--विजया पाठक
एडिटर - जगत विजन
भोपाल - मध्यप्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज।
■क्या कांग्रेस नेताओं में आपसी मतभेद-मनभेद सामने आने लगे?
■कमलनाथ के समय कांग्रेस में रहती थी एकजुटता
■दतिया उपचुनाव में दिखाना होगा आपसी सामंजस्य
मध्यप्रदेश की राजनीति में समय-समय पर ऐसे अवसर आते हैं, जब किसी दल के सामने केवल चुनावी चुनौती नहीं होती, बल्कि संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की परीक्षा भी होती है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जुड़ी एक रिपोर्ट को लेकर प्रदेश कांग्रेस द्वारा उठाए गए राजनीतिक प्रश्नों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के सार्वजनिक रुख ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा को जन्म दिया। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया कि क्या कांग्रेस के भीतर विभिन्न नेताओं के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है। किसी भी राजनीतिक दल की सबसे बड़ी शक्ति केवल उसके मुद्दे नहीं होते, बल्कि उसके नेताओं के बीच विश्वास, संवाद और संगठनात्मक अनुशासन भी होता है। यदि वरिष्ठ नेताओं के सार्वजनिक वक्तव्य अलग-अलग संदेश देने लगें, तो इसका प्रभाव संगठन की एकजुटता पर भी दिखाई देता है। यही कारण है कि आज प्रदेश कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि संगठनात्मक भी है। अभी कांग्रेस के सामने दतिया का चुनाव है। इस चुनाव में कांग्रेसियों को आपसी सामंजस्य दिखाने की जरूरत है। नहीं तो दतिया हाथ से निकलने में देर नहीं लगेगी।
●कांग्रेस को एक सूत्र में बांधने का काम किया कमलनाथ ने
ऐसे समय में कांग्रेस के अनेक कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम स्वाभाविक रूप से चर्चा में आता है। इसकी वजह केवल उनका लंबा राजनीतिक अनुभव नहीं, बल्कि विभिन्न विचारों और नेताओं को साथ लेकर चलने की उनकी कार्यशैली भी रही है। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने प्रशासनिक निर्णयों के साथ-साथ संगठन में संवाद की संस्कृति को भी महत्व दिया। उनके नेतृत्व में कई अवसरों पर अलग-अलग विचार रखने वाले नेताओं ने भी साझा मंच पर काम किया। कमलनाथ का राजनीतिक जीवन इस बात का उदाहरण है कि नेतृत्व केवल निर्णय लेने का नाम नहीं है, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार संगठन को एक सूत्र में बांधकर आगे बढ़ाने की क्षमता भी है। यही कारण है कि उनके कार्यकाल में संगठन के भीतर मतभेद सार्वजनिक विवाद का रूप कम ही लेते दिखाई दिए। वे अक्सर व्यक्तिगत संवाद, नियमित बैठकों और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया के माध्यम से संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने का प्रयास करते रहे।
प्रदेश कांग्रेस के अनेक पुराने कार्यकर्ता मानते हैं कि कमलनाथ की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सहज उपलब्धता और संवाद की शैली रही है। चाहे वरिष्ठ नेता हों, युवा कार्यकर्ता हों या जिला स्तर के पदाधिकारी, सभी के साथ नियमित संपर्क बनाए रखना उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा। यही कारण था कि संगठन में निर्णय लेने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत अधिक समन्वित दिखाई देती थी।आज जब कांग्रेस आगामी चुनावों की तैयारी की दिशा में आगे बढ़ रही है, तब यह आवश्यक हो जाता है कि संगठन के भीतर सभी वरिष्ठ नेताओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो। जनता किसी भी दल से यह अपेक्षा करती है कि वह पहले अपने संगठन को मजबूत बनाए, तभी वह प्रदेश के लिए प्रभावी विकल्प प्रस्तुत कर सकता है।
●कमलनाथ के मिशन और विजन से प्रभावित हैं कांग्रेसी
कमलनाथ के पक्ष में एक महत्वपूर्ण तर्क उनका प्रशासनिक अनुभव भी है। लगभग चार दशक तक राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहते हुए उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों का दायित्व संभाला। उद्योग, निवेश और अधोसंरचना जैसे क्षेत्रों में उनके अनुभव का लाभ मध्यप्रदेश को भी मिला। मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल भले ही लगभग 18 माह का रहा, लेकिन इस दौरान किसानों, उद्योग, निवेश, रोजगार और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई निर्णय राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बने। यह भी उल्लेखनीय है कि उनके शासनकाल में प्रारंभ की गई कुछ योजनाओं और विकास संबंधी पहलों को बाद की सरकारों ने भी विभिन्न स्वरूपों में आगे बढ़ाया। लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह एक सकारात्मक संकेत माना जाता है कि जनहित की योजनाएं सरकार बदलने के बाद भी जारी रहें। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि विकास संबंधी पहलें दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर देखी जाती हैं। कांग्रेस के भीतर आज सबसे अधिक आवश्यकता संगठनात्मक ऊर्जा को पुनर्जीवित करने की है। इसके लिए अनुभवी नेतृत्व और युवा ऊर्जा के बीच संतुलन बनाना अनिवार्य होगा। कमलनाथ का अनुभव इस दिशा में उपयोगी साबित हो सकता है। उन्होंने हमेशा संगठन को चुनावी मशीनरी के बजाय कार्यकर्ताओं के परिवार के रूप में विकसित करने पर बल दिया। यही कारण है कि आज भी प्रदेश के अनेक जिलों में उनके साथ वर्षों से जुड़े कार्यकर्ताओं का मजबूत आधार दिखाई देता है। राजनीति में समय के साथ परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन अनुभव का महत्व कभी कम नहीं होता। चुनाव केवल नारों से नहीं जीते जाते, बल्कि संगठन, रणनीति, संसाधनों के प्रभावी उपयोग और कार्यकर्ताओं के मनोबल से जीते जाते हैं। इन सभी पहलुओं में कमलनाथ की कार्यशैली को उनके समर्थक उनकी प्रमुख ताकत मानते हैं।
●आपसी मतभेदों से बाहर निकलने की जरूरत
प्रदेश कांग्रेस के सामने आज अवसर भी है और चुनौती भी। यदि संगठन अपने वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और युवा नेतृत्व की ऊर्जा को एक मंच पर लाने में सफल होता है, तो वह भविष्य में अधिक प्रभावी राजनीतिक विकल्प के रूप में सामने आ सकता है। इसके लिए आवश्यक है कि मतभेदों को संवाद के माध्यम से सुलझाया जाए और सार्वजनिक स्तर पर एकजुटता का संदेश दिया जाए। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के लिए भी यह समय संगठन की परिस्थितियों का गंभीरता से मूल्यांकन करने का है। अनुभवी नेतृत्व का उपयोग केवल चुनावी रणनीति तक सीमित न रहकर संगठनात्मक मार्गदर्शन में भी किया जा सकता है। कमलनाथ जैसे वरिष्ठ नेता, जिन्होंने प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति दोनों में लंबा अनुभव अर्जित किया है, संगठन के लिए मार्गदर्शक भूमिका निभा सकते हैं।
मध्यप्रदेश की राजनीति में कांग्रेस यदि भविष्य की मजबूत रणनीति तैयार करना चाहती है, तो उसे अनुभव, संवाद, संगठनात्मक अनुशासन और सामूहिक नेतृत्व की संस्कृति को पुनः स्थापित करना होगा। कमलनाथ का राजनीतिक जीवन इन सभी गुणों का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है।
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