500 वर्षों में पहली बार मनाया जायेगा श्री राम राज्याभिषेक महोत्सव : यज्ञाचार्य कृष्णकांत शास्त्री



--एकलव्य केसरी
जयपुर - राजस्थान, इंडिया इनसाइड न्यूज।

प्राणी मात्र पर कृपा करने वाले प्रभु श्री राम के राज्याभिषेक कार्यक्रम की जरूरत और उसकी रूपरेखा से लोगों को अवगत कराने की आवश्यकता है। श्री राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा व धर्मध्वजा स्थापित के पश्चात अब तक के इतिहास में पहली बार आगामी चैत्र शुक्ल सप्तमी 25 मार्च, 2026 को हम सकल सनातन समाज के साथ मिलकर श्री रामराज्याभिषेक महोत्सव को उत्साह व श्रद्धा के साथ मना रहे हैं। यह बातें बुधवार को यज्ञाचार्य कृष्णकांत शास्त्री ने जयपुर के कंस्टिचुशन क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में कही।

उन्होंने कहा कि हमें ध्यान रहे कि 500 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद राम मंदिर का सपना साकार हुआ। प्रभु श्री राम की प्रतिज्ञा से लेकर धर्म ध्वजा आरोहण तक के कार्यक्रम हुए लेकिन 500 वर्षों के इतिहास में श्री राम राज्याभिषेक नहीं मनाया गया है।

उन्होंने बताया कि कैसे माता कैकई के वचन का पालन करने के लिए प्रभु श्री राम ने 14 वर्ष के वनवास को सहर्ष स्वीकार कर लिया था। उन्होंने कहा कि इसका उल्लेख धार्मिक ग्रंथों में ऋषि मुनियों द्वारा लिखे गए सार्वभौमिक सत्य के अनुसार वाल्मीकि रामायण में गीता प्रेस गोरखपुर कांड 75 प्रथम खंड अयोध्या कांड तृतीय सर्ग पृष्ठ संख्या 229 श्लोक 4

चैत्र: श्रीमानयं मास: पुण्य: पुष्पितकानन।
यौवराज्याय रामस्य सर्वमेवोपकल्प्यताम्॥

में और इसके अलावा बंगाली भाषा की कृत्तिवास रामायण में मिलता है। जिसके अनुसार महाराज दशरथ चैत्र मास में श्रीरामजी का राज्याभिषेक करने का निर्णय करते हैं। परन्तु अकस्मात उसी दिन प्रभु श्री राम राज्याभिषेक से वंचित होकर वनवास चले जाते हैं।

वनवास की अवधि पूर्ण होने पर जब प्रभु रामचंद्र जी माता सीता, लक्ष्मण जी, हनुमान जी, महाराज सुग्रीव, जामवंत जी और अंगद सहित अयोध्या नगरी लौटे तो नगर में उत्सव मनाया गया। वाल्मीकि रामायण के अनुसार युद्ध कांड के सर्ग 124 के पहले श्लोक में भी इसका वर्णन है कि 14 वर्ष पूर्ण होने पर पंचमी तिथि को भगवान श्री राम ऋषि भारद्वाज के आश्रम में पहुंचते हैं। सर्ग 125 के श्लोक संख्या 24 में पंचमी की रात वित कर अर्थात छठी तिथि को (हनुमान जी और निषाद राज गुह के बीच संवाद) प्रभु आगमन का लेकर प्रमाण है। पद्म पुराण, स्कंद पुराण, आठ कांड वाली रामायण व अरण्यक रामायण के अनुसार सप्तमी तिथि को श्रीराम के राज्याभिषेक का प्रमाण है। हम प्राणी मात्र को प्रेम करने वाले प्रभु श्री राम के राज्याभिषेक को सौभाग्य से अब मना रहे हैं।

आज प्रत्येक प्राणी को सम्मान देने वाले भगवान श्री राम के आदर्शों पर चलने के लिये प्रेरित करने की जरूरत है। भगवान राम का राज्याभिषेक मनाये जाने के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, श्री राम मंदिर ट्रस्ट अयोध्या, चारों पीठ के शंकराचार्य, माघ मेला प्रयागराज के कल्पवासी, सभी संत महंत व सनातन अनुयायियों से श्री राम के प्रेमियों को पत्र के माध्यम से आग्रह किया जा रहा है। भगवान श्री राम ने जाति पात से उठकर सब को सम्मान किया है यही राम राज्य है। ऐसा विचार कर उनसे विनती की जाये कि जन जन को आदर्श संस्कार का मार्ग दिखाएं।

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