कूच बिहार में नोक-झोक, पर्यवेक्षक अनुराग यादव ने सीईसी ज्ञानेश कुमार से कहा-तमीज से बात करिये...



--राजीव रंजन नाग
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज।

उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव (समाज कल्याण) अनुराग यादव और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बीच हुई तीखी नोकझोंक के बाद बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले आयोजित एक चुनाव समीक्षा बैठक के दौरान माहौल उस समय गरमा गया, जब कूच बिहार (दक्षिण) विधानसभा क्षेत्र में तैनात पर्यवेक्षक अनुराग यादव ने सीईसी ज्ञानेश कुमार की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई और कहा तमीज से पेश आईये।

दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले कोलकाता में चुनाव तैयारियों को लेकर एक वर्चुअल हाई-लेवल मीटिंग चल रही थी। इस मीटिंग की अगुवाई ज्ञानेश कुमार कर रहे थे। मीटिंग में अलग-अलग इलाकों के अफसरों से चुनावी तैयारियों पर सवाल पूछे जा रहे थे। इसी दौरान एक सीनियर आईएएस अफसर और देश के मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच बहस हो गई। आईएएस अफसर ने मुख्य चुनाव आयुक्त को यहां तक कह द‍िया, “आप इस तरह बात नहीं कर सकते।”

बैठक भारत निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ द्वारा वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गई थी। सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की एक टिप्पणी पर अनुराग यादव ने खुले तौर पर असहमति जताई। मामला तब और बढ़ गया, जब सीईसी ने उन्हें घर वापस जाने के लिए कह दिया। इस पर अनुराग यादव ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके साथ इस तरह का व्यवहार नहीं किया जा सकता और उन्होंने अपनी 25 वर्षों की सेवा का हवाला दिया।

कहा जा रहा है कि अनुराग यादव ने दबाव के आगे झुकने के बजाय अपनी बात मजबूती से रखी और सीईसी को उसी अंदाज में जवाब दिया। हालांकि, “खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे” वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए चुनाव आयोग (ईसीआई) ने अनुराग यादव को उनके पर्यवेक्षक पद से हटा दिया। अनुराग यादव उत्तर प्रदेश सरकार में प्रमुख सचिव हैं और उन्हें पश्चिम बंगाल के कूच बिहार जिले में चुनाव पर्यवेक्षक के तौर पर तैनात किया गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, 8 अप्रैल को इस हाई-लेवल सरकारी मीटिंग में ज्ञानेश कुमार अफसरों से सवाल-जवाब कर रहे थे। खासतौर पर पोलिंग बूथ की संख्या जैसे बेसिक लेकिन अहम डेटा के बारे में। इस दौरान जब कूच बिहार दक्षिण सीट के जनरल ऑब्जर्वर, आईएएस अफसर अनुराग यादव की बारी आई, तो माहौल बदल गया। अनुराग यादव अपने क्षेत्र के पोलिंग बूथ की सटीक संख्या बता देने से पहले कुछ मिनट का समय लिया और फिर बताया कि वहां 125 मतदान केंद्र हैं। यहीं से मामला बिगड़ गया। बताया जा रहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त इस देरी और अनिश्चितता से नाराज हो गए और उन्होंने कड़ी टिप्पणी कर दी।

बात तब और आगे बढ़ी जब उन्होंने कथित तौर पर अफसर से ‘घर वापस जाने’ तक के लिए कह दिया। इस टिप्पणी के बाद अनुराग यादव ने भी सख्त लहजे में जवाब दिया. उन्होंने कहा, “आप हमारे साथ ऐसा बर्ताव नहीं कर सकते। हमने इस सेवा को 25 साल दिए हैं। आप इस तरह बात नहीं कर सकते।” इसके बाद कुछ सेकेंड के लिए मीटिंग में सन्नाटा छा गया। बाकी अधिकारी समझ नहीं पाए कि इस स‍िचुएशन में क्या र‍िएक्ट करें। हालांकि, थोड़ी देर बाद मीटिंग दोबारा सामान्य मुद्दों पर लौट आई। द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना के बाद चुनाव आयोग ने अनुराग यादव को कूच बिहार दक्षिण सीट के जनरल ऑब्जर्वर पद से हटा दिया।

आयोग के एक सीनियर अधिकार ने कहा-यह एक्शन उनके विद्रोही रवैये की वजह से नहीं, बल्कि पेशेवर अक्षमता के आधार पर हुआ। “ऑब्जर्वर आयोग की आंख और कान होते हैं। अगर कोई अधिकारी कई दिनों तक जमीन पर रहने के बावजूद पोलिंग स्टेशनों की बुनियादी जानकारी की पुष्टि नहीं कर पाता है, तो इससे पूरी चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।”

• कौन हैं आईएएस अनुराग यादव ?

अनुराग यादव, उत्तर प्रदेश कैडर के 2000 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। फिलहाल यूपी सरकार में सोशल वेलफेयर व सैनिक कल्याण विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वह एक अनुभवी अधिकारी माने जाते हैं। पश्चिम बंगाल का कूच बिहार इलाका चुनावी नजरिए से संवेदनशील माना जाता है। यही वजह है कि यहां तैनात ऑब्जर्वर से सटीक और अपडेटेड जानकारी की अपेक्षा की जाती है। बेसिक जानकारी में चूक को गंभीरता से लिया गया।

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