खबरें विशेष : मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी/स्वीकृति



नई दिल्ली, 08 नवम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

॥●॥ कैबिनेट ने बीएसएनएल, एमटीएनएल और बीबीएनएल द्वारा की गई खरीद में मेसर्स आईटीआई लिमिटेड के लिए खरीद कोटे को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने बीएसएनएल, एमटीएनएल और बीबीएनएल द्वारा की गई खरीद में मेसर्स आईटीआई लिमिटेड के लिए खरीद कोटे को मंजूरी दे दी है।

सीसीईए ने आज मेसर्स आईटीआई लिमिटेड के लिए खरीद कोटे को जारी रखने के संबंध में निम्नलिखित प्रस्ताव को मंजूरी दीः

(ए) निम्नलिखित को आरक्षित करते हुए मेसर्स आईटीआई लिमिटेड के लिए आरक्षण कोटा नीति को जारी रखना
1) बीएसएनएल, एमटीएनएल और बीबीएनएल द्वारा दिये गये कुल खरीद आदेशों (ऑर्डर) का 30 प्रतिशत मेसर्स आईटीआई लिमिटेड के लिए आरक्षित रखा जाएगा। यह कोटा संबंधी आरक्षण मेसर्स आईटीआई लिमिटेड द्वारा निर्मित उत्पादों के साथ-साथ आउटसोर्स की गई उन वस्तुओं के लिए भी होगा, जिनमें मेसर्स आईटीआई लिमिटेड द्वारा वर्ष 2018-19 के दौरान न्यूनतम 12 प्रतिशत मूल्यवर्धन किया गया है और वर्ष 2019-20 में 16 प्रतिशत मूल्यवर्धन तथा वर्ष 2020-21 में 20 प्रतिशत मूल्यवर्धन किया जाएगा।
2) तैयारशुदा परियोजनाओं के लिए कुल आदेशों का 20 प्रतिशत आरक्षित रखा जाएगा (जैसे कि बीएसएनएल और एमटीएनएल के जीएसएम नेटवर्क को शुरू करना, वाई-फाई इत्यादि और बीबीएनएल के भारतनेट परियोजना नेटवर्क को शुरू करना, इत्यादि)।

(बी) आईटीआई आरक्षण कोटे के तहत ऑर्डर को केवल तभी स्वीकार करेगी जब कीमत के बारे में जानकारी मिल जाएगी और यह कीमत वाणिज्यिक दृष्टि से लाभप्रद होगी।

(सी) आईटीआई निविदा खुलने के 15 दिनों के भीतर आरक्षण कोटे के तहत अपने विकल्प का इस्तेमाल करेगी।

(डी) उपर्युक्त नीतिगत उपाय सीसीईए की मंजूरी मिलने की तिथि से लेकर अगले तीन वर्षों तक प्रभावी रहेंगे। निर्धारित अवधि के समाप्त होने के बाद आईटीआई की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए इस नीति की फिर से समीक्षा की जाएगी।

• पृष्ठभूमिः

मेसर्स आईटीआई लिमिटेड संचार मंत्रालय, दूरसंचार विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण वाला एक सूचीबद्ध अनुसूचित ‘ए’ केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम है। यह कंपनी रक्षा संचार एवं नेटवर्किंग से संबंधित जरूरतों की आपूर्ति करती है और इसके साथ ही यह भारतीय सेना को कूटलेखन (एन्क्रिप्शन) उत्पादों की आपूर्ति करती है। मुख्य ग्राहकों में बीएसएनएल, एमटीएनएल, रक्षा, अर्द्ध-सैन्य बल और राज्य सरकारें शामिल हैं। आईटीआई की छह विनिर्माण इकाइयां (यूनिट) बेंगलुरू (कर्नाटक), रायबरेली, नैनी एवं मनकपुर (सभी उत्तर प्रदेश में), पलक्कड़ (केरल) और श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) में हैं।

चूंकि यह कंपनी वर्ष 2004 में रुग्ण हो गई थी और इसे बीआईएफआर के सुपुर्द कर दिया गया था, इसलिए जीसीईए ने 12 फरवरी 2014 को आयोजित की गई अपनी बैठक में इसके पुनरुत्थान के लिए 4156.79 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मुहैया कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। दूरसंचार निर्माण के प्रतिस्पर्धी माहौल में आईटीआई का अस्तित्व बनाये रखने के लिए बीएसएनएल और एमटीएनएल 30 प्रतिशत का आरक्षण टा आईटीआई लिमिटेड के लिए अलग रखती रही हैं। आईटीआई लिमिटेड को दिये जाने वाले आरक्षण लाभ की वैधता 31 मई, 2018 को समाप्त हो गई है।

बीएसएनएल, एमटीएनएल और बीबीएनएल से आईटीआई लिमिटेड को तीन और वर्षों तक आरक्षण कोटे का लाभ देने का अनुरोध किया जाएगा।

• प्रमुख असरः

(1) बीएसएनएल, एमटीएनएल और बीबीएनएल द्वारा दिये गये कुल खरीद आदेशों (ऑर्डर) का 30 प्रतिशत मेसर्स आईटीआई लिमिटेड के लिए आरक्षित रखा जाएगा। यह कोटा संबंधी आरक्षण मेसर्स आईटीआई लिमिटेड द्वारा निर्मित उत्पादों के साथ-साथ आउटसोर्स की गई उन वस्तुओं के लिए भी होगा, जिनमें मेसर्स आईटीआई लिमिटेड द्वारा वर्ष 2018-19 के दौरान न्यूनतम 12 प्रतिशत मूल्यवर्धन किया गया है और वर्ष 2019-20 में 16 प्रतिशत मूल्यवर्धन तथा वर्ष 2020-21 में 20 प्रतिशत मूल्यवर्धन किया जाएगा और
(2) तैयारशुदा परियोजनाओं के लिए कुल आदेशों का 20 प्रतिशत आरक्षित रखा जाएगा (जैसे कि बीएसएनएल और एमटीएनएल के जीएसएम नेटवर्क को शुरू करना, वाई-फाई इत्यादि और बीबीएनएल के भारतनेट परियोजना नेटवर्क को शुरू करना, इत्यादि) जैसे इन दो मामलों में लाभ की अवधि का विस्तार होने से उत्पादन संबंधी गतिविधियों हेतु एफटीएल के लिए पर्याप्त ऑर्डर सुनिश्चित होंगे। बीएसएनएल, एमटीएनएल और बीबीएनएल की ओर से खरीद कोटे का प्रावधान होने से आईटीआई की ऑर्डर-बुक को ज्यादा बढ़ावा मिलेगा तथा इसके साथ ही उसकी वित्तीय स्थिति को बेहतर करने में मदद मिलेगी।

इस निर्णय से आईटीआई लाभान्वित होगी। इससे विशेषकर नई दूरसंचार प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में कंपनी में और ज्यादा रोजगार अवसर सृजित करने में भी मदद मिलेगी।


॥●॥ केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से छह हवाई अड्डों – अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम और मंगलुरु को लीज पर देने के लिए अपनी मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने निम्नलिखित के लिए अपनी मंजूरी दी है :

सार्वजनिक निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति (पीपीपीएसी) के माध्यम से सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत परिचालन, प्रबंधन और विकास के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के छह हवाई अड्डों - अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम और मंगलुरु को लीज पर देने के लिए सैद्धांतिक रूप से मंजूरी।

पीपीपीएसी के कार्यक्षेत्र से बाहर के किसी मुद्दे पर निर्णय लेने के लिए नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के नेतृत्व में नागर विमानन मंत्रालय के सचिव, आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव तथा व्यय विभाग के सचिव को शामिल करके सचिवों के अधिकारप्राप्त समूह का गठन करना।

• लाभ :

बुनियादी ढांचा परियोजनओँ में पीपीपी से सार्वजनिक क्षेत्र में आवश्यक निवेशों को जुटाने के अलावा सेवा आपूर्ति, विशेषज्ञता, उद्यमता और व्यावसायिक कौशल में दक्षता आती है।

हैदराबाद और बेंगलुरु में ग्रीन फील्ड हवाई अड्डों के विकास के लिए पीपीपी मॉड्ल से बुनियादी ढांचा परियोजना में हवाई अड्डों पर विश्व श्रेणी का बुनियादी ढांचा जुटाने, हवाई अड्डे पर आने वाले यात्रियों को कुशल और समयबद्ध सेवाओं की आपूर्ति करने और बिना किसी निवेश के भारतीय विमान प्राधिकरण की राजस्व प्राप्ति को बढ़ाने में मदद मिली है। वर्तमान में पीपीपी मॉड्ल के तहत प्रबंध किए जा रहे हवाई अड्डों में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोच्चि शामिल हैं।

भारत में पीपीपी हवाई अड्डों ने हवाई अड्डा सेवा गुणवत्ता (एएसक्यू) के रूप में हवाई अड्डा अंतर्राष्ट्रीय परिषद (एसीआई) द्वारा अपनी संबंधित श्रेणियों में शीर्ष पांच हवाई अड्डों में रैंक हासिल की है।

इन पीपीपी अनुभवों ने विश्व स्तर के हवाई अड्डों का सृजन करने में मदद की है। इसने देश के अन्य भागों में हवाई अड्डों के विकास और एयर नेवीगेशन बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करके राजस्व में बढ़ोत्तरी करने में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की मदद भी की है।

• पृष्ठभूमि :

घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय हवाई यात्रा में बढ़ोतरी के साथ-साथ अधिकांश हवाई अड्डों पर भारी भीड़ तथा एक दशक से अधिक समय पूर्व निजीकरण किए गए पांच हवाई अड्डों पर मजबूत यातायात वृद्धि ने अनेक अंतर्राष्ट्रीय परिचालकों और निवेशकों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है। अंतर्राष्ट्रीय दिलचस्पी के रूप में बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में हवाई अड्डा क्षेत्र एक शीर्ष प्रतियोगी क्षेत्र है। अंतर्राष्ट्रीय परिषद और निवेशक तीन-चार मिलियन यात्री से अधिक क्षमता वाले ब्राउन फील्ड हवाई अड्डों के विस्तार में गहरी दिलचस्पी रखते हैं। हवाई अड्डा क्षेत्र पीपीपी मॉड्ल को अपनाने से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित करने का तुरंत अवसर उपलब्ध करा सकता है।

इसलिए भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण के छह हवाई अड्डों - अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम और मंगलुरु को पहले चरण में लीज पर देने का निर्णय लिया गया है। इससे भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण का राजस्व बढ़ने तथा रोजगार सृजन और संबंधित बुनियादी ढांचे के रूप में इन क्षेत्रों के आर्थिक विकास में बढ़ोतरी होने का अनुमान है।


॥●॥ केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने शत्रु के शेयरों की बिक्री के लिए तय प्रक्रिया और कार्यप्रणाली को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शत्रु के शेयरों की बिक्री के लिए प्रक्रिया और कार्यप्रणाली को मंजूरी दी है। इसका विवरण इस प्रकार है :

1. शत्रु संपत्ति अधिनियम 1968 की धारा 8-ए की उपधारा-1 के अनुसार गृह मंत्रालय की अभिरक्षा/भारत की शत्रु संपत्ति के परिरक्षण के अधीन शत्रु शेयरों की बिक्री के लिए ‘सैद्धांतिक रूप से’ मंजूरी दी गयी है।
2. इन्हें बेचने के लिए शत्रु संपत्ति अधिनियम 1968 की धारा 8-ए की उपधारा-7 के प्रावधानों के अधीन निवेश और सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन को प्राधिकृत किया गया है।
3. विनिवेश लाभ के रूप में बिक्री लाभों को वित्त मंत्रालय द्वारा पोषित सरकारी लेखा में जमा कराया जाएगा।

• विस्तृत विवरण :

1. 20,323 शेयर धारकों के 996 कंपनियों के कुल 6,50,75,877 शेयर सीईपीआई की अभिरक्षा के अधीन है। इन 996 कंपनियों में से 588 क्रियाशील/सक्रिय कंपनियां है। इनमें से 139 कंपनियां सूचीबद्ध है और शेष कंपनियां गैर-सूचीबद्ध है। इन शेयरों को बेचने की प्रक्रिया के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग तथा गृहमंत्री को शामिल करके वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली वैकल्पिक कार्यप्रणाली (एएम) से मंजूरी प्राप्त करनी होती है। एएम की सहायता अधिकारियों की उच्चस्तरीय समिति करेगी जिसके सह-अध्यक्ष सचिव, डीआईपीएएम और गृह मंत्रालय के सचिव (डीईए, डीएलए, कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय और सीईपीआई के प्रतिनिधियों सहित) होंगे। यह शेयरों की बिक्री के लिए प्रमात्रा, मूल्य/मूल्य बैंड, सिद्धांत और कार्यप्रणालियों के संबंध में अपनी सिफारिशें करेगी।
2. शत्रु शेयरों की किसी भी बिक्री शुरू करने से पहले सीईपीआई यह प्रमाणित करेगी की शत्रु शेयरों की यह बिक्री किसी भी न्यायालय, ट्रिब्यूनल या किसी प्राधिकरण या वर्तमान में लागू किसी कानून द्वारा प्रतिबंधित नहीं है और इसका सरकार द्वारा निपटान किया जा सकता है।
3. चल शत्रु संपत्ति के निपटान के लिए जैसा अभी अपेक्षित हो सलाहकार/मर्चेंट बैंकर, कानूनी सलाहकार, बिक्री ब्रोकर आदि जैसे मध्यवर्तियों की खुली निविदा/सीमित निविदा प्रक्रिया के माध्यम से डीआईपीएएम द्वारा नियुक्ति की जाएगी। अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी) बिक्री प्रक्रिया का मार्गदर्शन करेगा।

1968 के अधिनियम में ‘शत्रु’ की परिभाषा इस प्रकार थी : ‘शत्रु’ या ‘शत्रु विषय’ या ‘शत्रु फर्म’ का आशय उस व्यक्ति या देश से है जो एक शत्रु, शत्रु विषय या एक शत्रु फर्म था, भारत रक्षा अधिनियम और नियमावली के तहत जैसा भी मामला हो, लेकिन इसमें भारत के नागरिक शामिल नहीं होते हैं। 2017 के संशोधन द्वारा इसमें उसके कानूनी उत्तराधिकारी या वारिस चाहे वह भारत का नागरिक हो या ना हो या ऐसे देश का नागरिक हो जो भारत का शत्रु हो या ना हो और जिसने अपनी राष्ट्रीयता बदली हो, को प्रतिस्थापित किया गया है।

• प्रभाव

1. इस फैसले से 1968 में शत्रु सम्‍पत्ति अधिनियम लागू होने के बाद कई दशकों तक बेकार पड़े शत्रु शेयर का मुद्रीकरण होगा।
2. 2017 में संशोधन से शत्रु सम्‍पत्ति के निपटान के लिए एक विधायी प्रावधान किया गया था।
3. शत्रु शेयरों की बिक्री के लिए प्रक्रिया और व्‍यवस्‍था की मंजूरी के बाद अब इनकी बिक्री के लिए एक व्‍यवस्‍था का गठन किया गया है।

• महत्‍वपूर्ण प्रभाव :

इस फैसले से दशकों तक बेकार पड़ी शत्रु अचल सम्‍पत्ति का मुद्रीकरण हो सकेगा। इनकी बिक्री से मिले धन का इस्‍तेमाल विकास और समाज कल्‍याण कार्यक्रमों में किया जा सकता है।

• पृष्‍ठभूमि :

1. शत्रु सम्‍पत्ति अधिनियम, 1968 भारत रक्षा नियमावली, 1962 और भारत रक्षा नियमावली, 1971 (27 सितम्‍बर, 1997 से प्रभावी) के तहत सीईपीआई के अधिकार क्षेत्र में शत्रु सम्‍पत्ति को बनाये रखने का प्रावधान है।
2. इस अधिनियम में 2017 में संशोधन के जरिये धारा-8ए के तहत सीईपीआई को शत्रु सम्‍पत्ति बेचने का अधिकार दिया गया है।

• किसी न्‍यायालय, न्‍यायाधिकरण या अन्‍य प्राधिकरण या उस वक्‍त लागू किसी कानून के तहत आए किसी फैसले या आदेश के बावजूद इस संदर्भ में केन्‍द्र सरकार द्वारा निर्दिष्‍ट किसी समय सीमा में शत्रु सम्‍पत्ति का अभिरक्षक, केन्‍द्र सरकार की पूर्व मंजूरी या विशेष आदेश के तहत अपने अधीन शत्रु सम्‍पत्ति का निपटान शत्रु सम्‍पत्ति (संशोधन तथा वैधता) कानून, 2017 के लागू होने से ठीक पहले इस कानून के प्रावधानों के तहत जैसा कि शत्रु सम्‍पत्ति (संशोधन तथा वैधता) कानून 2017 में संशोधन किया गया है, उसे बेचकर या किसी अन्‍य तरीके से कर सकता है।

• शत्रु सम्‍पत्ति अधिनियम, 1968 की धारा 8-ए की उपधारा-7 में किए गए संशोधन के अनुसार केन्‍द्र सरकार सम्‍पत्ति के संरक्षक की जगह पर किसी अन्‍य प्राधिकरण या मंत्रालय या विभाग को शत्रु सम्‍पत्ति के निपटान के लिए निर्देश दे सकती है।


॥●॥ केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने श्रम और रोजगार के क्षेत्रों में प्रशिक्षण और शिक्षा जारी रखने के लिए भारत और इटली के बीच समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने श्रम एवं रोजगार के क्षेत्रों में प्रशिक्षण और शिक्षा के लिए भारत और इटली के बीच समझौता ज्ञापन को अपनी मंजूरी दी है।

• लाभ :

यह समझौता ज्ञापन निम्नलिखित के माध्यम से कार्य क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण और शैक्षिक गतिविधियों के विस्तार में सहायता प्रदान करेगा :

1. प्रशिक्षण, कार्य-पद्धतियों और तकनीकियों के बारे में संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आयोजित करना;
2. विभिन्न सामाजिक भागीदारों के लिए नए प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित करना;
3. श्रम रोजगार के बारे में विभिन्न विषयों में विशेष रूप से तैयार प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करना;
4. प्रशिक्षण कार्य-पद्धतियों का मूल्यांकन करना;
5. विशेष रूप से श्रम प्रशासन के संदर्भ में, प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बारे में अच्छी कार्यप्रणाली का आदान-प्रदान करना; प्रशिक्षण मॉड्यूल की आपूर्ति और सुविधा में एक-दूसरे की मदद करना तथा अध्ययन-भ्रमणों का आयोजन करना; और
6. ज्ञान और जानकारी साझा करने के लिए प्रशिक्षकों का आदान-प्रदान करना

• मुख्य प्रभाव :

इस समझौता ज्ञापन का मुख्य प्रभाव कार्य के क्षेत्र में बदलाव से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों से निपटने में दोनों संस्थानों की तकनीकी क्षमताओं का उन्नयन करने पर पड़ेगा। यह अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों को विकसित और आयोजित करने की तकनीकी क्षमताओं और वी.वी.गिरि राष्ट्रीय श्रम संस्थान (वीवीजीएनएलआई), नोएडा के एशिया प्रशांत क्षेत्र में एक शीर्ष प्रशिक्षण संस्थान के रूप में क्रमिक विकास को बढ़ाएगा। यह समझौता ज्ञापन समस्त एशिया प्रशांत क्षेत्र से सामाजिक भागीदारों के व्यापक क्षेत्र तक अपनी पहुंच का विस्तार करेगा।

• पृष्ठभूमि :

वी.वी.गिरि राष्ट्रीय श्रम संस्थान (वीवीजीएनएलआई) नोएडा, केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एक स्वायत्त निकाय है, इसने और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र (आईटीसी - आईएलओ), टूरिन ने 2012 में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इसने ज्ञान और अनुभव की आपसी साझेदारी के साथ अनेक गतिविधियों में सहायता प्रदान की। समझौता ज्ञापन का उद्देश्य व्यावसायिक सहयोग जारी रखने के लिए संस्थानों के बीच सहयोग को औपचारिक रूप प्रदान करना है।

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र (आईटीसी) की स्थापना 1964 में टूरिन में हुई थी। तभी से यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर श्रम के विभिन्न आयामों के बारे में प्रशिक्षण देने के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण केंद्र बिन्दु के रूप में कार्य कर रहा है। आईटीसी रोजगार, श्रम, मानव संसाधन विकास और क्षमता निर्माण के बारे में अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञता का व्यापक भंडार है। आईटीसी का एक प्रमुख उद्देश्य श्रम और रोजगार के क्षेत्र में प्रशिक्षण गतिविधियों में नियोजित प्रमुख संस्थानों के साथ भागीदारी विकसित करना है।


॥●॥ अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के तहत उन्नत मोटर ईँधन प्रौद्योगिकी गठबंधन कार्यक्रम के सदस्य के रूप में भारत के इससे जुड़ने के बारे में कैबिनेट को अवगत कराया गया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल को अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के तहत उन्नत मोटर ईँधन प्रौद्योगिकी गठबंधन कार्यक्रम (एएमएफ टीसीपी) के सदस्य के रूप में भारत के इससे जुड़ने के बारे में अवगत कराया गया है। भारत 9 मई, 2018 को इस कार्यक्रम के सदस्य के रूप में जुड़ा था। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की रूपरेखा के तहत एएमएफ टीसीपी काम करता है जिससे भारत का ‘जुड़ाव’ दर्जा 30 मार्च, 2017 से ही है।

• विवरणः

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा एएमएफ टीसीपी से जुड़ने का मुख्य लक्ष्य उन्नत मोटर ईंधनों/वैकल्पिक ईंधनों को बाजार में पेश करने को सुविधाजनक बनाना है, ताकि उत्सर्जन कम हो सके और इसके साथ ही परिवहन क्षेत्र में उच्च ईंधन दक्षता हासिल की जा सके। उन्नत मोटर ईँधन प्रौद्योगिकी गठबंधन कार्यक्रम से ईंधन का विश्लेषण करने, परिवहन क्षेत्र में उपयोग के लिए नये/वैकल्पिक ईंधनों की पहचान करने और ईंधन गहन क्षेत्रों में उत्सर्जन में कमी के लिए संबद्ध अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) गतिविधियों का पता लगाने के भी अवसर मिलेंगे।

उन्नत मोटर ईँधन प्रौद्योगिकी गठबंधन कार्यक्रम से जुड़े अनुसंधान एवं विकास कार्य को ‘अनुलग्नक (एनेक्स)’ नामक व्यक्तिगत परियोजनाओँ के अंतर्गत किया जाता है। विगत वर्षों के दौरान उन्नत मोटर ईँधन प्रौद्योगिकी गठबंधन कार्यक्रम के अंतर्गत 50 से भी अधिक अनुलग्नकों की शुरुआत की गई है और पूर्ववर्ती अनुलग्नकों में अनेक ईंधनों जैसे कि पुनर्निरूपित ईंधनों (गैसोलीन एवं डीजल), जैव ईंधनों (एथनॉल, बायोडीजल इत्यादि), कृत्रिम ईंधनों (मेथनॉल, फिशर-ट्रॉप्च, डीएमई इत्यादि) और गैसीय ईंधनों को कवर किया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों के अनुसंधान एवं विकास संस्थान और वाहन परीक्षण एजेंसियों जैसे कि एआरएआई, सीआईआरटी, आईसीएटी, इत्यादि के पास अत्याधुनिक सुविधाएं हैं और इसके साथ ही संसाधन भी पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की सहभागिता वाले अनुलग्नकों में योगदान देंगे।

प्रधानमंत्री ने ‘ऊर्जा संगम, 2015’ में वर्ष 2022 तक ऊर्जा क्षेत्र में होने वाले आयात में कम से कम 10 प्रतिशत की कमी करने का निर्देश दिया था। इसके बाद पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक विस्तृत कार्य योजना पेश किये हैं जिसमें जैव ईंधनों और उन्नत/वैकल्पिक ईंधनों के साथ-साथ ईंधन दक्षता भी अहम भूमिका निभाएगी। उन्नत मोटर ईँधन प्रौद्योगिकी गठबंधन कार्यक्रम से जुड़ने से पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय को परिवहन क्षेत्र के लिए उच्च दक्षता एवं कम उत्सर्जन वाले उपयुक्त ईंधनों की पहचान एवं उपयोग करने में मदद मिलेगी।

भारत सरकार ने हाल ही में राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति-2018 को अधिसूचित किया है जिसमें उन्नत जैव ईंधनों जैसे कि 2जी एथनॉल, जैव-सीएनजी, जैवमेथनॉल, ड्रॉप-इन ईंधनों, डीएमई, इत्यादि के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास पर विशेष जोर देने पर फोकस किया जा रहा है। इन उन्नत ईंधनों को विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट पदार्थों जैसे कि फसल अवशेष, नगर निगम के ठोस कचरे, औद्योगिक अपशिष्ट, अपशिष्ट से निकलने वाली गैसों, खाद्य अपशिष्ट, प्लास्टिक इत्यादि से तैयार किया जा सकता है। वैसे तो इनमें से कुछ उन्नत जैव ईंधनों का सफलतापूर्वक उपयोग कुछ देशों में किया जा रहा है, लेकिन भारत अब भी परिवहन क्षेत्र में इनका उपयोग करने का इंतजार कर रहा है। ये उन्नत ईंधन वर्तमान में हमारे देश में विकास के आरंभिक चरणों में हैं और हमारी ऊर्जा संबंधी जरूरतों को पूरा करने हेतु इन ईंधनों को एक लाभप्रद विकल्प बनाने के लिए व्यापक अनुसंधान एवं विकास की जरूरत है। उन्नत मोटर ईँधन प्रौद्योगिकी गठबंधन कार्यक्रम से जुड़ाव हो जाने से पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय को निकट भविष्य में परिवहन क्षेत्र में उपयोग के लिए अनुकूल माने-जाने वाले उन्नत जैव ईंधनों की पहचान करने में मदद मिलेगी। इस तरह के मामलों में उन्नत जैव ईंधनों का उपयोग करने वाले सदस्य देशों के अनुभव भी पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के काम आएंगे।

एएमएफ टीसीपी से जुड़ने के लाभों में साझा लागत और एकत्रित तकनीकी संसाधन शामिल हैं। इसके तहत प्रयासों में दोहराव की जरूरत नहीं पड़ती है और इसके साथ ही राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास संबंधी क्षमताएं मजबूत होती हैं। इसके अलावा, अपनाए जाने वाले सर्वोत्तम तौर-तरीकों से जुड़ी सूचनाओँ एवं अनुसंधानकर्ताओँ के नेटवर्क का आदान-प्रदान होता है तथा इसके साथ ही अनुसंधान को व्यावहारिक कार्यान्वयन से जोड़ना संभव हो पाता है। जीवाश्म ईंधनों के आयात के प्रतिस्थापन में उन्नत जैव ईंधनों और अन्य वाहन ईँधनों की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए भारत इस कार्यक्रम का सदस्य बन जाने के बाद इन ईंधनों से संबंधित अपनी रुचि वाले अन्य क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास कार्य शुरू करेगा।

• पृष्ठभूमिः

‘एएमएफ टीएसपी’ स्वच्छ एवं अपेक्षाकृत अधिक ऊर्जा दक्ष ईंधनों एवं वाहन प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संबंधित देशों के बीच सहयोग के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म है। ‘एएमएफ टीएसपी’ की गतिविधियां अनुसंधान एवं विकास, उन्नत मोटर ईंधनों के उपयोग एवं प्रचार-प्रसार से जुड़ी हुई हैं और इसके तहत उत्पादन, वितरण और संबंधित पहलुओं के अंतिम उपयोग को ध्यान में रखते हुए सुव्यवस्थित ढंग से परिवहन ईंधन से जुड़े मुद्दों पर गौर किया जाता है।

भारत सरकार का पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय 9 मई, 2018 को उन्नत मोटर ईँधन प्रौद्योगिकी गठबंधन कार्यक्रम से इसके 16वें सदस्य के रूप में जुड़ा है। उन्नत मोटर ईँधन प्रौद्योगिकी गठबंधन कार्यक्रम के अन्य सदस्यों में अमेरिका, चीन, जापान, कनाडा, चिली, इजरायल, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, स्वीडन, फिनलैंड, डेनमार्क, स्पेन, कोरिया गणराज्य, स्विट्जरलैंड और थाईलैंड शामिल हैं।


॥●॥ मंत्रिमंडल ने नागरिक व व्यावसायिक मामलों में भारत और मोरक्को के बीच परस्पर कानूनी सहायता पर समझौते को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नागरिक व व्यावसायिक मामलों में भारत और मोरक्को के बीच परस्पर कानूनी सहायता पर समझौते को मंजूरी दी है।

• विशेषताएं-

1. सम्मान और अन्य न्यायिक दस्तावेजों या प्रक्रियाओं की तामील
2. सिविल मामलों में साक्ष्य प्राप्त करना
दस्तावेजों, रिकार्डिंग की प्रस्तुति, पहचान या परीक्षण
3. सिविल मामलों में साक्ष्य प्राप्त करने के लिए अनुनय-प्रपत्र का कार्यान्वयन, और
4. मध्यस्थता फैसलों की पहचान और इनका कार्यान्वयन

• लाभ :

यह समझौता दोनों ही देशों के नागरिकों के लिए फायदेमंद साबित होगा। यह समझौता परस्पर मित्रता और सिविल व व्यावसायिक मामलों में प्रभावी सहयोग से संबंधित दोनों देशों की आकांक्षाओं को पूरा करेगा और यही इस समझौते की भावना, मूलभाव और भाषा है। भारत और मोरक्को के बीच यह समझौता सम्मन, न्यायिक दस्तावेज, अनुनय-प्रपत्र तथा मध्यस्थता फैसलों एवं न्यायिक फैसलों के कार्यान्वयन की तामील में आपसी सहयोग को बढ़ाएगा।

• पृष्ठभूमि :

स्वतंत्रतापूर्व के समय से भारत और अफ्रीकी देशों के बीच संबंध रहे हैं। भारत और मोरक्को के बीच सौहार्दपूर्ण और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। समय के साथ परस्पर संबंध और भी मजबूत हुए हैं। दोनों देश गुटनिरपेक्ष आंदोलन के हिस्सा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत ने मोरक्को की आजादी तथा मोरक्को स्वतंत्रता आंदोलन का समर्थन किया था। भारत ने 20 जून, 1956 को मोरक्को को मान्यता दी थी और 1957 में संबंध स्थापित किये थे। भारत मोरक्को के साथ परस्पर सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता में विश्वास रखता है और सिविल तथा व्यावसायिक मामलों में दोनों देशों के बीच आपसी संबंधों को विस्तार देने पर बल देता है।


॥●॥ मंत्रिमंडल ने आन्ध्र प्रदेश में केन्द्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए केन्द्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम, 2009 में संशोधन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आन्ध्र प्रदेश में केन्द्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दी है। आन्ध्र प्रदेश केन्द्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना विजयनगरम जिले के रेल्ली गांव में की जाएगी, जैसा कि आन्ध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 (2014 का नम्बर 6) की 13वीं अनुसूची में निर्दिष्ट है। मंत्रिमंडल ने केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना के पहले चरण के परिव्यय के लिए 420 करोड़ रुपये की धनराशि की भी मंजूरी दी है।


॥●॥ मंत्रिमंडल ने ड्रेजिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (डीसीआईएल) में सरकार की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी के रणनीतिक विनिवेश को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की केंद्रीय मंत्रिमंडल समिति ने डीसीआईएल में भारत सरकार की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी के रणनीतिक विनिवेश को सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी है। यह विनिवेश 4 पोर्ट –विशाखापटनम पोर्ट ट्रस्ट, पाराद्वीप पोर्ट ट्रस्ट, जवाहर लाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट और कांडला पोर्ट ट्रस्ट – के कंर्सटोरियम के पक्ष में किया जाएगा।

वर्तमान में भारत सरकार के पास ड्रेजिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की 73.44 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इस मंजूरी से बंदरगाहों में होने वाली ड्रेजिंग गतिविधियों के लिए तालमेल बनाने में सहायता मिलेगी। इसमें डीसीआईएल की ड्रेजिंग गतिविधियों को विस्तार देने के साथ-साथ तीसरे पक्ष द्वारा ड्रेजिंग गतिविधियां करने को ध्यान में रखा गया है। कंपनी तथा बंदरगाहों के बीच सुविधाओं के आपसी सहभागिता से बंदरगाहों को धन की बचत होगी।


॥●॥ मंत्रिमंडल ने भारत और मोरक्को के बीच प्रत्यर्पण समझौते पर हस्ताक्षर तथा अनुमोदन करने की मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और मोरक्को के बीच प्रत्यर्पण समझौते पर हस्ताक्षर तथा अनुमोदन करने की मंजूरी दी है। 11-18 नवम्बर, 2018 के दौरान मोरक्को के अति विशिष्ट व्यक्ति के प्रस्तावित यात्रा के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किये जायेंगे।

• लाभ :

इस समझौते से आर्थिक अपराध, आतंकवाद और अन्य गंभीर अपराधों के आरोपियों/ भगोड़ों को दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण करने के लिए एक मजबूत कानूनी आधार मिलेगा। यह सन्धि द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाएगी ताकि भारत और मोरक्को दोनों ही देशों के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ काम करने वाले आपराधिक तत्वों पर कार्रवाई की जा सके।

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