनीक, बीमा एवं वित्तीय सेवाओं को एक साथ जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य केवल सहकारी संस्थाओं की आय बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों को सुरक्षा, वित्तीय मजबूती और अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराना होना चाहिए। बिहार विधान सभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार गुरुवार को रोनेट द्वारा आयोजित कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित कर रहे थे।

डॉ. कुमार ने कहा कि भारत में सहकारिता की शक्ति का उदाहरण अमूल और इफको ने प्रस्तुत किया है। जब किसान सहकारी संस्थाओं के माध्यम से संगठित होते हैं, तो उनकी सामूहिक शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि यदि दूध और उर्वरक के क्षेत्र में सफल सहकारी मॉडल विकसित हो सकता है, तो सब्जी उत्पादक किसानों के लिए भी व्यापक वित्तीय एवं व्यावसायिक इकोसिस्टम तैयार किया जा सकता है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री एवं महान जननेता स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री जी ने “जय जवान, जय किसान” का मंत्र दिया था। आज आवश्यकता है कि इस भावना को आगे बढ़ाते हुए हम “सशक्त किसान, सुरक्षित किसान और समृद्ध किसान” के संकल्प के साथ आगे बढ़ें। किसान मजबूत होगा तो सहकारिता मजबूत होगी, सहकारिता मजबूत होगी तो गांव मजबूत होगा और गांव मजबूत होगा तो भारत मजबूत होगा।

उन्होंने कहा कि सहकारी बिक्री और सेवा भागीदार मॉडल सहकारी समितियों के लिए नई आय और सेवा के अवसर पैदा कर सकता है। यह मॉडल सहकारी समितियों के मौजूदा कार्यालय, सदस्य नेटवर्क और किसानों के विश्वास को तकनीक, प्रशिक्षण, बीमा एवं वित्तीय सेवाओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

डॉ. कुमार ने कहा कि सहकारी समितियां केवल सब्जियों की खरीद-बिक्री तक सीमित न रहें, बल्कि किसानों के लिए “कम्प्लीट सर्विस प्वाइंट” के रूप में विकसित हों। किसान को स्वास्थ्य सुरक्षा, वाहन बीमा, परिवार की वित्तीय सुरक्षा तथा आवश्यकता के समय उपयुक्त वित्तीय सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध हो, यही इस पहल की वास्तविक सफलता होगी।

उन्होंने कहा कि सब्जी उत्पादक किसानों के सामने बाजार, मूल्य, भंडारण, परिवहन और वित्तीय जोखिम जैसी अनेक चुनौतियां हैं। सहकारी संस्थाओं के किसान नेटवर्क को तकनीक, बीमा और वित्तीय सेवाओं से जोड़कर इन चुनौतियों का समाधान करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाया जा सकता है।

डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों और गांवों को मजबूत बनाने के लिए सहकारिता को विकास का प्रभावी माध्यम बना रही है। इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए आत्मनिर्भर एवं समृद्ध गांवों का निर्माण करना हमारा लक्ष्य होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसान की मेहनत को केवल बाजार तक नहीं, बल्कि सुरक्षा, वित्तीय शक्ति और समृद्धि तक पहुंचाना होगा। सहकारिता के विश्वास को तकनीक और वित्तीय सेवाओं की शक्ति से जोड़कर किसानों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाया जा सकता है।

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