खबरें विशेष : मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी/स्वीकृति



नई दिल्ली, 10 अगस्त 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

॥■॥ मंत्रिमंडल ने ‘भारत में अध्‍ययन करने वाले ओबीसी छात्रों के लिए मैट्रिक के बाद छात्रवृत्ति’ में संशोधन एवं उसे जारी रखने को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजना ‘भारत में अध्‍ययन करने वाले ओबीसी छात्रों के लिए मैट्रिक के बाद छात्रवृत्ति’ (पीएमएस-ओबीसी) में संशोधन एवं उसे जारी रखने के लिए अपनी मंजूरी दे दी है।

• विवरण:

योजनाओं के प्रभावी कार्यान्‍वयन एवं बेहतर निगरानी सुनिश्चित करने के लिए पीएमएस-ओबीसी योजना में संशोधन किया गया है जिसमें निम्‍नलिखित शामिल हैं :

• माता-पिता की वार्षिक आय को एक लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये किया जाएगा।
• 30 प्रतिशत आवंटित रकम छात्राओं के लिए रखी जाएगी जबकि 5 प्रतिशत रकम दिव्‍यांग छात्रों के लिए होगी।
• छात्रवत्ति रकम का वितरण आधार से जुड़े बैंक खातों के जरिए किया जाएगा।
• चूंकि यह योजना वित्‍त से संबंधित है, इसलिए केन्‍द्रीय सहायता राष्‍ट्रीय आवंटन के अनुसार जारी की जाएगी। रकम जारी करने के लिए राज्‍यों/केन्‍द्रशासित प्रदेशों पर दायित्‍व की अवधारणा लागू नहीं होगी।

इस योजना की अनुमानित लागत 3,085 करोड़ रुपये होगी।

• प्रभाव:

यह संशोधित योजना :

• बड़ी तादाद में उन पात्र एवं गरीब ओबीसी छात्रों पर लागू होगी जो उच्‍चत्‍तर अध्‍ययन जारी रखने में समर्थ होंगे।
• प्रभावी कार्यान्‍वयन सुनिश्चित करेगी, नकल पर लगाम लगाएगी और बेहतर निगरानी सुनिश्चित करेगी।

पृष्‍ठभूमि : ‘भारत में अध्‍ययन करने वाले ओबीसी छात्रों के लिए मैट्रिक के बाद छात्रवृत्ति’ (पीएमएस-ओबीसी) सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की प्रमुख योजना है जो 1998-99 से चल रही है। यह हर साल करीब 40 लाख ओबीसी छात्रों को दसवीं के बाद अध्‍ययन जारी रखने में मदद करती है।


॥■॥ मंत्रिमंडल ने बिहार के फुलौत में कोसी नदी पर 4-लेन के एक नये पुल के निर्माण को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने बिहार के फुलौत में 6.930 किलोमीटर लंबे 4-लेन वाले पुल के निर्माण के लिए परियोजना को मंजूरी दी है। सीसीईए ने बिहार में राष्‍ट्रीय राजमार्ग-106 के मौजूदा बीरपुर-बिहपुर खंड पर 106 किलोमीटर से 136 किलोमीटर तक ‘पेव्‍ड शोल्‍डर के साथ 2-लेन’ के उन्‍नयन एवं पुनर्वास के लिए 1478.40 करोड़ रुपये की लागत से डेक को भी मंजूरी दी है। इस परियोजना के लिए निर्माण अवधि 3 वर्ष है और इसे जून 2022 तक पूरी होने की उम्‍मीद है।

प्रभाव :

• राष्‍ट्रीय राजमार्ग 106 पर फुलौत और बिहपुर के बीच 10 किलोमीटर लंबा लिंक नादारद है और वह कोसी नदी के कटाव क्षेत्र में आता है। वर्तमान में फुलौत से बिहपुर जाने के लिए लगभग 72 किलोमीटर का सफर करना पड़ता है। इस परियोजना के तहत कोसी नदी पर 4-लेन वाले इस नये पुल के निर्माण होने पर फुलौत और बिहपुर के बीच की दूरी घटकर महज 12 किलोमीटर रह जाएगी।
• इस नये पुल से निर्माण अ‍वधि के दौरान करीब 2.19 लाख श्रम दिवस के लिए प्रत्‍यक्ष रोजगार सृजित होंगे।
• इस नये पुल के निर्माण से बिहार में राष्‍ट्रीय राजमार्ग 106 पर उदाकिशुनगंज और बिहपुर के बीच मौजूदा 30 किलोमीटर लम्‍बी खाई दूर हो जाएगी जो नेपाल/‍उत्‍तर बिहार/पूर्व-पश्चिम गलियारा (एनएच-57 से होते हुए) और दक्षिण बिहार/झारखंड/स्‍वर्ण चतुभुर्ज (एनएच-2 से होते हुए) के बीच संपर्क मुहैया कराएगी। इसके अलावा राष्‍ट्रीय राजमार्ग संख्‍या-31 की पूर्ण उपयोगिता सुनिश्चित होगी।
• वर्तमान में यह राष्‍ट्रीय राजमार्ग केवल एक लेन/मध्‍यवर्ती लेन के साथ खराब स्थिति में है। इसलिए इस राजमार्ग पर औसत गति 20 किलोमीटर प्रति घंटे से कम है। लेकिन इस राजमार्ग के ‘पेव्‍ड शोल्‍डर के साथ 2-लेन’ में उन्‍नयन एवं पुल के निर्माण से यातायात की गति बढ़कर करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटे हो जाएगी।


॥■॥ मंत्रिमंडल ने मूल्य समर्थन योजना के तहत किसानों से खरीदे जाने वाले दलहन को राज्यों को जारी करने को मंजूरी दी, जिसमें कल्याण योजनाओं के तहत 15 रुपये प्रति किलोग्राम की केन्द्रीय सब्सिडी शामिल है

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने मूल्य समर्थन योजना के तहत किसानों से खरीदे जाने वाले दलहन को राज्यों को जारी करने को मंजूरी दे दी है। इसे मूल्य समर्थन योजनाओं (पीएसएस) के तहत खरीदे जाने वाले दलहन के भंडार से विभिन्न कल्याण योजनाओं के लिए राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को कम दर पर जारी किया जाएगा।

• प्रभावः

इस निर्णय से राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश जन वितरण प्रणाली, मिड-डे मिल इत्यादि विभिन्न कल्याण योजनाओं में दलहन का इस्तेमाल करने में सक्षम होंगे। इसके अलावा गोदामों की भी उपलब्धता तैयार की जाएगी, जिसकी मूल्य समर्थन योजना के तहत खरीदी जाने वाली जिंसो के भंडारण के लिए आगामी खरीफ मौसम में आवश्यकता हो सकती है।

• विवरणः

इस स्वीकृत योजना के तहत राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश सरकारों को वर्तमान थोक बाजार मूल्य के मद्देनजर 15 रुपये प्रति किलोग्राम की कम दर के आधार पर 34.88 लाख मीट्रिक टन तूर, चना, मसूर, मूंग और उड़द दाल लेने का प्रस्ताव किया गया है, जो स्रोत राज्य के संबंध में पहले आओ पहले पाओ के आधार पर होगा। राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश सरकारें इस दलहन को मिड-डे मिल, जन वितरण प्रणाली, एकीकृत बाल विकास कार्यक्रम इत्यादि जैसी कल्याण योजनाओं में इस्तेमाल करेंगी। यह उपलब्धता 12 महीने की अवधि या 34.88 लाख मीट्रिक टन दलहन पूर्ण रूप से प्राप्त करने, जो भी पहले हो, के आधार पर होगी। सरकार इस योजना के कार्यान्वयन के लिए 5237 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

• पृष्ठभूमिः

पिछले दो वर्षों के दौरान देश में दलहन का अब तक का भारी उत्पादन हुआ है। मूल्य समर्थन योजना के तहत भारत सरकार ने खरीफ 2017 और रबी 2018 विपणन मौसम के दौरान दलहन की रिकॉर्ड खरीदारी की है। मूल्य समर्थन योजना के तहत दलहन की 45.43 लाख मीट्रिक टन की रिकॉर्ड खरीदारी की गई। आगामी खरीफ मौसम में दलहन का उत्पादन बेहतर होने की आशा है। न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी के मद्देनजर मूल्य समर्थन योजना के तहत अतिरिक्त खरीदारी की आवश्यकता होगी।


॥■॥ मंत्रिमंडल ने विदेश मंत्रालय के द्विभाषिया संवर्ग के लिए संयुक्‍त सचिव स्‍तर के दो पदों के सृजन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल समिति ने विदेश मंत्रालय के द्विभाषिया संवर्ग के लिए संयुक्‍त सचिव स्‍तर के दो पदों के सृजन को मंजूरी दे दी है।

इस निर्णय से द्विभाषिया संवर्ग की विशेषज्ञता को बढ़ाने में मदद मिलेगी और द्विभाषिया प्रशिक्षण की आवश्‍यकताएं पूरी होंगी।

पूरे विश्‍व में भारत सरकार का द्विपक्षीय और बहुपक्षीय आदान-प्रदान तेजी से बढ़ रहा है, इसलिए एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद इत्‍यादि की आवश्‍यकताओं में भी तेजी आ रही है। इस उपाय से इन आवश्‍यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।


॥■॥ मंत्रिमंडल ने केंद्रीय सूची में अन्‍य पिछड़ा वर्गों के उप-वर्ग निर्धारण के विषय की पड़ताल करने के लिए आयोग की अवधि को विस्‍तार देने की मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल ने केंद्रीय सूची में अन्‍य पिछड़ा वर्गों के उप-वर्ग निर्धारण के विषय की पड़ताल करने के लिए आयोग की अवधि को नवंबर, 2018 तक विस्‍तार देने की मंजूरी दे दी है।

आयोग ने हितधारकों के साथ गहन चर्चा की, जिनमें राज्‍य सरकार, राज्‍य पिछड़ा वर्ग आयोग, विभिन्‍न समुदायिक संगठन और विभिन्‍न पिछड़ा वर्ग से संबंधित आम लोग इत्‍यादि शामिल थे। आयोग ने दस्‍तावेज, उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों में दाखिल होने वाले अन्‍य पिछड़ा वर्गों का जातिवार विवरण तथा केंद्र सरकार के विभागों, केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों एवं वित्‍तीय संस्‍थानों में जातिवार भर्ती का रिकॉर्ड भी तलब किया।

विश्लेषित आंकड़ों से प्राप्‍त होने वाली सूचना के आधार पर आयोग ने कहा है कि रिपोर्ट और उप-वर्ग निर्धारण सूचियों को अंतिम रूप देने से पहले राज्‍यों तथा उनके पिछड़ा वर्ग आयोगों से बातचीत का दौर शुरू करना चाहिए।


॥■॥ मंत्रिमंडल ने भारत और कोरिया के बीच कारोबार‍ निदान सहयोग के लिए समझौता-ज्ञापन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल ने भारत और कोरिया के बीच कारोबार‍ निदान सहयोग के लिए समझौता-ज्ञापन को मंजूरी दे दी है।

कोरिया के राष्‍ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान जुलाई 2018 में समझौता-ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए गए थे।

इस समझौता-ज्ञापन से दोनों देशों के बीच एंटी-डम्पिंग, सब्सिडी, सम्‍वर्ती तथा सुरक्षा उपायों जैसे कारोबारी निदानों को प्रोत्‍साहन मिलेगा तथा इन उपायों से द्विपक्षीय व्‍यापार संबंध बढ़ेंगे।


॥■॥ मंत्रिमंडल ने भारत और इंडोनेशिया के बीच स्‍वास्‍थ्‍य सहयोग के लिए समझौता-ज्ञापन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल ने भारत और इंडोनेशिया के बीच स्‍वास्‍थ्‍य सहयोग के लिए समझौता-ज्ञापन को मंजूरी दे दी है।

समझौता-ज्ञापन में सहयोग के निम्‍नलिखित क्षेत्रों को शामिल किया गया है:-

• अनुसंधान एवं विकास, सक्रिय औषधि-विज्ञान घटक (एपीआई) और सूचना प्रौद्योगिकी आधारित मेडिकल उपकरण,
• मानव संसाधन विकास,
• स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं, और
• पारस्पिरिक रूप से स्‍वीकृत अन्‍य क्षेत्र।

सहयोग के विवरणों तथा समझौता-ज्ञापन के कार्यान्‍वयन की देख-रेख करने के लिए एक कार्य-समूह का गठन किया जाएगा।


॥■॥ मंत्रिमंडल ने भारत और दक्षि‍ण अफ्रीका के बीच डाक टिकट को संयुक्‍त रूप से जारी करने को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल को भारत-दक्षि‍ण अफ्रीका के बीच डाक टिकट को संयुक्‍त रूप से जारी करने के विषय में अवगत कराया गया। इसकी विषय-वस्‍तु ‘भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच रणनीतिक साझेदारी के बीस वर्ष’ है। संयुक्‍त टिकट को जून, 2018 में जारी किया गया था।

भारत-दक्षिण अफ्रीका के संयुक्‍त स्‍मारक डाक टिकट पर दीनदयाल उपाध्‍याय और दक्षिण अफ्रीका के ऑलिवर रेगिनॉर्ड टेम्‍बो के चित्र बने हैं। इस संबंध में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच मई, 2018 में एक समझौता-ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए गए थे।


॥■॥ मंत्रिमंडल ने राष्‍ट्रीय आपदा मोचन बल की चार अतिरिक्‍त बटालियन बनाने को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल समिति‍ ने राष्‍ट्रीय आपदा मोचन बल की चार अतिरिक्‍त बटालियन बनाने को मंजूरी दे दी है ताकि भारत में आपदा मोचन को मजबूती प्रदान की जा सके। इसकी अनुमानित लागत 637 करोड़ रुपए है।

विवरण:

• चार अतिरिक्‍त बटालियनों को बनाने का उद्देश्‍य देश के विशाल भौगोलिक क्षेत्र को ध्‍यान में रखते हुए आपदा मोचन के समय में कटौती करना है।

• इन चार बटालियनों को शुरूआत में भारत-तिब्‍बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में दो बटालियनों और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) तथा असम राइफल्‍स (एआर) में एक-एक बटालियन के रूप में तैयार किया जाएगा।

• बाद में, इन चारों बटालियनों को राष्‍ट्रीय आपदा मोचन बल बटालियनों में बदल दिया जाएगा। महत्‍वपूर्ण और संवेदनशील स्थिति को ध्‍यान में रखते हुए इन चारों बटालियनों को जम्‍मू एवं कश्‍मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्‍तराखंड तथा दिल्‍ली राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र में तैनात किया जाएगा।

पृष्‍ठभूमि:

राष्‍ट्रीय आपदा मोचन बल एक विशेषज्ञ दल है, जिसका गठन वर्ष 2006 में किया गया था। इसके गठन का उद्देश्‍य प्राकृतिक और मानवकृत आपदा या खतरे की स्थिति का सामना करने के लिए विशेष प्रयास करना है। इस समय बल में 12 बटालियन हैं, जो पूरे देश में रणनीतिक रूप से महत्‍वपूर्ण स्‍थानों पर तैनात हैं ताकि तुरंत प्रत्‍युत्‍तर दिया जा सके।


॥■॥ मंत्रिमंडल ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में सहयोग पर भारत और इंडोनेशिया के बीच

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में सहयोग पर भारत और इंडोनेशिया के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) को मंजूरी दी है।

इस एमओयू पर मई 2018 को नई दिल्‍ली में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पृथ्‍वी विज्ञान मंत्री डॉक्‍टर हर्षवर्धन ने और मई 2018 में जकार्ता में इंडोनेशिया की ओर से वहां के अनुसंधान, प्रौद्योगिकी एवं उच्‍च शिक्षा मंत्री श्री मोहम्‍मद नासिर ने हस्‍ताक्षर किए थे। इस एमओयू पर हस्‍ताक्षर होने से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध के लिए एक नया अध्‍याय खुलेगा। इससे दोनों पक्षों को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पारस्‍परिक हितों को साधने के लिए पूरक ताकत मिलेगी।

इस एमओयू का उद्देश्‍य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में समानता एवं पारस्‍परिक लाभ का आधार पर भारत और इंडोनेशिया के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। इसके हितधारकों में भारत और इंडोनेशिया के वैज्ञानिक संगठनों के शोधकर्ता, शिक्षा, आरएण्‍डडी प्रयोगशाला एवं कंपनियां शामिल हैं। तत्‍काल सहयोग के लिए पहचान किए गए संभावित क्षेत्रों में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, समुद्री विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, जीवन विज्ञान (जैव प्रौद्योगिकी, कृषि एवं जैव चिकित्‍सा विज्ञान), ऊर्जा अनुसंधान, जल प्रौद्योगिकी, आपदा प्रबंधन, आतंरिक्ष विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं एप्‍लीकेशन, जियोस्‍पेशियल इंफॉर्मेशन एवं अप्‍लाइड केमिस्‍ट्री शामिल हैं।


॥■॥ मंत्रिमंडल ने सनदी लेखा संस्‍थानों में सहयोग पर भारत और कनाडा के बीच एमओयू को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने इंस्‍टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) और चार्टर्ड प्रोफेशनल अकाउंटेंट्स ऑफ कनाडा (सीपीए कनाडा) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर को मंजूरी दे दी है।

विवरण :

मंत्रिमंडल ने यह मंजूरी 2011 में हस्‍ताक्षरित एमओयू की पूर्वव्‍यापी मंजूरी के संदर्भ में और भारत के आईसीएआई एवं कनाडा के सीपीए के बीच एमओयू पर हस्‍ताक्षर के लिए दी है। इस एमओयू के तहत पारस्‍परिक सदस्‍यता के लिए व्‍यवस्‍था की परिकल्‍पना की गई है जो विशिष्‍ट मानदंडों के साथ दोनों संस्‍थानों के संबंधित सदस्‍यों पर लागू होगी। इस एमओयू में परिभाषा, अधिगम में सहयोग और प्रवेश स्‍तर के चार्टर्ड अकाउंटेंट की पेशेवर गुणवत्‍ता, कौशल एवं दक्षता का मूल्‍यांकन शामिल है।

प्रभाव :

इसका उद्देश्‍य आईसीएआई के सदस्‍यों, छात्रों एवं उनके संस्‍थानों के व्‍यापक हित में पारस्‍परिक रूप से लाभकारी संबंध विकसित करना है। यह एमओयू आईसीएआई के सदस्‍यों को उनका पेशेवर दायरा बढ़ाने के लिए अवसर मुहैया कराएगा। साथ ही, आईसीएआई स्‍थानीय देशों के ब्रांड निर्माण को मजबूती देने वाले संस्‍थान के तौर पर उभरेगा। यह एमओयू आईसीएआई और सीपीए कनाडा के बीच एक मजबूत कार्य संबंध स्‍थापित करेगा।

लाभार्थी :

यह एमओयू अधिक से अधिक युवा भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट को सीपीए कनाडा से पेशेवर पदनाम को मान्‍यता हासिल करने के लिए प्रोत्‍साहित करेगा और उन्‍हें कनाडा में पेशेवर अवसर तलाशने में मदद करेगा। कई भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट कनाडा की कंपनियों में उच्‍च पद पर कार्यरत हैं और उन्‍हें सीपीए कनाडा से मान्‍यता प्राप्‍त है। कनाडा के उद्योग जगत को भारतीय प्रतिभा एवं कौशल में भरोसा है और वहां की कंपनियां उन्‍हें नियुक्‍त करने के लिए आगे बढ़ रही हैं।

कार्यान्‍यवन रणनीति एवं लक्ष्‍य :

यह एमओयू उन सदस्‍यों पर लागू होगा जिन्‍होंने आईसीएआई अथवा कनेडियन प्रोविंशियल सीपीए संस्‍थानों से आवश्‍यक पढ़ाई, परीक्षा एवं प्रायोगिक अनुभव प्राप्‍त करते हुए आईसीएआई अथवा कनेडियन प्रोविंशियल सीपीए संस्‍थानों से सदस्‍यता हासिल की है। यह समझौता उन व्‍यक्तियों पर स्‍वत: लागू नहीं होता जिन्‍होंने किसी तीसरे पक्ष के अन्‍य समझौते के तहत आईसीएआई अथवा कनेडियन प्रोविंशियल सीपीए संस्‍थानों से सदस्‍यता हासिल की है।

पृष्‍ठभूमि :

आईसीएआई भारत के संसद द्वारा पारित अधिनियम द चार्टर्ड अकाउंटेंट एक्‍ट,1949 के तहत स्‍थापित एक वैधानिक संस्‍था है। इसका उद्देश्‍य भारत में चार्टर्ड अकाउंटेंट पेशे को विनियमित करना है। सीपीए कनाडा इंस्‍टीट्यूट कनाडाई एकीकृत लेखा पेशे की मदद के लिए स्‍थापित एक राष्‍ट्रीय संस्‍था है।


॥■॥ मंत्रिमंडल ने श्रम कल्‍याण संगठन के तहत एक नए मेडिकल कॉलेज के गठन के लिए करमा, झारखण्‍ड के केन्‍द्रीय अस्‍पताल के स्‍थानांतरण को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल समिति‍ ने श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन करमा, झारखण्‍ड के केन्‍द्रीय अस्‍पताल को उसकी जमीन और इमारत सहित नि:शुल्‍क झारखण्‍ड सरकार को स्‍थानांतरित करने को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्‍य मेडिकल कॉलेजों की स्‍थापना संबंधी केन्‍द्र द्वारा प्रायोजित योजना (सीएसएस) के तहत एक नया मेडिकल कॉलेज स्‍थापित करना है। यह मौजूदा जनपदीय/रेफरल अस्‍पतालों से जुड़ा होगा और क्षेत्र के लोगों की स्‍वास्‍थ्‍य आवश्‍यकताओं को पूरा करेगा।

• कार्यान्‍वयन रणनीति एवं लक्ष्‍य

केन्‍द्रीय अस्‍पताल को उसकी जमीन और इमारत सहित तीन महीने के भीतर झारखण्‍ड सरकार को स्‍थानांतरित कर दिया जाएगा। स्‍टाफ के स्‍थानांतरण/समायोजन इत्‍यादि सहित अन्‍य बिन्‍दुओं को ध्‍यान में रखते हुए श्रम एवं रोजगार मंत्रालय तथा राज्‍य सरकार के बीच एक समझौता-ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए जाएंगे।

• प्रमुख प्रभाव

इस प्रस्‍ताव से देश में प्रतिवर्ष प्रशिक्षित किए जाने वाले डॉक्‍टरों की संख्‍या में इजाफा होगा। इससे क्षेत्र में आम लोगों को उपलब्ध होने वाली स्वास्थ्य सेवाओं तथा स्वास्थ्य सेवा संरचना में सुधार करने में सहायता मिलेगी।

• हितधारक

इससे करमा, झारखंड में रहने वाले और आस-पास के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त होंगी।

• पृष्ठभूमि

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय अपने अस्पतालों और डिस्पेंसरियों के जरिए असंगठित क्षेत्र के कुछ वर्गों के मजदूरों और उनके आश्रितों को स्वास्थ्य सेवा सुविधाएं प्रदान करता है। करमा, झारखंड के माइका खदानों/बीड़ी मजदूरों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने वहां एक 150 बिस्तरों वाला अस्पताल (उसी परिसर में एक 50 बिस्तरों वाले टीबी अस्पताल सहित) स्थापित किया है। झारखंड सरकार ने क्षेत्र में एक नया मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लिए करमा के केन्द्रीय अस्पताल को उसकी जमीन और इमारतों सहित निःशुल्क स्थानांतरित किए जाने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया था।


॥■॥ मंत्रिमंडल ने हिन्‍दुस्‍तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) द्वारा भारतीय उर्वरक निगम लिमिटेड (एफसीआईएल) की गोरखपुर एवं सिंद्री इकाइयों तथा हिन्‍दुस्‍तान उर्वरक लिमिटेड (एचएफसीएल) की बरौनी इकाई के पुनर्गठन के लिए रियायत समझौते तथा भूमि पट्टा समझौते और पट्टे पर जमीन उपलब्‍ध कराने को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल समिति ने निम्‍नलिखित प्रस्‍तावों को मंजूरी दी –

• हिन्‍दुस्‍तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) को पट्टे पर जमीन उपलब्‍ध कराना।

• हिन्‍दुस्‍तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) द्वारा भारतीय उर्वरक निगम की गोरखपुर एवं सिंद्री इकाइयों तथा हिन्‍दुस्‍तान उर्वरक लिमिटेड (एचएलसीएल) की बरौनी इकाई के पुनर्गठन के लिए रियायत समझौता तथा भूमि पट्टा समझौता उपलब्‍ध कराना।

• गोरखपुर, सिंद्री और बरौनी की तीन परियोजनाओं के लिए एचयूआरएल और एफसीआईएल/एचएफसीएल के बीच समझौते के मद्देनजर वैकल्पिक समझौतों और अन्‍य समझौतों को स्‍वीकृति देने के लिए अंतर-मंत्रालयी समिति को अधिकृत करना।

प्रभाव:

एफसीआईएल/एचएफसीएल के गोरखपुर, सिंद्री और बरौनी इकाइयों के पुनर्गठन से उर्वरक क्षेत्र में पर्याप्‍त निवेश सुनिश्चित होगा। ये इकाइयां जगदीशपुर-हल्दिया पाइपलाइन (जेएचपीएल) गैस पाइपलाइन के प्रमुख ग्राहक के तौर पर काम करेंगी, जिसे पूर्वी भारत में महत्‍वपूर्ण अवसंरचना के विकास के लिए बिछाया जा रहा है। इससे क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा होंगे और पूर्वी क्षेत्र/राज्‍य की अर्थव्‍यवस्‍था में तेजी आएगी। उर्वरक इकाइयों के पुनर्गठन से यूरिया का घरेलू उतपादन बढ़ेगा और परिणामस्‍वरूप यूरिया में आत्‍मनिर्भरता आएगी।

विवरण:

• एनटीपीसी,आईओसीएल, सीआईएल और एफसीआईएल/एचएफसीएल की संयुक्‍त उपक्रम कंपनी एचयूआरएल का गठन जून 2016 में किया गया था, ताकि गोरखपुर, सिंद्री और बरौनी में उर्वरक पुनर्गठन परियोजनाओं को कार्यान्वित किया जा सके।

• इन तीन स्‍थानों पर उर्वरक परियोजनाओं के गठन में एचयूआरएल की सहायता के लिए एफसीआईएल/एचएफसीएल द्वारा एचयूआरएल के साथ पट्टा समझौते पर हस्‍ताक्षर किए जाने हैं। जमीन का पट्टा 55 वर्ष की अवधि के लिए होगा।

• पट्टाधारक (एचयूआरएल) प्रति वर्ष पट्टादाता (एफसीआईएल/एचएफसीएल) को एक लाख रुपये प्रति वर्ष का आंशिक पट्टा किराया देगा।

• एफसीआईएल की सिंद्री और गोरखपुर इकाइयों तथा एचएफसीएल की बरौनी इकाई के लिए रियायत समझौते के मद्देनजर एफसीआईएल/एचएफसीएल तथा एचयूआरएल (रियातय प्राप्‍त) के बीच समझौत होना है, जिसके तहत एचयूआरएल को डिजाइन, इंजीनियरिंग, निर्माण, खरीद, परीक्षण, जांच, संचालन, उर्वरक संयंत्रों के रख-रखाव और उसके उत्‍पादन के विपणन का अधिकार प्राप्‍त हो सके।

• एचयूआरएल को वित्‍त प्राप्‍त करने के लिए भूमि आवंटन के उद्देश्‍य के मद्देनजर एफसीआईएल/एचएफसीएल, विशेष परियोजनाओं के लिए ऋणदाता प्रतिनिधि तथा एचयूआरएल के बीच होने वाले वैकल्पिक समझौते, जो एक त्रिपक्षीय समझौता है, उसके लिए प्रत्‍येक परियोजनाओं के संबंध में ऋणदाता समूह द्वारा हस्‍ताक्षर किये जाने के बाद इस समझौते पर हस्‍ताक्षर किए जाने की आवश्‍यकता होगी।

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