दुर्गापूजा समितियों को सरकारी अनुदान पर रोक की मियाद बढ़ी



---रंजीत लुधियानवी, 09 अक्टूबर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य की 28 हजार दुर्गापूजा समितियों को मिलने वाले सरकारी अनुदान पर रोक की मियाद गुरुवार तक बढ़ा दी है। मंगलवार को इस मुद्दे की सुनवाई के बाद अदालत ने यह फैसला किया। आज सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठा कि यह मामला अदालत में स्वीकार करने लायक है या नहीं? अदालत इस सवाल पर बुधवार को फैसला करेगी।

ध्यान रहे कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 28 हजार पूजा समितियों को 10-10 हजार रुपए का अनुदान देने का एलान किया था। लेकिन इसके खिलाफ दायर एक जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने बीते शुक्रवार को इस पर रोक लगा दी थी। मंगलवार को सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश देवाशीष करगुप्ता ने सवाल किया कि आखिर किस मानदंड के आधार पर 28 हजार पूजा समितियों को आर्थिक अनुदान देने का फैसला किया गया? इसके जवाब में राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ने दलील दी कि यह तय करने का अधिकार सरकार के पास है कि अनुदान किसे मिलेगा। अदालत इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। इस पर न्यायमूर्ति ने जानना चाहा कि अनुदान बांटने के मामले में कोई लीकेज हो रहा है या नहीं? उन्होंने बताया कि अदालत लीकेज को बंद करना चाहती है।

इसके बाद याचिकाकर्ता के वकील विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा कि पूजा के लिए यह अनुदान असंवैधानिक है। इसकी वजह यह है कि अदालत इससे पहले इमामों के भत्ते को भी असंवैधानिक करार दे चुकी है। इसके बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने रोक की मियाद गुरुवार तक बढ़ाने का फैसला किया। पहले यह रोक मंगलवार यानी आज तक थी। अदालत ने साफ कर दिया है कि मामले का निपटारा नहीं होने तक किसी भी पूजा समिति को अनुदान नहीं दिया जा सकता।


॥■॥ यहां मुसलमान करते हैं दुर्गापूजा

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने महालया के दिन पूजा उद्घाटन पर्व की शुरुआत करते हुए कहा कि बंगाल में सभी धर्म के त्योहार एक जैसे उत्साह के साथ मनाए जाते हैं, यहां हिंदु, मुसलमान, सिख, ईसाई के तौर पर नहीं देशवासी के तौर पर लोग त्योहारों को मनाते हैं। एक समुदाय के त्योहार में दूसरे समुदाय के लोग बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। बंगाल में ईद, होली, दीवाली हो बड़ा दिन समारोह हो या सिख धर्म के गुरूपर्व मुख्यमंत्री की कही बातों को प्रत्यक्ष तौर पर देखा और महसूस किया जा सकता है।

बंगाल में सभी धर्म के लोग दूसरे धर्म के लोगों के साथ मिलकर त्योहार तो मनाते ही हैं, इसमें दुर्गापूजा भी शामिल है। लेकिन कोलकाता के मुंशीगंज इलाके में इस उत्सव को मनाने के लिए हिंदू और मुस्लिम साथ आकर सारी तैयारियां करते हैं और पूजा से जुड़ी जिम्मेदारियां आपस में बांट लेते हैं। यहां के लोगों का कहना है कि यह पूजा तो आम तौर से मुसलमान ही करते हैं, हिंदू तो महज पूजा में उनकी मदद करते हैं।

इन दिनों आप अगर इस इलाके में प्रवेश करेंगे तब तो आपको दूर से ही कोहिनूर बीबी दुर्गा पूजा की तैयारियों को देखती हुई नजर आ जाएंगी। ऐसा इसलिए क्योंकि उनकी दोस्त पुष्पा देवी अकसर कुछ न कुछ भूल जाती हैं। मुंशीगंज की यह दुर्गा पूजा जहांगीर पूजा के नाम से विख्यात है। इस पूजा की शुरूआत शेख जहांगीर ने की थी, तभी से इसका यह नाम पड़ा। जहां मूर्तियों को बनाने की जिम्मेदारी राम पाल पर है। तो जल से भरे कलश को लाने की जिम्मेदारी मोहम्मद अब्दुल रहीम के कंधों पर हैं। रहीम जब तक कलश नहीं लाते, पूजा नहीं शुरू होती। वहीं बलवंत सिंह पूरी व्यवस्था देखने वाली टीम के सदस्य हैं।

यह पूजा बाकी सब जगहों से कई मायनों में अलग है। यहां प्रसाद बनाने की जिम्मेदारी हो या देवी पर चढ़ने वाले फल और फूलों की व्यवस्था करनी हो, यह सारे काम मुस्लिम करते हैं। पूजा समिति के एक सदस्य विकास राय के मुताबिक यह कहना गलत नहीं होगा कि यहां दुर्गा पूजा पूरी तरह मुस्लिम ही आयोजित करते हैं, हम तो बस उनकी मदद करते हैं। सिर्फ हिंदू और मुस्लिम नहीं, बल्कि इलाके की सेक्स वर्कर्स भी आकर पूजा में हिस्सा लेती हैं। इस बारे में पूछे जाने पर पूजा कमेटी के आयोजक कहते हैं कि हम बिना किसी सामाजिक और धार्मिक भेदभाव के साथ में यह उत्सव मनाने में विश्वास रखते हैं। लोगों का कहना है कि मकसद देवी की आराधना करने का है, यहां किसी तरह के बेड़ियों की जकड़न नहीं है। ऐसे में लोग खुले मन के साथ पूजा में शामिल होते हैं।

Big on Hosting. Unlimited Space & Unlimited Bandwidth

कार्टून
इ-पत्रिका इंडिया इनसाइड
इ-पत्रिका फैशन वर्ल्ड
Newsletter
राष्ट्रीय विशेष