● रेल मंत्रालय ने आज पहली स्वर्ण राजधानी (गाड़ी नम्बर 12313 नई दिल्ली-सियालदह) की शुरूआत की
● परियोजना स्वर्ण के तहत 14 राजधानी और 15 शताब्दी गाड़ियों का उन्नयन
● परियोजना स्वर्ण के तहत नई दिल्ली-काठगोदाम शताब्दी एक्सप्रेस शुरू की जा चुकी है
यात्रा अनुभव में सुधार के लिए रेल मंत्रालय ने परियोजना स्वर्ण के तहत प्रमुख राजधानी और शताब्दी गाड़ियों को उन्नत बनाने का फैसला किया है। उन्नत यात्री सुविधाओं, गाड़ियों की सुदंरता और साफ-सफाई के स्तर में सुधार के साथ देश की पहली स्वर्ण राजधानी (गाड़ी नम्बर 12313 नई दिल्ली-सियालदह) की 29 नवम्बर को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से शुरूआत की गयी। इस अवसर पर रेलवे बोर्ड के सदस्य रवीन्द्र गुप्ता विशेष रूप से उपस्थित थे और उन्होंने गाड़ी का मुआयना किया।
परियोजना स्वर्ण के तहत राजधानी और शताब्दी गाड़ियों में यात्री अनुभव में सुधार के लिए एक विस्तृत कार्यक्रम बनाया गया है। इस संबंध में 10 मदों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है-
i कोच के अंदर की दशा
ii प्रसाधन
iii कोच के अंदर सफाई की स्थिति
iv समय की पाबंदी
v खान-पान
vi बिस्तर
vii स्टाफ का व्यवहार
viii सुरक्षा
ix कोच के अंदर मनोरंजन सुविधा
x रीयल टाइम फ़ीडबैक
इस कार्यक्रम के लिए मंत्रालय ने 9 टीमें बनाई हैं। हर टीम में रेलवे बोर्ड के दो अधिकारी शामिल हैं। ये टीमें परियोजना स्वर्ण के तहत उपरोक्त सभी 10 मदों की प्रगति की निगरानी करेंगी। परियोजना के पहले चरण के लिए 14 राजधानी और 15 शताब्दी गाड़ियों को चुना गया है।
परियोजना के तहत राजधानी एक्सप्रेस की पहली संशोधित रेक सियालदह राजधानी (12314 नई दिल्ली-सियालदह) गाड़ी है, जिसे आज नई दिल्ली से शुरू किया गया।
● पहली स्वर्ण राजधानी की विशेषताएं-
● गहन अनुसंधान के बाद सियालदह राजधानी में निम्नलिखित विशेषताएं जोड़ी गयी हैं:
• अंतर्राष्ट्रीय रंग संयोजन के अनुरूप डिब्बों को अंदर से पेंट किया गया है और एलईडी प्रकाश व्यवस्था की गयी है।
• शौचालयों में ‘ऑटो जेनिटर’ के जरिए बेहतर साफ-सफाई उपलब्ध करायी गयी है।
• स्वास्थ्य सुविधा को ध्यान में रखते हुए बेहतर वॉश बेसिन लगाये गये हैं और साबुन की उपलब्धता सुनिश्चित की गयी है। इसके अलावा बेहतर डस्टबिन भी रखे गये हैं।
• बर्थ नंबर और अन्य सुविधा देने के लिए अंधेरे में देखे जाने योग्य संकेतक लगाये गये हैं।
• प्रथम श्रेणी वातानुकुलित डिब्बे के यात्रियों के लिए दो अलग-अलग रंग के कंबलों की व्यवस्था की गयी है। अप और डाउन गाड़ियों में अलग-अलग रंग के कंबल होंगे।
• ऊपर की बर्थ पर आसानी से पहुंचने के लिए प्रथम श्रेणी वातानुकुलित डिब्बे में सीढ़ी लगाई गयी है।
• दरवाजों और बर्थ के आस-पास संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं।
• पत्रिका रखने के बैगों को नये डिजाईन में बनाया गया है और उसमें मोबाईल फोन रखने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था की गयी है।
• दर्पणों के ऊपर एलईडी लाईट लगायी गयी है।
• शौचालयों में सफाई को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त मैट रखा गया है और सफाई के लिए शुष्क शौचालय की व्यवस्था है।
• गंधहीन कमोड और बेसिन लगाये गये हैं और उन पर पॉलिश की गयी है।
•यात्रियों का फीडबैक जानने के लिए तीन पायलट कोच सेवा में हैं।
इस रेक को विकसित करने के लिए 35 लाख रुपये का खर्च आया है। इस तरह प्रति कोच 2 लाख रुपये से कम की लागत आई है।
परियोजना स्वर्ण के तहत जोनल रेलवे को इस तरह के कोचों के विकास और सुधार के लिए आजादी दी गयी है, ताकि वे स्वयं यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस दिशा में कदम उठा सकें।
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