--विजया पाठक
एडिटर - जगत विजन
रायपुर - छत्तीसगढ़, इंडिया इनसाइड न्यूज।
■पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उल्टी गिनती शुरू? उड़ी हवाईयां और होश
■कभी भी हो सकती है बघेल की गिरफ्तारी
■नहीं चेता आलाकमान तो भुगतने होंगे 2028 के चुनाव में परिणाम
■अभी भी वक्त, चरणदास महंत और टीएस सिंहदेव जैसे नेताओं को सौंपनी होगी कमान
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित महादेव एप्प सट्टा घोटाले में दिन-ब-दिन बड़े खुलासे होने से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। हाल ही में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कोषाध्यक्ष राम गोपाल अग्रवाल ने पूछताछ के दौरान कुछ खुलासों से पूर्व मुख्यमंत्री बघेल पर कभी भी कानून के हाथ पहुँच सकते हैं। रामगोपाल के बाद दिल्ली में विकास गर्ग के एजेंसियों के हत्थे चढ़ने से पूर्व मुख्यमंत्री की सांसें फूली हुई हैं। अग्रवाल की रिमांड अवधि 17 जुलाई के ख़त्म होते ही पूर्व मुख्यमंत्री बघेल भी एजेंसियों के हत्थे चढ़ने की कगार पर हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री बघेल, उनके सलाहकार रहे विनोद वर्मा, 2001, 2005 और 2007 बैच के आईपीएस क्रमशः आनंद छाबड़ा, शेख़ आरिफ और प्रशांत अग्रवाल समेत अन्य सट्टा कारोबारियों से विकास गर्ग के करीबी संबंध बताएं जाते हैं। ईओडब्ल्यू की टीम विभिन्न घोटालों और नगद रकम की अफ़रा-तफ़री को लेकर राम गोपाल अग्रवाल से निर्णायक पूछताछ में जुटी है। यह भी बताया जा रहा है, कि EbixCash के चेयरमैन विकास गर्ग और पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के बीच सौरभ चंद्राकर के माध्यम से बड़ी रकम का लेन-देन तय किया जाता था। यही नहीं, महादेव सट्टा कारोबार का रायपुर में देश का मुख्य ठिकाना बनाने के लिए लगभग आधा दर्जन आईपीएस अधिकारियों को भी बिजनेस पार्टनर बनाया गया था। सट्टा कारोबार को संरक्षण देने के लिए बतौर “प्रोटेक्शन मनी” पुलिस के कई आला अधिकारियों को नगद रक़म देने की बांगडोर एएसआई चंद्र भूषण वर्मा को सौंपी गई थी। यह भी बताया जा रहा है, कि इन आईपीएस अधिकारियों के अलावा एएसपी और सीएसपी से लेकर कई स्थानीय थानेदारों का एक बड़ा दस्ता महादेव एप्प सट्टा कारोबार से “प्रोटेक्शन मनी” वसूल रहा था। ईडी की फाइलों में एएसआई चंद्रभूषण वर्मा का नाम उन मुख्य गवाहों की सूची में दर्ज बताया जाता है, जिन्होंने, सट्टा संचालन और “प्रोटेक्शन मनी” से जुड़ी रक़म पुलिस महकमें के जिम्मेदार अधिकारियों के ठिकानों तक पहुंचाई थी। ईडी ने अपनी चार्जशीट में दागी अफसरों की भूमिका का भी हवाला दिया है। इसमें ख़ुफ़िया के अन्य निचले स्तर के पुलिस अधिकारियों के नाम भी दर्ज बताए जाते हैं।
●महादेव सट्टा ऐप मामले से कांग्रेस की छबि धूमिल
छत्तीसगढ़ के महादेव सट्टा ऐप के कारण प्रदेश में कांग्रेस की छबि धूमिल होती जा रही है। खासकर भूपेश बघेल के किये गये कारनामों से पार्टी दागदार साबित हो रही है। बावजूद उसके कांग्रेस आलाकमान अभी भी प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन पर विचार नहीं कर पा रहा है। जबकि राज्य भी चरणदास महंत और टीएस सिंहदेव जैसे कर्मठ और जुझारू नेता हैं जो आज भी पार्टी की खोई हुई साख का वापिस ला सकते हैं लेकिन पार्टी इस पर विचार ही नहीं कर रही है। महादेव सट्टा ऐप का दंश आज तक कांग्रेस भुगत रही है और जब तक भूपेश बघेल इसमें जुड़े रहेंगे यह दाग बरकरार रहेंगे। इससे छुटकारा पाने और पार्टी की साख बचाने का एक ही तरीका है कि वह बघेल से दूरी बना ले, जिसका संदेश भी सकारात्मक जायेगा।
●आधा दर्जन आरोपी खा चुके जेल की हवा, फिलहाल जमानत पर
गौरतलब है कि महादेव ऐप सट्टा मामले में अब तक आधा सैंकड़ा से ज़्यादा आरोपी जेल की हवा खा चुके हैं। इसमें से लगभग सभी जमानत पर रिहा हैं। इस मामले में जहाँ मुख्य आरोपियों में से एक पूर्व मुख्यमंत्री बघेल की गिरफ़्तारी का मामला अब तक अधर में लटका नजर आ रहा है। वही, अदालत में दाखिल सीबीआई की नई चार्जशीट जितने गुनाहों के तथ्यों को उजागर कर रही है, उससे कहीं ज्यादा सवाल विवेचना को लेकर सुर्ख़ियों में है। मार्च 2025 में सीबीआई ने छत्तीसगढ़ समेत 60 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी थी। जांच में अवैध सट्टा नेटवर्क को संचालित करने के कुछ एक पुलिस अधिकारियों को हर महीने बाकायदा ”प्रोटेक्शन मनी” मुहैया कराने का जो दस्तावेज सामने आया था, उसमें आईपीएस आरिफ शेख, आनंद छाबड़ा, अभिषेक पल्लव, पूर्व एएसपी संजय ध्रुव और पुलिस अधिकारी अभिषेक माहेश्वरी सहित कई अधिकारियों के ठिकानों पर भी तलाशी और छापेमारी का घटनाक्रम सामने आया था।
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