राजनाथ सिंह ने विमानन सुरक्षा के लिए बेहतर समन्‍वय और नयी प्रौद्योगिकी के इस्‍तेमाल पर जोर दिया



नई-दिल्ली, 09 अक्टूबर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

केन्‍द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने देश में पुख्‍ता विमानन सुरक्षा के लिए सभी हितधारकों के बीच बेहतर समन्‍वय की आवश्‍यकता पर बल दिया है। नयी दिल्‍ली में विमानन सुरक्षा पर एक अंतरराष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी को संबोधित करते हुए उन्‍होंने कहा कि विमानन क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारक विशेष रूप से बीसीएएस तथा सीआईएसफ विमानन सुरक्षा के लिए नयी प्रौदयोगिकी का इस्‍तेमाल तथा प्रशिक्षित मानव संसाधन बल के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करें।

ग्‍लोबल कोआपरेशन: सेक्‍योर एविशन विषय पर आयोजित इस दो दिवसीय संगोष्‍ठी का आयोजन केन्‍द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल द्वारा अपनी स्‍थापना की स्‍वर्ण जंयती वर्ष के उपलक्ष्‍य में किया गया था।

श्री सिंह ने विमानन क्षेत्र के लिए आतंकवादी खतरों का हवाला देते हुए कहा कि नागर विमानन सुरक्षा एक बेहद चुनौती भरा क्षेत्र है, क्‍योंकि ये हमेशा से आतंकवादी संगठनों के निशाने पर रहता है। आतंकवादी हमेशा ऐसे अवसरों की तलाश में रहते हैं, जहां वे ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों का ध्‍यान आकृष्‍ट कर सकें और मीडिया कवरेज ले सकें। उन्‍होंने कहा कि विमानन क्षेत्र पर हमले के लिए रोज नई तकनीक इजाद होती रहती है। वर्ष 2006 में लंदन में तरल विस्‍फोटक का इस्‍तेमाल और एम्‍सटर्डम में 2009 में जांघिये में बम छुपाकर आने वाले हमलावर की घटना इस बात का स्‍पष्‍ट प्रमाण है कि आतंकवादी विमानन क्षेत्र को निशाना बनाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।

विमानन सुरक्षा के लिए विश्‍व स्‍तर पर बेहतरीन प्रयासों पर जोर देते हुए श्री सिंह ने कहा कि इसके लिए हमें अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर आम सहमति से तय किये गये नियमों और दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करना चाहिए। सभी हवाई अड्डों पर आधुनिक और उन्‍नत प्रौद्योगिकी के इस्‍तेमाल से सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत बनाया जा सकता है। पारम्‍परिक और गैर-पारम्‍परिक खतरों से निपटने के लिए सरकारों और विमानन एजेंसियों को नये तरीके इजाद करने होंगे।

गृह मंत्री ने कहा कि विमानन सुरक्षा एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें थोड़ी सी भी ढील की गुंजाइश नहीं होती। कोई भी सुरक्षा व्‍यवस्‍था तभी पुख्‍ता होती है, जब उसकी छोटी से छोटी इकाई भी मजबूत हो। इसलिए छोटे हवाई अड्डों की सुरक्षा को भी अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि इस्‍तांबुल और ब्रसेल्‍स हवाई अड्डों पर हुए हमले इस बात का प्रमाण हैं कि सुरक्षा के मामले में हवाई अड्डे काफी संवेदनशील होते हैं।

देश के विमानन क्षेत्र में व्‍यापक विस्‍तार का उल्‍लेख करते हुए श्री सिंह ने कहा, ‘हम अपनी सुरक्षा नीतियों में लगातार सुधार कर रहे हैं। बदलते समय के साथ आने वाले खतरों से निपटने के लिए नीतियों को आवश्‍यकताओं के अनुरूप ढाला जा रहा है।’ आतंकवादियों द्वारा विमानों का अपहरण करने के खतरों को देखते हुए भारत ने इसके लिए एंटी हाईजैंकिंग मेकेनिज्‍म को अपग्रेड किया है। इसके तहत अपहणकर्ताओं द्वारा विमान पर नियंत्रण करने या विमान यात्रियों की सुरक्षा के लिए कोई खतरा पैदा करने की स्थिति में त्‍वरित कार्रवाई की व्‍यवस्‍था की गई है।

श्री सिंह ने कहा कि अमेरिका के टीएसए (परिवहन सुरक्षा प्रशासन) के विपरीत हमारी सरकार ने विमानन सुरक्षा को विमानन पारिस्थितिक तंत्र से जुड़ी व्‍यवस्‍थाओं से अलग करने का निर्णय लिया है। इससे नियामक ढांचे में हितों के टकराव की मुख्‍य समस्‍या से बचाव में मदद मिलेगी।

गृह मंत्री ने कहा कि कुल मिलाकर सारे प्रयासों का उद्देश्‍य सुरक्षा उपायों में एकरूपता लाकर पूरी दुनिया में सुरक्षा व्‍यवस्‍था को पुख्‍ता बनाना है।

इस अवसर पर केन्‍द्रीय गृह राज्‍य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर, सीआईएसएफ के महानिदेशक राजेश रंजन और अन्‍य गण्‍यमान्‍य व्‍यक्ति भी उपस्थित थे।

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