'कॉकरोच' की सारी मांगे सरकार ने मानी, छात्रों का आंदोलन खत्म - शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा



--राजीव रंजन नाग
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज।

देश भर शुरु हुए छात्र आंदोलन, हिंसा के बीच पुलिस के साथ टकराव की तेज होती घटनाओँ से हिल गई नरेंद्र मोदी सरकार ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा मांग लिया। शनिवार दोपहर धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक पत्र के ज़रिए अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री कार्यकाल में जन-दबाव के कारण यह पहला इस्तीफ़ा है। 20 जुलाई को संसद तक मार्च पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई के बाद, मोदी सरकार के तहत शिक्षा प्रणाली की विफलता के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन, व्यवस्था के ख़िलाफ़ गुस्से और विरोध के एक बड़े प्रदर्शन में बदल गया था।

संसद में विपक्ष भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ गई थी। संसद के अंदर और बाहर यह लड़ाई तेज हो रही थी। संसद में अनेक विधेयक पेश किए जाने हैं लिहजा सरकार समझौता करने को मजबूर हुई। 12 साल में यह पहला मौका है जब विपक्ष के दवाब के सामने उसे अपने मंत्री को हटाना पड़ा। काक्रोच जनता पार्टी ने महीने से चल रहे अपना आंदोलन वापस लेने की घोषणा की। इस्तीफ़े से कुछ घंटे पहले, सीजेपी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने यह स्पष्ट कर दिया था कि देश के युवाओं और छात्रों को प्रधान के इस्तीफ़े या कैबिनेट से उनकी बर्खास्तगी से कम कुछ भी मंज़ूर नहीं होगा। 'संसद चलो' मार्च के दौरान 20 जुलाई को हुई हिंसा के लिए सुरक्षा बलों की ओर से माफ़ी मांगने की मांग का कोई ज़िक्र नहीं किया गया, जिसे सीजेपी और विपक्षी दलों ने उठाया था।

इसबीच, कॉकरोच जनता पार्टी और केंद्र सरकार ने शनिवार को एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में जंतर-मंतर पर एक महीने से चल रहे आंदोलन को खत्म करने की घोषणा की गई। सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, "केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफ़ा भेज दिया है, जिसका मतलब है कि हमारी पहली मांग पूरी हो गई है।" उन्होंने कहा कि यह कदम "अच्छी नीयत और तय शर्तों के आधार पर" उठाया जा रहा है।

दास ने बताया कि दूसरी मांग का हवाला देते हुए कहा कि सभी प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज एफआईआर वापस ली जाएं और भविष्य में उनके ख़िलाफ़ कोई नया मामला दर्ज न किया जाए या कोई कार्रवाई नहीं करने की भी मांग मान लिया गया है। उन्होंने कहा, "सरकार ने कहा है कि एफआईआर वापस ले ली जाएंगी और आयोजकों के ख़िलाफ़ भी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।" उन्होंने कहा कि जो एफआईआर पहले ही दर्ज हो चुकी हैं, उनकी जानकारी कुछ दिनों के भीतर सीजेपी के साथ साझा की जाएगी।

दास ने कहा कि छात्र-प्रदर्शनकारियों को सुरक्षा (इम्युनिटी) देने से जुड़ी "गारंटी" का एक ड्राफ़्ट सरकार के साथ साझा किया गया है और उन्हें उम्मीद है कि इसे ज्यों का त्यों मान लिया जाएगा। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि वह मंगलवार (28 जुलाई) तक उस ड्राफ़्ट पर जवाब देगी। इस साल की शुरुआत में नीट अंडरग्रेजुएट पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को भी मुआवज़ा देने का भरोसा दिया गया है। दास ने कहा कि यह मुआवज़े से जुड़े "नियमों और शर्तों" के अनुसार किया जाएगा।

दास के अनुसार परीक्षा और शिक्षा क्षेत्र में सुधारों से जुड़ी पांच सूत्रीय मांग पर सरकार ने जवाब देने के लिए चार हफ़्ते का समय मांगा है, जिसे सीजेपी ने स्वीकार कर लिया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में जगत प्रताप नड्डा ने कहा, "सरकार ने यह मांग मान ली है कि कोई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी और जो एफआईआर पहले ही दर्ज हो चुकी हैं, उन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।" उन्होंने भरोसा दिया कि भविष्य में भी उन्हें विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने आंदोलनकारियों की मुआवज़े से जुड़ी मांग भी मान ली। उन्होंने कहा, "हम उन लोगों के प्रति भी सहानुभूति रखते हैं जिन्हें परीक्षाओं के कारण नुकसान हुआ है और हम उन्हें कानून के तहत अधिकतम संभव मदद देंगे।"

धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को संबोधित अपने इस्तीफे में "जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में हालात को देखते हुए, और ताकि देश-विरोधी ताकतें इन हालात का फ़ायदा न उठा सकें, राष्ट्रीय एकता बनी रहे, किसी छात्र का भविष्य कानूनी उलझनों में न फंसे, और हमारे बच्चे अपनी पढ़ाई और करियर बनाने पर ध्यान दे सकें, मैंने माननीय प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है। प्रधान ने जो कुछ हुआ उसके लिए "देश-विरोधी ताकतों" को ज़िम्मेदार ठहराने का संकेत दिया है, लेकिन पिछले कुछ हफ़्तों में उनके इस्तीफ़े की मांग पूरे देश में ज़ोर पकड़ चुकी थी। अभिजीत दिपके और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) द्वारा शुरू किया गया इंटरनेट आंदोलन अब एक ऐसे आंदोलन में बदल गया है, जिसमें देश भर के छात्र, युवा, उनके शुभचिंतक और विपक्षी दल एक साथ आ गए हैं। सोमवार (20 जुलाई) को छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस और रैफ की ओर से की गई भारी बर्बरता के बाद लोगों की भावनाएं और भी ज़्यादा भड़क गई हैं।

●सीजेपी ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन वापस लिया, सरकार ने एक को छोड़कर सभी मांगें मानीं

प्रधान के इस्तीफ़े के बाद सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा, "यह लोकतंत्र है। हमारी दो और मांगें हैं। धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया है। लेकिन जिन बच्चों ने आत्महत्या की, उनके परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवज़ा मिलना चाहिए। 20 तारीख को जिन पुलिस गुंडों ने कार्रवाई की थी, उन पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए। याद रखें, कॉकरोच से पंगा न लें।"

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