राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग ने मोती नगर सीवर संयंत्र दुर्घटना के पीड़ितों को 10 लाख रुपये मुआवजा देने के लिए जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया



नई दिल्ली, 12 सितम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग ने 10 सितंबर, 2018 को मौके का दौरा किया, जहां नई दिल्ली के मोतीनगर स्थित एक सीवर उपचार संयंत्र की सफाई के दौरान 4 लोग मारे गये थे। इस दल में निम्न अधिकारी भी सम्मलित हुए-

मुख्य सचिव, दिल्ली सरकार
जिला मजिस्ट्रेट, पश्चिम जिला
डीसीपी एवं अन्य पुलिस अधिकारी, पश्चिम जिला
नगर निगम अधिकारी (पश्चिम जोन)
दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारी

मौके पर डीएलएफ के प्रतिनिधियों ने बताया कि सीवर उपचार संयंत्र का रखरखाव जेएलएल करता है जो सेवा प्रदाता फर्म है। उन्होंने आश्वस्त किया कि जेएलएल पीड़ित परिवारों की मदद के लिए सभी उपाय करेगी।

उप-पुलिस आयुक्त (पश्चिम) ने कहा कि धारा 304ए के तहत मोतीनगर पुलिस स्टेशन पर एफआईआर दायर कर दी गयी है और मौतों के जिम्मेदार लोगों की निशानदेही की प्रक्रिया चल रही है। चारों मृतकों की पहचान उमेश, राजा, पंकज और सरफराज के रूप में हुई है। चौथे मजदूर विशाल को राममनोहर लोहिया अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया गया है। सभी पीड़ित 22 से 30 वर्ष की आयु के बीच के थे। दो लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था और दो लोग अस्पताल लाने के बाद मृत घोषित किए गए थे।

चर्चा के आधार पर आयोग को पता लगा कि डीएलएफ कैपिटल ग्रीन्स के सीवर उपचार संयंत्र की सफाई सुरक्षा उपकरण, निगरानी दल, डॉक्टर सहित ऐम्बुलेंस इत्यादि के बिना शुरू की गयी थी, जो “दि प्रोहीबिशन ऑफ एंप्लॉयमेंट ऐस मैनुअल स्कैवेंजर्स एंड देयर रीहेबिलिटेशन एक्ट, 2013” के प्रावधानों का और 27 मार्च, 2014 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का खुला उल्लंघन है।

अत: “दि प्रोहीबिशन ऑफ एंप्लॉयमेंट ऐस मैनुअल स्कैवेंजर्स एंड देयर रीहेबिलिटेशन एक्ट, 2013” के प्रावधानों और भारतीय दंड संहिता की प्रासंगिक धाराओं के तहत डीएलएफ, जेएलएल, उन्नति एजेंसी के खिलाफ लाफरवाही के कारण मौत का मुकदमा दायर किया जा सकता है तथा दोषियों को गिरफ्तार किया जा सकता है।

आयोग ने पाया कि यह कोई अकेली दुर्घटना नहीं है और शहर में पहले भी ऐसी घटनाऐं हो चुकी हैं। इसलिए इस मामले को संबंधित विभागों के समक्ष उठाया जाएगा, ताकि दिल्ली में सीवर संबंधी मौतों की रोकथाम हो तथा अधिनियम का उल्लंघन करने वाली एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई हो।

एनसीएसके के अध्यक्ष ने निम्न विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिये-

• पश्चिम जिले के जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया गया कि पीड़ितों के आश्रित परिजनों को फौरन 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाये।

• आयोग ने संबंधित विभागों को तथ्य रिपोर्ट पेश करने को कहा।

याद रहे कि रविवार (9 सितंबर, 2018) को मोती नगर, पश्चिम जिला, नई दिल्ली स्थित एक सीवर उपचार संयंत्र की सफाई के दौरान 4 लोगों की मृत्यु हो गयी थी और एक बुरी तरह घायल हुआ था। यह दुर्घटना लगभग साढ़े 3 बजे हुई थी, जब मोतीनगर के आवासीय परिसर डीएलएफ कैपिटल ग्रीन्स के गहरे सीवर उपचार संयंत्र में पांच लोग सफाई के लिए उतरे थे।

राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग “दि प्रोहीबिशन ऑफ एंप्लॉयमेंट ऐस मैनुअल स्कैवेंजर्स एंड देयर रीहेबिलिटेशन एक्ट, 2013” के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए अधिकृत है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने सफाई कर्मचारी आंदोलन बनाम भारत सरकार नामक याचिका संख्या 583/2003 में निर्णय दिया था कि सीवर/सेप्टिक टैंक संबंधी मौतों के लिए आश्रित परिजनों को 10 लाख रुपये के मुआवजे का भुगतान किया जाए।

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