खबरें विशेष : मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी



नई दिल्ली, 12 सितम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

॥■॥ मंत्रिमंडल ने नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ डिजाइन (एनआईडी) एक्‍ट, 2014 में संशोधन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ डिजाइन (एनआईडी) एक्‍ट, 2014 के दायरे में चार संस्‍थानों-नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अमरावती/विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश; नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ डिजाइन, भोपाल, मध्‍य प्रदेश; नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ डिजाइन जोरहाट, असमऔर नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ डिजाइन, कुरूक्षेत्र, हरियाणा – को लाने और उन्‍हें नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद की तरह इंस्‍टीट्यूशंस ऑफ नेशनल इम्‍पोर्टेंस (आईएनआई) यानी राष्‍ट्रीय महत्‍व के संस्‍थान घोषित करने के लिए एनआईडी एक्‍ट 2014 में संशोधन के लिए संसद में एक विधेयक लाने को मंजूरी दी है। इस अधिनियम के लिए प्रस्‍तावित संशोधनों में एनआईडी विजयवाड़ा का बदलकर एनआईडी अमरावती करना शामिल है। साथ ही, इस विधेयक में प्रिंसिपल डिजाइनर के पद को प्रोफेसर के समतुल्‍य करने का भी प्रस्‍ताव है।

देश के विभिन्‍न क्षेत्रों में नए नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ डिजाइन की स्‍थापना इंस्‍टीट्यूशंस ऑफ नेशनल इम्‍पोर्टेंस की तरह किए जाने से डिजाइन के क्षेत्र में अत्‍यधिक कुशल श्रमबल तैयार करने में मदद मिलेगी। इससे शिल्‍प, हथकरघा, ग्रामीण तकनीक, लघु, मझोले एवं बड़े उद्यमों के लिए स्‍थायी डिजाइन संसाधन उपलब्‍ध कराते हुए प्रत्‍यक्ष और अप्रत्‍यक्ष तौर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। साथ ही, इससे क्षमता, दक्षता एवं संस्‍थान निर्माण के लिए विभिन्‍न कार्यक्रमों को भी बल मिलेगा।


॥■॥ मंत्रिमंडल ने तेल एवं गैस के लिए इनहेन्‍स्‍ड रिकवरी व्‍यवस्‍था को प्रोत्‍साहित करने के लिए नीतिगत ढांचे को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने तेल एवं गैस के घरेलू उत्‍पादन को बढ़ावा देने के लिए मौजूदा हाइड्रोकार्बन भंडारों से रिकवरी में सुधार के लिए इनहेन्‍स्‍ड रिकवरी (ईआर)/इम्‍प्रूव्‍ड रिकवरी (आईआर)/गैर-पांरपरिक हाइड्रोकार्बन (यूएचसी) के उत्‍पादन तरीके/तकनीक को बेहतर बनाने के लिए नीतिगत ढांचे को मंजूरी दी है। ईआर में इनहेन्‍स्‍ड ऑयल रिकवरी (ईओआर) और इनहेन्‍स्‍ड गैस रिकवरी (ईजीआर) शामिल हैं। गैर-पांरपरिक हाइड्रोकार्बन (यूएचसी) उत्‍पादन तरीके/तकनीक में शेल ऑयल एवं गैस उत्‍पादन, टाइट ऑयल एवं गैस, शेल, गैस हाइड्रेट्स एवं भारी तेल से उत्‍पादन शमिल हैं। इनहेन्‍स्‍ड रिकवरी, इम्‍प्रूव्‍ड रिकवरी और गैर पांरपारिक हाइड्रोकार्बन उत्‍पादन के लिए अत्‍यधिक पूंजी और जटिल प्रौद्योगिकी की आवश्‍यकता होती है। इसलिए यह काफी चुनौतीपूर्ण होता है। इसके लिए सहायक बुनियादी ढांचा स्‍थापित करने, लॉजिस्टिक सहायता, राजको‍षीय प्रोत्‍साहन और अनुकूल माहौल तैयार करने की जरूरत होती है।

इस नीति का रणनीतिक उद्देश्‍य अकादमिक एवं अनुसंधान संस्‍थानों, उद्योग एवं शैक्षणिक संस्‍थानों के बीच बेहतर तालमेल के जरिए अनुकूल माहौल तैयार करना, उत्‍खनन एवं उत्‍पादन (ईएंडपी) ठेकेदारों को ईआर/आईआर/यूएचसी व्‍यवस्‍था/तकनीक के इस्‍तेमाल के लिए मदद एवं प्रोत्‍साहित करना है। यह नीति सभी अनुबंध प्रणालियों एवं नामांकित क्षेत्रों पर लागू होगी। इस नीतिगत पहल से नए निवेश को बढ़ावा मिलने, आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने और अतिरिक्‍त रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्‍मीद है। इस नीति से नई, नवोन्‍मेषी एवं अत्‍याधुनिक प्रौद्योगिकी के इस्‍तेमाल और तकनीक संबंधी गठबंधन को बढ़ावा मिलेगा जिससे मौजूदा क्षेत्रों की उत्‍पादकता में सुधार होगा।

इस नीति के तहत ईआर परियोजनाओं की लागत पर जोखिम घटाने के लिए ईआर क्षमता, उचित ईआर तकनीक का आकलन एवं राजको‍षीय प्रोत्‍साहन के आधार पर प्रत्‍येक क्षेत्र के व्‍यवस्थित आकलन की परिकल्‍पना की गई है ताकि निवेश को वित्‍तीय तौर पर व्‍यावहारिक बनाया जा सके। इस नीति की प्रमुख विशेषताओं में सरकार प्राधिकृत संस्‍थानों के जरिए क्षेत्रों की अनिवार्य जांच परख सुनिश्चित करना और वाणिज्यिक स्‍तर पर ईआर परियोजनाओं के कार्यान्‍वयन से इसे पायलट आधार पर लागू करना शामिल हैं। इन्‍हेन्‍स्‍ड रिकवरी (ईआर) समिति, जिसमें पेट्रोलियम एंव प्राकृतिक गैस मंत्रालय और हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय के प्रतिनिधि, शिक्षा एवं उत्‍खनन क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हैं, इस नीति को लागू और निगरानी करेगी। यह नीति अधिसूचना की तिथि से अगले 10 वर्षों की अवधि के लिए प्रभावी रहेगी। हालां‍कि राजकोषीय प्रोत्‍साहन ईआर/यूएचसी परियोजनाओं में उत्‍पादन शुरू होने की तिथि से 120 महीने की अवधि के लिए उपलब्‍ध रहेगा। आईआर परियोजना के मामले में प्रोत्‍साहन निर्धारित बेंचमार्क हासिल करने की तिथि से उपलब्‍ध रहेगा। इस नीति के तहत विभिन्‍न प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है। निर्धारित कुंओं में ईआर तकनीक लागू किए जाने से हुए अतिरिक्‍त उत्‍पादन पर उपकर/रॉयल्‍टी में आंशिक छूट के रूप में राजकोषीय प्रोत्‍साहन दिया गया है।

पुराने तेल कुओं में बेहतर प्रौद्योगिकी के इस्‍तेमाल से हाइड्रोकार्बन उत्‍पादन में तेजी लाई जा सकती है। इससे मूल तेल उत्‍पादन में 5 प्रतिशत की वृद्धि दर से अगले 20 वर्षों में 120 एमएमटी अतिरिक्‍त तेल उत्‍पादन की परिकल्‍पना की गई है। गैस के मामले में मूल उत्‍पादन में 3 प्रतिशत की वृद्धि दर से अगले 20 वर्षों के दौरान 52 बीसीएम अतिरिक्‍त गैस उत्‍पादन की परिकल्‍पना की गई है।


॥■॥ मंत्रिमंडल ने उपग्रह एवं प्रक्षेपण यान के लिए टेलीमैट्री एवं टेलीकमांड स्‍टेशन के परिचालन और अंतरिक्ष अनुसंधान, विज्ञान एवं अनुप्रयोग में सहयोग पर भारत और ब्रुनेई दारुस्‍सलाम के बीच एमओयू को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने उपग्रह एवं प्रक्षेपण यान के लिए टेलीमैट्री एवं टेलीकमांड स्‍टेशन के परिचालन और अंतरिक्ष अनुसंधान, विज्ञान एवं अनुप्रयोग में सहयोग पर भारत और ब्रुनेई दारुस्‍सलाम के बीच सहमति ज्ञापन (एमओयू) को मंजूरी दी है। इस एमओयू पर 19 जुलाई, 2018 को नई दिल्‍ली में हस्‍ताक्षर किए गये थे।

• लाभ:

इस एमओयू से भारत को अपने अंतरिक्ष मिशन एवं प्रक्षेपण यान के लिए ग्राउंड स्‍टेशन का परिचालन जारी रखने, रखरखाव और उसे बेहतर बनाने के लिए काम जारी रखने में मदद मिलेगी। साथ ही इससे भारत को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों पर ब्रुनेई दारुस्‍सलाम के अधिकारियों एवं छात्रों के प्रशिक्षण के जरिए अंतरिक्ष संबंधी गतिविधियों में अपनी विशेषज्ञता एवं अनुभव को साझा करने में मदद मिलेगी।

इस एमओयू के तहत ब्रुनेई दारुस्‍सलाम के साथ सहयोग से भारत के अंतरिक्ष मिशन एवं प्रक्षेपण यान की मदद के लिए भारतीय ग्राउंड स्‍टेशन के परिचालन, रखरखाव एवं उन्‍नयन में मदद मिलेगी। इस प्रकार इससे देश के सभी क्षेत्रों और तबकों को फायदा होगा।

इस एमओयू से अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों के क्षेत्र में प्रशिक्षण एवं ग्राउंड स्‍टेशन के परिचालन में नई अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।


॥■॥ मंत्रिमंडल ने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में सहयोग पर भारत और मिस्र के बीच एमओयू को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में सहयोग के लिए भारत और मिस्र के बीच सहमति ज्ञापन (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर को मंजूरी दे दी है।

इस एमओयू के तहत सहयोग के क्षेत्रों में फसल (विशेष तौर पर गेहूं और मक्‍का), कृषि जैव प्रौद्योगिकी, नेनो टेक्‍नोलॉजी, जल संरक्षण एवं सूक्ष्‍म सिंचाई प्रौद्यागिकी सहित सिंचाई एवं जल प्रबंधन तकनीक, ऊर्जा उत्‍पादन के लिए कृषि अपशिष्‍ट प्रबंधन, खाद्य संरक्षण, सुरक्षा एवं गुणवत्‍ता, बागवानी, जैविक कृषि, पशुपालन डेरी, मत्‍स्‍य पालन, चारा उत्‍पादन, कृषि उत्‍पाद एवं मूल्‍यवर्धन, पादप एवं पशु उत्‍पादों के व्‍यापार से संबंधित स्‍वच्‍छता मामलों, कृषि औजारों एवं उपकरणों, कृषि कारोबार एवं विपणन, कटाई से पहले और बाद की प्रक्रियाओं, खाद्य प्रौद्योगिकी एवं प्रसंस्‍करण, कृषि में एकीकृत कीट प्रबंधन, कृ‍षि विस्‍तार एवं ग्रामीण विकास, कृषि व्‍यापार एवं निवेश, बौद्धिक संपदा अधिकारसंबंधी मुद्दों, बीज के क्षेत्र में तकनीकी ज्ञान एवं मानव संसाधन और पारस्‍परिक हित वाले अन्‍य सहमति के मुद्दे शामिल हैं।

शोध वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञों के आदान-प्रदान, कृषि संबंधी सूचनाओं एवं विज्ञान संबंधी प्रकाशनों (पत्र-पत्रिकाओं, पुस्‍तकों, बुलेटिन, कृषि एवं सहायक क्षेत्र के सांख्यिकीय आंकड़े), जर्मप्‍लाज्‍म एवं कृषि प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान और सेमीनारों, कार्यशालाओं एवं अन्‍य गतिविधियों के जरिए सहयोग को प्रभावी बनाया जाएगा।

इस एमओयू के तहत एक संयुक्‍त कार्य समूह (जेडब्‍ल्‍यूजी) का गठन किया जाएगा ताकि द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत सहित पारपरिक हित वाले अन्‍य मुद्दों पर सहयोग को बेहतर किया जा सके। शुरूआती दो वर्षों के दौरान संयुक्‍त कार्य समूह की बैठक कम से कम साल में एक बार (भारत और मिस्र में) जरूर होगी। इसके तहत संयुक्‍त कार्य के लिए कार्यक्रम तैयार करने, सुविधा एवं परामर्श मुहैया कराने और खास मुद्दों के संदर्भ में अतिरिक्‍त सहयोग आदि मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।


॥■॥ मंत्रिमंडल ने ब्रिक्‍स इंटरबैंक कोऑपरेशन मेकेनिज्‍म के तहत एग्जिम बैंक द्वारा डिजिटल अर्थव्‍यवस्‍था के विकास के संदर्भ में डिस्‍ट्रीब्‍यूटेड लेजर एंड ब्‍लॉक चेन टेक्‍नोलॉजी पर कोलाब्रेटिव रिसर्च के लिए एमओयू को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल नेब्रिक्‍स इंटरबैंक कोऑपरेशन मेकेनिज्‍म के तहत भारत के आयात-निर्यात बैंक (एग्जिम बैंक) द्वारा डिजिटल अर्थव्‍यवस्‍था के विकास के संदर्भ में डिस्‍ट्रीब्‍यूटेड लेजर एंड ब्‍लॉक चेन टेक्‍नोलॉजी पर कोलाब्रेटिव रिसर्च के लिए एमओयू के लिए सहमति ज्ञापन (एमओयू) को पूर्वव्‍यापी मंजूरी दी है। इसके सहयोगी सदस्‍या बैंकों में बैंको नेश्‍योनल डे डेशेनवोल्विमेंटोइकोनॉमिको ई सोशल (बीएनडीईएस, ब्राजील), चाइना डेवलपमेंट बैंक (सीडीबी), स्‍टेट कोआपरेशन बैंक फॉर डेवलपमेंट एंड फॉरेन इकनॉमिक अफेयर्स (वेंशेकोनेम्‍बैंक, रूस) और डेवलपमेंट बैंक ऑफ साउदर्नअफ्रीका (डीबीएसए) शामिल हैं।

• प्रमुख प्रभाव:

डिस्‍ट्रीब्‍यूटेड लेजर एंड ब्‍लॉक चेन टेक्‍नोलॉजी में ब्रिक्स देशों के वित्‍तीय क्षेत्र में मौजूद तमाम चुनौतियों का समाधान मिलने की संभावना है। इस एमओयू का उद्देश्‍य उन संबद्ध कारोबारी परिचालन के क्षेत्र में संयुक्‍त अनुसंधान प्रयासों के जरिए डिस्‍ट्रीब्‍यूटेड लेजर एंड ब्‍लॉक चेन टेक्‍नोलॉजीकी बेहतर समझ हासिल करना है जहां परिचालन कुशलता बढ़ाने के उद्देश्‍य से इसके अनुप्रयोग की संभावना है।

• पृष्‍ठभूमि:

ब्रिक्‍स नेताओं द्वारा डिजिटल अर्थव्‍यवस्‍था पर चीन में हस्‍ताक्षरित श्‍यामेन घोषणा-पत्र के तहत डिजिटल अर्थव्‍यवस्‍था के महत्‍व को उजागर किया गया था। साथ ही उसमें बताया गया था कि ब्रिक्‍स देश किस प्रकार इस गतिशील डिजिटल अर्थव्‍यवस्‍था से फायदा उठा सकता है जिससे उसकी पहुँच वैश्विक आर्थिक विकास तक सुनिश्चित हो और उसका फायदा सभी को मिल सके। उसी संदर्भ में डिस्‍ट्रीब्‍यूटेड लेजर एंड ब्‍लॉक चेन टेक्‍नोलॉजी पर कोलाब्रेटिव रिसर्च के लिए सहमति ज्ञापन (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर किए गए हैं।


॥■॥ मंत्रिमंडल नेइथनॉल आपूर्ति वर्ष 2018-19 के लिए इथनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम के अंतर्गत बी भारी शीरा/आंशिक गन्ना रस और 100 प्रतिशत गन्ना रस से बने इथनॉल के मूल्य निर्धारण/संशोधन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने आगामी गन्ना सत्र 2018-19 के लिए बी भारी शीरा/आंशिक गन्ना रस से बने इथनॉल की कीमत में संशोधन/निर्धारण तथा 100 प्रतिशत गन्ना रस से तैयार इथनॉल की ऊंची कीमत तय करने की मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी इथनॉल आपूर्ति वर्ष 1 दिसंबर, 2018 से 30 नवंबर, 2019 के लिए इस प्रकार है-

बी भारी शीरा/आंशिक गन्ना रस से निकाले गए इथनॉल की मिल कीमत 52.43 रुपये प्रति लीटर निर्धारित (वर्तमान मूल्य 47.13 रुपये प्रति लीटर) करना।
इथनॉल उत्पादन के लिए 100 प्रतिशत गन्ना रस देने वाली और चीनी बनाने का कार्य नहीं करने वाली मिलों के लिए 100 प्रतिशत गन्ना रस से तैयार इथनॉल का मिल मूल्य 59.13 रुपये प्रति लीटर (वर्तमान मूल्य 47.13 रूपये प्रति लीटर) तय करना। इसके अतिरिक्त जीएसटी तथा परिवहन शुल्क देय होंगे। तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को वास्ताविक परिवहन शुल्क निर्धारित करने की सलाह दी गई है ताकि लंबी दूरी का इथनॉल का परिवहन कार्य हतोत्साहित न हो।
ओएमसी को (1) 100 प्रतिशत गन्ना रस से तैयार इथनॉल (2) बी भारी शीरा/आंशिक गन्ना रस (3) सी भारी शीरा तथा (4) क्षतिग्रस्त अनाज/अन्य स्रोत को क्रमानुसार प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।

• प्रभावः

इस निर्णय से विभिन्न कार्यों के लिए गन्ने की अधिक खपत में कमी आएगी, किसानों के बकाया गन्ना मूल्य चुकाने के लिए मिलों की तरलता बढ़ेगी और इथनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम क लिए अधिक इथनॉल उपलब्ध होगा।
सभी डिस्टिलरी योजना का लाभ उठा सकेंगी और बड़ी संख्या में डिस्टिलरी ईबीपी कार्यक्रम के लिए इथनॉल आपूर्ति करेंगी। इथनॉल आपूर्तिकर्ताओं को समर्थन मिलने से गन्ना किसानों के बकाये में कमी आएगी और इस प्रक्रिया में गन्ना किसानों की कठिनाईयां कम होंगी।
बी भारी शीरा/आंशिक गन्ना रस तथ 100 प्रतिशत गन्ना रस से तैयार इथनॉल की खरीद के लिए ऊंचे मूल्य पेश किए जाने के कारण ईबीपी कार्यक्रम के लिए इथनॉल की उपलब्धता पहली बार बढ़ेगी।
पेट्रोल में इथनॉल मिलाने के अनेक लाभ हैं। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी, कृषि क्षेत्र को समर्थन मिलेगा, पर्यावरण अनुकूल ईंधन उपलब्ध होगा, प्रदूषण में कमी आएगी और किसानों को अतिरिक्त आय होगी।

• पृष्ठभूमिः

सरकार ने पायलट आधार पर 2003 में इथनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम लांच किया था जिसे बाद में अधिसूचित 21 राज्यों और 4 केन्द्र शासित प्रदेशों तक बढ़ाया गया ताकि वैकल्पिक तथा पर्यावरण अनुकूल ईंधनों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा सके। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए आयात निर्भरता में कमी लाना और कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देना है।

सरकार ने 2014 से इथनॉल के प्राशसिक मूल्य को अधिसूचित किया है। इस निर्णय से पिछले चार वर्षों में इथनॉल की आपूर्ति में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों द्वारा इथनॉल आपूर्ति वर्ष 2013-14 में 38 करोड़ लीटर इथनॉल की खरीद की गई। यह खरीद 2017-18 में 140 करोड़ लीटर हो गई।

निरंतर रूप से गन्ने का अधिक उत्पादन होने के कारण गन्ने का भाव कम हो रहा है। परिणामस्वरूप गन्ना किसानों की बकाया राशि बढ़ रही है क्योंकि गन्ना किसानों को भुगतान करने की क्षमता उपयोग में कम है। सरकार ने गन्ना किसानों की बकाया राशि में कमी लाने के लिए अनेक निर्णय लिए हैं।

देश में गन्ना उत्पादन सीमित करने के उद्देश्य से सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। इनमें इथनॉल उत्पादन के लिए बी भारी शीरा/गन्ना रस लगाने की अनुमति शामिल हैं। पहले के अनुमानित मूल्य से गन्ने का मिल मूल्य बढ़ने के कारण बी भारी शीरा/आंशिक गन्ना रस तथा 100 प्रतिशत गन्ना रस के मूल्यों में संशोधन की आवश्यकता है।

यह ध्यान देने की बात है कि सी भारी शीरा से तैयार इथनॉल की तुलना में बी भारी शीरे को अपनाने गन्ने में 20 प्रतिशत की कमी आती है और लगभग 100 प्रतिशत इथनॉल उपलब्धता बढ़ती है। दूसरी ओर गन्ना रस से तैयार इथनॉल से गन्ने में 100 प्रतिशत की कमी आती है और लगभग 600 प्रतिशत इथनॉल उपलब्धता बढ़ती है।


॥■॥ मंत्रिमंडल ने क्षमता विकास योजना को 2017-18 से 2019-20 तक जारी रखने की स्वीकृति दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने क्षमता विकास योजना को 2,250 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ 2017-18 से 2019-20 की अवधि तक जारी रखने को अपनी मंजूरी दे दी है।

क्षमता विकास योजना सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की जारी केन्द्रीय योजना है। इस योजना का उद्देश्य नीति निर्माताओं तथा लोगों के लिए विश्वसनीय और समय पर सरकारी सांख्यिकी उपलब्ध कराने के लिए संरचनात्मक, तकनीकी और मानव संसाधन को मजबूत बनाना है।

क्षमता विकास योजना के अंतर्गत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई), औद्योगिक उत्पादन सूचकाकं (आईआईपी), सांख्यिकीय वर्गीकरण, विभिन्न सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण कार्य करने, क्षमता सृजन तथा सांख्यिकी समन्वय को मजबूत बनाने और आईटी अवसंरचना में सुधार करने जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियांचलाई जा रही हैं। योजना के अंतर्गत अप्रैल, 2017 में सामयिक श्रम बल सर्वेक्षण तथा पूरे देश के लिए (शहरी और ग्रामीण क्षेत्र) श्रम डाटा एक त्रितकरण कार्य लांच किया गया।

क्षमता विकास योजना के अंतर्गत दो उप-योजनाएं हैं- यह हैं आर्थिक गणना और सांख्यिकीय मजबूती के लिए समर्थन (एसएसएस)। आर्थिक जनगणना के अंतर्गत समय-समय पर सभी गैर-कृषि प्रतिष्ठानों को सूचीबद्ध करने का काम किया जाता है जो विस्तृत सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण करने का आधार होता है। अंतिम (61) आर्थिक गणना जनवरी, 2013 से अप्रैल, 2014 तक की गई और अब भविष्य में सरकार का इरादा तीन वर्ष में एक बार सर्वेक्षण कराने का है। एसएसएस उप-योजना राज्य/उप-राज्य स्तर के सांख्यिकीय प्रणालियों/अवसंरचना मजबूत करने के लिए है ताकि मजबूत राष्ट्रीय प्रणाली विकसित करने में सहायता मिल सके। राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों के प्रस्ताव के विस्तृत परीक्षण के बाद राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को कोष जारी किए जाते है।

नियमित जारी गतिविधियों के अतिरिक्त सेक्टरों/क्षेत्रों के बेहतर सांख्यिकी कवरेज की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने क्षमता विकास योजना के अंतर्गत तीन नए सर्वेक्षण कराने का प्रस्ताव किया है। यह सर्वेक्षण हैं समय उपयोग सर्वेक्षण (टीयूएस), सेवा क्षेत्र उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण (एएसएसएसई) तथा शामिल नहीं किए गए क्षेत्र के उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण (एएसयूएसई)।


॥■॥ मंत्रिमंडल ने शांति पूर्ण उद्देश्यों के लिए बाह्य अंतरिक्ष की खोज और उपयोग के क्षेत्र में सहयोग पर भारत और दक्षिण अफ्रीका के बाच समझौता ज्ञापन को स्वीकृति दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल को शांतिपूर्ण उद्देश्यो के लिए बाह्य अंतरिक्ष की खोज और उपयोग में सहयोग पर भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच हुए समझौता ज्ञापन से अवगत कराया गया। इस समझौता ज्ञापन पर 26 जुलाई, 2018 को जोहान्सिबर्ग में हस्ताक्षर किए गए थे।

• प्रमुख विशेषताएं-

इस समझौता ज्ञापन के अंतर्गत सहयोग के निम्नलिखित क्षेत्र होंगेः

पृथ्वी का दूर संवेदन

बी) सेटेलाइट संचार तथा सेटेलाइट आधारित नैविगेशन

सी) अंतरिक्ष विज्ञान तथा ग्रहों की खोज

डी) अंतरिक्ष यान, लांच यान, अंतरिक्ष प्रणालियों और जमीनी प्रणालियों का उपयोग

ई) भू-स्थानिक उपायों और तकनीकों सहित अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का व्यवहारिक एप्लीकेशन

एफ) दोनों क्षेत्रों द्वारा निर्धारित किए जाने वाले सहयोग के अन्य क्षेत्र

इस समझौते ज्ञापन के अंतर्गत निम्नलिखित तरीके से सहयोग किया जाएगा।

1. परस्पर लाभ और हित की संयुक्त अंतरिक्ष परीयोजनाओं का नियोजन और क्रियान्वयन

2. समर्थनकारी अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए ग्राउंड स्टेशनों की स्थापना, संचालन तथा रख-रखाव

• सेटेलाइट डाटा प्रयोगों के परिणाम तथा वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी सूचना साझ करना

1. संयुक्त अनुसंधान और विकास गतिविधियां

2. सहयोग के कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए निर्धारित तकनीकी और वैज्ञानिक कर्मियों का आदान-प्रदान

3. अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी में क्षमता सृजन तथा सामाजिक उद्देश्यों के लिए अंतरिक्ष एप्लीकेशन कार्यक्रम

• संयुक्त गोष्ठियों, सम्मेलनों और वैज्ञानिकों बैठकों का आयोजन

• संबद्ध पक्षों के बीच पारस्परिक सहमति के आधार पर लिखित रूप में सहयोग के अतिरिक्त तरीकों का निर्धारण किया जाएगा।

• लाभः

समझौते ज्ञापन पर हस्ताक्षर से अंतरिक्ष विज्ञान प्रौद्योगिकी और पृथ्वी का दूर संवेदन, सेटेलाइट संचार तथा सेटेलाइट आधारित नैविगेशन, अंतरिक्ष विज्ञान तथा ग्रहों की खोज, अंतरिक्ष यान तथा अंतरिक्ष प्रणालियों और ग्राउंड प्रणालियों का उपयोग तथा अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी के एप्लीकेशन सहित अन्य एप्लीकेशनों के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं जारी रखने में मदद मिलेगी।


॥■॥ मंत्रिमंडल ने निम्नलिखित स्वीकृति दी मेसर्स राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्ट्रिलाइजर्स (आरसीएफ) की जमीन का मुंबई महानगरीय क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) को हस्तांतरण

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने पूर्व प्रभाव से निम्नलिखित मंजूरी दी हैः

1. मेसर्स राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्ट्रिलाइजर्स (आरसीएफ) की जमीन का मुंबई महानगरीय क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) को हस्तांतरण।

2. मेसर्स आरसीएफ की जमीन का ग्रेटर मुंबई महानगर पालिका (एमसीजीएम) को हस्तांतरण तथा

3. एमएमआरडीए/एससीजीएम को जमीन हस्तांतरण में प्राप्त/प्राप्ति योग्य हस्तांतरणीय विकास अधिकार (टीडीआर) प्रमाण पत्र की बिक्री।

• पृष्ठभूमिः

आरसीएफ भारत में सार्वजनिक क्षेत्र की उर्वरक और रसायन निर्माता कंपनी है। इसकी स्थापना 6 मार्च, 1978 को पुराने भारतीय उर्वरक लिमिटेड का पुनर्गठन करके की गई थी। अभी आरसीएफ की प्राधिकृत शेयर पूंजी 800 करोड़ रुपये है और कंपनी की प्रदत्त पूंजी 551.69 करोड़ रुपये है। कंपनी को 1997 में ‘मिनी रत्न’ का दर्जा दिया गया। एमएमआरडीए ने आरसीएफ की 48,849.74 वर्ग मीटर जमीन (8265 वर्ग मीटर ऋणभारमुक्त/मुक्त जमीन और 40584.74 वर्ग मीटर ऋणभारग्रस्त जमीन) का अधिग्रहण किया और ईस्टर्न फ्री वे-अनिक पंजरापोल लिंक रोड (एपीएलआर) पूरा किया और इसे सार्वजनिक उपयोग के लिए वर्ष 2014 में खोला। आरसीएफ ने अंतरिम राहत के रूप में एमएमआरडीए से 8265 वर्ग मीटर ऋणभारमुक्त/मुक्त जमीन के स्थान पर 16530 वर्ग मीटर का टीडीआर प्रमाण पत्र प्राप्त किया। 40584.74 वर्ग मीटर की ऋणग्रस्त जमीन की एवज में टीडीआर/मुआवजे के लिए आरसीएफ के दावे का निर्णय पंच द्वारा किया जा रहा है।

आरसीएफ लंबे समय से एमसीजीएम के मुंबई विकास योजना से आरसीएफ कॉलोनी की अंदुरुनी सड़कों को हटाने की मांग कर रही थी। बाद में आरसीएफ ने पारस्परिक सहमति की शर्तों पर मुआवजे के रूप में टीडीआर के बदले 16000 वर्ग मीटर जमीन (स्थान पर वास्ताविक पैमाइश के अधीन) 18.3 मीटर के डीपी रोड निर्माण के लिए देने पर सहमत हो गई।

एमसीजीएम ने विकास योजना में आरसीएफ की प्रस्तावित टाउनशिप के सामने सार्वजनिक सड़क चौड़ा करने के लिए 331.96 वर्ग मीटर को सुरक्षित दिखाया। एमसीजीएम के विकास नियंत्रण नियम, 1991 के अनुसार जमीन पर आरक्षण के मामले में एमसीजीएम की सड़क बाधा क्षेत्र के रूप में जमीन समर्पित करना अनिवार्य है।

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