विशाल तरणताल में आदिवासी तैराकी प्रतियोगिता आयोजित



--- अनिल द्विवेदी।

सोनभद्र,13 नवम्बर। सोनभद्र के शक्तिनगर के मिश्रा गाँव के रिहंद जलाशय के बगल में बना विशाल तरणताल में रविवार को आदिवासी तैराकी प्रतियोगिता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में भारत भूषण तिवारी थानाध्यक्ष शक्तिनगर, विशिष्ट अतिथि के• सी• जैन भाजपा नेता, समाजसेवी आर• डी• सिंह, अजीत सिंह कंग उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि ने तरणताल पर डीह बाबा का पूजा अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। रिहंद जलाशय के किनारे बसे आसपास के बहुत से प्रतिभागियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम 5 चरणों मे सम्पन्न हुआ। अंतिम चरण में 4 प्रतिभागियों ने विजेता बनने कर गौरव प्राप्त किया। तरणताल की लंबाई लगभग 200 मीटर होने के बाद भी प्रतिभागियों ने अपने हूनर के जलवे दिखाते रहे। तरणताल के किनारे दर्शक खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन तालियां बजाकर करते रहे, 200 मीटर लम्बी दूरी तय करके खिलाड़ी थक भी जाते थे उसके बावजूद भी हिम्मत और मेहनत से तैराकी के खेल को खेल कर महज 4 प्रतिभागियों ने जीत हासिल किया। प्रथम विजेता प्रदीप कुमार, दूसरे राजेंदर, तीसरे भोला साहनी व चौथे सूरज कुमार बने। मुख्य अतिथि ने प्रथम विजेता को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। वही अन्य विजेताओं को भी पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि भारत भूषण तिवारी ने अपने सम्बोधन में ग्रामीणों और खिलाड़ियो को कहा कि तैराकी प्रतियोगिता कार्यक्रम का आयोजन सराहनीय है। जलाशय के किनारे निवास करने वाले सभी लोगो को तैराकी के खेल का हूंनर होना चाहिए। तैराकी जानने वाला व्यक्ति प्राकृतिक बाढ़ जैसी आपदाओं से खुद को बचा सकते है और दूसरों को भी बचा कर उनकी रक्षा कर पाने में सफल हो पाते है, ग्रामीणों से सभी लोग तैराकी की जानकारी रखें ताकि कभी किसी भी समय बाढ़ और प्राकृतिक जैसी आपदाओं से बच सके। मुझे किसी ने बताया था कि खडिया से बीजपुर लगभग 12 कि•मी• चौड़ी रिहंद जलाशय की नदी को मार्च 1971 में जब नाव जलाशय में जा रही थी नाविक ने मना किया था ज्यादा सवारी ना बैठे, उसकी किसी ने बात नही मानी जबरन नाव को उस पार ले जाने का दबाव बनाए जिससे नाव रिहंद जलाशय में जब बीच धारा में पहुँची थी कि भार क्षमता से अधिक यात्री सवार होने से नाव नदी में डूब गई और कई लोग डूब कर मर गए उसमे से वही बचे जो तैराक थे, इस क्षेत्र की बड़ी घटना थी तब से नाव की सवारी खडिया से बीजपुर बन्द हो गयी है। जब भी नाव में बैठे, ध्यान रखें कि कभी भी ज्यादा सवारी वाली नाव पर न बैठे, सुरक्षा चूक मात्र से घटना घट जाती है। सभी लोगों को आत्मरक्षार्थ हेतु तैराकी को जाने, सीखे यह खेल। ग्रामीणों में तैराकी की जानकारी होना अति आवश्यक है, तैराकी जानने वाले खिलाड़ियों को सरकार हर सम्भव मदद कर रहीं है। आज छोटे से कस्बे से, कल जिले व प्रदेश में तथा देश में विदेशों में जाकर भी यह खेल खेल कर अपने गाँव, जिले, प्रदेश तथा देश का नाम रोशन कर सकते है इसलिए आयोजन कर्ता जगदीश साहनी से कहेंगे कि इस क्षेत्र के खिलाड़ियों को जिले और प्रदेश स्तर पर इस कला को प्रचलित करे।

विशिष्ठ अतिथि आर• डी• सिंह ने भी अपने संबोधन में कहा कि तैराकी प्रतियोगिता में जो खिलाड़ी भाग लिए जो विजेता बनने से चूक गए है अगली बार प्रयास करे तैराकी के खेल में जो भी खिलाड़ी तरणताल में तैर कर अपने हुनर दिखाए है वो सभी साहसी है। जो जीत हासिल नहीं कर पाए उन्हें अगली बार जरूर विजेता बनने का प्रयास करना चाहिए। हमारे थानाध्यक्ष महोदय ने अभी अपने संबोधन में कहा कि कभी भी जब नाव पर बैठे भीड़ वाली पर न बैठे, सभी ग्रामीण से अपील है कि यह खेल की जानकारी सभी को होना चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जगदीश साहनी अध्यक्ष सोन आदिवासी शिल्पकला ग्रामोद्योग समिति ने किया और संचालन प्रवीण पटेल ने किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से पी• के• सिंह चौकी इंचार्ज बीना पुलिस चौकी, रामानुज गौतम, राकेश कुमार निषाद, रामशकल वर्मा, बाबलू गुप्ता ग्राम प्रधान कोहरौलिया इत्यादि मौजूद थे।

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