--विजया पाठक
एडिटर - जगत विजन
रायपुर - छत्तीसगढ़, इंडिया इनसाइड न्यूज।
■40 वर्षों से करोड़ों का लोहा चोरी कर रहे इंद्रजीत और उनका परिवार!
■क्या महादेव सट्टे के तार भी इंद्रजीत उर्फ छोटू से जुड़े हैं
■आखिर 1500 ट्रकों का मालिक कैसे बना इंद्रजीत?
■रसूख के दम पर इंद्रजीत में HC में लगाया था मानहानि का केस, HC ने नकारा
■जीएसटी चोरी, मनी लांड्रिंग और इनकम टैक्स चोरी का भी बनता बड़ा मामला?
छत्तीसगढ़ के भिलाई स्टील प्लांट में पिछले 40 वर्षों से लगभग 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक के लोहे की चोरी होने का दावा किया गया है। इस मामले ने तब बड़ा रूप ले लिया जब दुर्ग पुलिस ने भिलाई में बड़े पैमाने पर हो रहे एक संगठित लोहा चोरी रैकेट का पर्दाफाश किया। लोहा चोरी का काम पहले इंद्रजीत उर्फ छोटू के पिता दलवीर सिंह उर्फ़ वीरा सिंह करते थे। पिता के मरने के बाद बेटा इन्द्रजीत सिंह इस काम को अंजाम दे रहा है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार वीरा सिंह पहले सूअरों को भी काट-काट कर बेचते थे। इंद्रजीत सिंह के दादा स्वर्ण सिंह भिलाई स्टील प्लांट में कर्मचारी थे। दलवीर सिंह भिलाई सेक्टर 6 के मार्केट में 1985-86 में गन्ना का रस बेचते थे फिर उन्होंने एक ट्रक ख़रीदा। उसे भिलाई स्टील प्लांट में चलाने लगे। फिर कबाड़ के धंधे में उतर गये। भिलाई स्टील प्लांट में सीआईएसएफ और पुलिस की मदद से लोहा चोरी का साम्राज्य खड़ा कर लिया। देखते-देखते बहुत बड़ी हैवी ट्रांसपोर्ट कम्पनी HTC बना ली और हेवी ट्रांसपोर्टर बन गये। जितने भी दो नम्बर के काम करते हैं उसके लिए ड्राइवरों के नाम पर ही ट्रक खरीद लेते थे या ड्राईवर और सुपरवाईजरों को ट्रक भाड़े के एग्रीमेंट करके दे देते थे, जिससे जब चोरी का लोहा पकड़ा जाय तो ड्राईवर और सुपरवाईजर पकड़ा जाय। प्लांट से जितना भी लोहा चोरी करके लाया जाता है उसके बाद लोहा छोटू के यार्ड में उतारा जाता है। उसका 15% मार्केट मूल्य के हिसाब से लोहा चोर ड्राइवर या सुपरवाईजर को छोटू का आदमी भुगतान कर देता है। बाकी माल छोटू मार्केट में फर्जी बिलों के जरिये बेच देते हैं। लोहा चोरी करने के लिए सीआईएसएफ के अधिकारियों और सिपाहियों और मार्केटिंग टीम से मिलीभगत कर ली जाती है।
●रसूख के दम पर इंद्रजीत ने हाईकोर्ट में लगाया मानहानि का केस, न्यायलय ने नकारा
इंदरजीत सिंह ने अपने रसूख के दम पर मानहानि का मामला खड़ा करने की कोशिश की, लेकिन हाईकोर्ट में मामला टिक नहीं सका। सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच में कमियां पाईं और अंततः याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल कथित मानहानिकारक भाषा के आधार पर आईटी एक्ट की धारा 67 लागू नहीं की जा सकती। इंदरजीत सिंह ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उनके खिलाफ व्हाट्सएप पर मानहानिकारक संदेश भेजे गए। उन्होंने आरोप लगाया था कि ये संदेश आशीष मिशाल ने भेजे थे। पुलिस ने इसी आधार पर मामला दर्ज किया था। मामले में आरोप था कि व्हाट्सएप के जरिए एक संदेश प्रसारित किया गया, जिसमें एक सीमेंट कंपनी और उसके अधिकारियों पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी, कोयला चोरी और अन्य अवैध गतिविधियों के आरोप लगाए गए थे। जिसमें इंद्रजीत ने कहा था कि इससे उसकी बदनामी हुई है। रौब जमाने के लिए इंद्रजीत में हाईकोर्ट में मानहानि का केस लगाया था। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने नकारा दिया था। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि इंदरजीत सिंह का मोबाइल फोन जांच के दौरान जब्त नहीं किया गया, जबकि कथित व्हाट्सएप संदेश सबसे पहले उसी मोबाइल पर प्राप्त हुए थे। इसी कारण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की धारा 65B में कमी पाई गई। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि किसी व्हाट्सएप संदेश में यदि किसी कंपनी या व्यक्ति के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हों तो वह मानहानि का मामला हो सकता है, लेकिन केवल इसी आधार पर उसे आईटी अधिनियम की धारा 67 के तहत अश्लील सामग्री नहीं माना जा सकता।
●1500 ट्रकों से लोहे का अवैध कारोबार!
भिलाई पावर हाउस और हथखोज क्षेत्र में HTC का मतलब हैवी ट्रांसपोर्ट कंपनी से है। इसके मुख्य कर्ताधर्ता और डायरेक्टर इंद्रजीत सिंह हैं। यह वही बिजनेस ग्रुप है जिसकी शुरुआत दलवीर सिंह उर्फ़ वीरा सिंह द्वारा की गई थी और आज इस बड़े कारोबारी साम्राज्य को इंद्रजीत सिंह संभाल रहे हैं। वह भिलाई ट्रक ट्रेलर ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष, SBS हॉस्पिटल के डायरेक्टर हैं। इनके पास 1500 से भी अधिक ट्रकों और ट्रेलरों का बड़ा नेटवर्क है।
●धान परिवहन में भी अवैध कब्जा
इंद्रजीत के एसोसिएशन ने प्रदेश की परिवहन व्यवस्था पर पूरी तरह से अवैध कब्जा कर लिया है। धान परिवहन में इनकी गाडियां चलती हैं। एक नम्बर की प्लेट को कई ट्रकों में लगा देते हैं। इनका मुख्य बिजनेस भिलाई स्टील प्लांट और अन्य बड़ी औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले लोहे, स्टील, कोयले और भारी मशीनों को देश के कोने-कोने में ट्रांसपोर्ट करने का है। इनके पास 1500 से भी अधिक ट्रकों और ट्रेलरों का बड़ा नेटवर्क है। कंस्ट्रक्शन और सिविल कॉन्ट्रैक्टिंग कंपनी इंडस्ट्रियल और सरकारी स्तर पर बड़े सिविल कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और अर्थमूविंग से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट्स पर काम करती है। स्टील ट्रेडिंग और डीलिंग भिलाई के स्थानीय स्टील रोलिंग मिलों के साथ मिलकर बड़े स्तर पर आयरन और स्ट्रक्चरल स्टील की ट्रेडिंग का काम भी इस ग्रुप से जुड़ा हुआ है। इनका मुख्य ऑफिस और ऑपरेशनल बेस पॉवर हाउस और हथखोज इंडस्ट्रियल एरिया (भिलाई) में केंद्रित है। इनका नेटवर्क छत्तीसगढ़ के अलावा देश के प्रमुख इंडस्ट्रियल हब, बंदरगाहों और माइनिंग एरिया (ओडिशा, झारखंड, मध्यप्रदेश) से जुड़ा हुआ है, जहाँ भिलाई का स्टील भेजा जाता है। कहा तो यह भी जा रहा है कि महादेव सट्टा ऐप में भी इनकी संलिप्तता है। इंद्रजीत कांग्रेस से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
●राजनेताओं और आला अधिकारियों की मिलीभगत से बढ़ा कारोबार
भिलाई स्टील प्लांट के मार्केटिंग डिविजन के अधिकारियों की भी मिलीभगत रहती है और नेताओं का संरक्षण प्राप्त होता है। यह ट्रांसपोर्टर थाना भट्टी के सभी पुलिस वालों को घूस देता है। मतलब यह है कि दुर्ग जिले के सभी सम्बन्धित अधिकारी इस लोहा चोरी के धंधे में लिप्त हैं।
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