अब 10 मिनट में डिलीवरी का वादा नहीं: श्रम मंत्रालय ने किया हस्तक्षेप



--राजीव रंजन नाग
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज।

● ब्लिंकिट ने हटाया ‘10 मिनट में डिलीवरी’ का दावा

गिग वर्कर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ब्लिंकिट ने अपने प्लेटफॉर्म से “10 मिनट में डिलीवरी” का दावा हटा दिया है। अब कंपनी का नया टैगलाइन है, 30,000+ प्रोडक्ट्स डिलीवर एट योर डोरस्टेप। आपको बता दें कि यह बदलाव आज से लागू हो गया चुका है। कंपनी ने यह कदम अपने डिलीवरी वर्कर्स की सुरक्षा को लेकर उठाया है।

• श्रम मंत्रालय ने किया हस्तक्षेप

ब्लिंकिट जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से 10 मिनट में डिलीवरी के दावों को हटाने के लिए कहा गया है। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने इन प्लेटफॉर्म के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और उनसे डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए कहा। “आप” सांसद राघव चड्ढा जो गिग वर्कर्स की चिंताओं को उठा रहे हैं, ने केंद्र सरकार के इस कदम का स्वागत किया।

शीर्ष सूत्रों के अनुसार, मंत्री ने डिलीवरी टाइमलाइन से संबंधित चिंताओं के बारे में ज़ोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट और ज़ेप्टो सहित कई एग्रीगेटर्स के अधिकारियों से मुलाकात की।

श्रम मंत्रालय के अनुसार ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी और जोमैटो जैसी बड़ी कंपनियों के साथ हुई बैठक के बाद श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने सभी प्लेटफॉर्म्स से 10 मिनट में डिलीवरी के दावे हटाने को कहा। उनका कहना था, कि इससे वर्कर्स पर दबाव कम होगा और उनकी सुरक्षा बढ़ेगी। यह कदम गिग इकॉनमी में काम करने वाले कर्मचारियों के हितों की दिशा में सरकार द्वारा उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

• हड़ताल और दबाव के बाद बदलाव

यह कदम नववर्ष 2025 की पूर्व संध्या पर हुए गिग वर्कर्स के हड़ताल के बाद आया। वर्कर्स ने बताया था कि अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी उन्हें स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिहाज से जोखिम में डालती है। हड़ताल और मीडिया की रिपोर्ट के बाद कंपनियों ने अपनी डिलीवरी नीति पर फिर से विचार किया।

• वर्कर्स के अधिकारों की मांग

आप सांसद राघव चड्ढा ने संसद में कहा कि गिग वर्कर्स “कष्ट और परेशानी” झेल रहे हैं। उन्होंने सोशल सिक्योरिटी, सही वेतन और सम्मान देने की मांग की। विशेषज्ञों का कहना है कि बहुत तेज डिलीवरी का दबाव अक्सर असुरक्षित परिस्थितियों का कारण बनता है, खासकर बारिश या ठंड जैसे मौसम में। माना जा रहा है कि ब्लिंकिट के इस फैसले के बाद स्विगी और जेप्टो जैसे अन्य प्लेटफॉर्म्स भी अपने डिलीवरी दावों में बदलाव करेंगे। यह कदम गिग इकॉनमी में वर्कर्स की सुरक्षा की मद्दे नजर उठाया गया है।

मिली जानकारी के अनुसार ब्लिंकिट ने अपनी टैगलाइन "10,000 से ज़्यादा प्रोडक्ट 10 मिनट में डिलीवर" से बदलकर "30,000 से ज़्यादा प्रोडक्ट आपके दरवाज़े पर डिलीवर" कर दी है।

10 मिनट में डिलीवरी का वादा सार्वजनिक बहस का एक गंभीर विषय रहा है, जिसमें कई लोगों का कहना है कि यह डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा को खतरे में डालता है। 25 दिसंबर को, गिग वर्कर्स के यूनियनों ने बेहतर वेतन और सामाजिक सुरक्षा लाभों की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। उनकी मांगों में मनमाने समय-आधारित डिलीवरी लक्ष्यों को खत्म करना भी शामिल था। विरोध प्रदर्शन के जवाब में, स्विगी और ज़ोमैटो ने डिलीवरी के लिए इंसेंटिव बढ़ा दिए। यूनियनों ने चेतावनी दी थी कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू करेंगे।

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 में कहा गया है कि सभी कर्मचारी, जिसमें गिग और प्लेटफॉर्म कर्मचारी शामिल हैं, सामाजिक सुरक्षा लाभों के हकदार हैं। इस महीने की शुरुआत में, श्रम और रोज़गार मंत्रालय ने चार श्रम संहिताओं के लिए मसौदा नियम प्रकाशित किए, जो गिग वर्कर्स को न्यूनतम वेतन, स्वास्थ्य, व्यावसायिक सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा कवरेज जैसे लाभों के लिए भी शामिल करते हैं। सरकार का लक्ष्य 1 अप्रैल से चार श्रम संहिताओं के पूरे पैकेज को लागू करना है।

आप सांसद राघव चड्ढा, जो संसद के अंदर और बाहर गिग वर्कर्स की चिंताओं को उठा रहे हैं, ने केंद्र सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा जब राइडर की टी-शर्ट/जैकेट/बैग पर '10 मिनट' लिखा होता है और कस्टमर की स्क्रीन पर टाइमर चलता है, तो दबाव असली, लगातार और खतरनाक होता है। यह कदम डिलीवरी राइडर्स और हमारे साथ सड़कों पर चलने वाले सभी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेगा।"

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