खबरें विशेष : मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी/स्वीकृति



नई दिल्ली, 13 जून 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

(●) मंत्रिमंडल ने मेसर्स एचडीएफसी बैंक की अतिरिक्त शेयर पूंजी अधिकतम 24,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाने की स्वीकृति दी

• बैंक में मिश्रित विदेशी हिस्सेदारी बैंक की बढ़ाई गई प्रदत्त इक्विटी शेयर पूंजी के 74 प्रतिशत तक सीमित की गई

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने मेसर्स एचडीएफसी बैंक लिमिटेड को अधिकतम 24,000 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त शेयर पूंजी बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। इसमें 10,000 करोड़ रुपये की पहले स्वीकृत सीमा से ऊपर प्रीमियम शामिल है जिससे बैंक में मिश्रित विदेशी हिस्सेदारी बैंक की बढ़ाई गई प्रदत्त इक्विटी शेयर पूंजी के 74 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।

इस निर्णय से यह सुनिश्चित होगा कि बैंक में सभी प्रकार के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मिलाकर मिश्रित विदेशी हिस्सेदारी बैंक की बढ़ाई गई प्रदत्त इक्विटी शेयर पूंजी के 74 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी और इस पर विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नीति की शर्ते तथा अन्य क्षेत्र संबंधी नियमन/दिशा-निर्देश लागू होंगे।

प्रस्तावित निवेश से बैंक का पूंजी पर्याप्तता अनुपात मजबूत होने की आशा है।


(●) मंत्रिमंडल की कृषि शिक्षा प्रभाग और आईसीएआर संस्‍थानों की तीन वर्षीय कार्य योजना’ को मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में उच्‍च कृषि शिक्षा के सुदृढ़ीकरण तथा विकास हेतु कृषि शिक्षा प्रभाग और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) संस्‍थानों के लिए 2225.46 करोड़ रुपये {एआईसीआरपी-एचएस के लिए वेतन घटक के तौर पर 2197.51 करोड़ रुपये + 27.95 करोड़ रुपये (राज्‍य का हिस्‍सा)} की लागत की तीन वर्षीय कार्य योजना (2017-2020) जारी रखने की मंजूरी दी है। इसमें शामिल हैं:

1. देश में उच्‍च कृषि शिक्षा के सुदृढ़ीकरण और विकास के लिए 2050.00 करोड़ रुपये

2. आईसीएआर-राष्‍ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी (एनएएआरएम) – 24.25 करोड़ रुपये

3. आईसीएआर – गृह विज्ञान पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (एआईसीआरपी-एचएस) सहित केंद्रीय कृषिरत महिला संस्‍थान (सीआईडबल्‍यूए) – 151.21 करोड़ रुपये

इस योजना का उद्देश्‍य उच्‍च कृषि शिक्षा संस्‍थानों से गुणवत्‍ता परक मानव संसाधन तैयार करना है। इसके लिए कई नयी पहल की गई हैं, जिनमें किताबी ज्ञान को कम करना और फेकल्‍टी की कमी को दूर करने सहित इस क्षेत्र में प्रतिभाशाली छात्रों को आकर्षित करने के उपाय शामिल हैं। इस योजना के अंतर्गत मान्‍यता के साथ ही कृषि विश्‍वविद्यालयों की गुणवत्‍तापरक रैंकिंग सुनिश्चित करने के लिए इन्‍हें वित्‍तीय सहायता से जोड़ा गया है। इस योजना के तहत पर्यावरण अनुकूल पहल फेक‍ल्टी की कमी को घटाने, अंतर्राष्‍ट्रीय रैंकिंग, पूर्व छात्रों की भागीदारी, नवाचार को बढ़ावा देना, प्रेरित अध्‍यापक नेटवर्क, केवल किताबी ज्ञान कम करना, तकनीकी सक्षम शिक्षा, डॉक्‍टरल डिग्री के बाद की फेलोशिप, कृषि शिक्षा पोर्टल, वैज्ञानिक सामाजिक उत्‍तरदायित्‍व जैसी जिम्‍मेदारियां भी उठाई जाएंगी। आधुनिक बेहतरीन कार्यक्रम के जरिये छात्रों और फेकल्टी की जरूरतों से संबंधित बुनियादी ढांचे तथा फेकल्टी और छात्रों की क्षमता बढ़ाने के लिए सुदृढ़ीकरण और आधुनिकीकरण में सहायता करना, जिससे शिक्षण में सुधार होगा और छात्रों के सम्‍पूर्ण विकास को बढ़ावा मिलेगा।

इससे प्रतिस्‍पर्धी और आत्‍मविश्‍वास से भरे मानव संसाधन तैयार होगा। इसके अतिरिक्‍त आईसीएआर – सीआईडब्‍ल्‍यूए द्वारा कृषि तथा इससे संबंधित क्षेत्रों से जुड़े लैंगिक मसलों, कृषि के क्षेत्र में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने, नीतियां/कार्यक्रम और कृषि क्षेत्र में लैंगिक जागरूकता जैसे मुद्दों पर अनुसंधान किया जाएगा। सम्‍पूर्ण राष्‍ट्रीय कृषि अनुसंधान और शिक्षा प्रणाली (एनएआरईएस) के मानव संसाधनों और हितधारकों की क्षमता बढ़ाने की आवश्‍यकता को पूरा किया जाएगा, जिससे आईसीएआर-एनएएआरएम द्वारा एनएआरईएस में किसानों, युवा वैज्ञानिकों, छात्रों और कृषि आधारित उद्योग सहित हितधारको का सामर्थ्‍य और क्षमताएं बढ़ेगी।

• पृष्‍ठभूमि:

· भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) देशभर में स्‍थापित 75 कृषि विश्‍वविद्यालयों (एयू) के साथ साझेदारी के ज‍रिये योजना तैयार करने, विकास, समन्‍वय और गुणवत्‍तापरक उच्‍च कृषि शिक्षा सुनिश्चित करने का कार्य करती है। आत्‍मनिर्भरता हासिल करने के लिए कृषि क्षेत्र में बदलाव लाने में कृषि विश्‍वविद्यालयों द्वारा तैयार किए गए मानव संसाधन की महत्‍वपूर्ण भूमिका है।

· कृषि शिक्षा में आकर्षण और सामर्थ्‍य बढ़ाने तथा प्रतिभावान युवाओं को इस क्षेत्र में बनाये रखने तथा शिक्षण और शिक्षा से संबंधित छात्रों और फेकल्टी की जरूरतों से संबंधित सम्‍पूर्ण बुनियादी ढा़ंचे में सुधार करने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया गया है।

· कृषि अनुसंधान, शिक्षा और प्रौद्योगिकी प्रबंधन के क्षेत्र में राष्‍ट्रीय कृषि अनुसंधान और शिक्षा प्रणाली (एनएआरर्इ्रएस) के व्‍यक्तियों और संस्‍थानों की क्षमता बढ़ाने में राष्‍ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी (एनएएआरएम) की महत्‍वपूर्ण भूमिका है।

· महिला कृषकों को सशक्‍त करने में केंद्रीय कृषिरत महिला संस्‍थान की प्रमुख भूमिका है, क्‍योंकि बदलते कृषि परिदृश्‍य में महिलाओं की भूमिका और जिम्‍मेदारियां अति आवश्‍यक है।


(●) मंत्रिमंडल ने राज्‍य सभा में लंबित नालंदा विश्‍वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2013 को वापस लेने के प्रस्‍ताव को स्‍वीकृति दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राज्‍य सभा में लंबित नालंदा विश्‍वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2013 को वापस लेने के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी है।

नालंदा विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना अक्‍टूबर, 2009 में थाईलैंड में आयोजित चौथी पूर्व एशिया शिखर बैठक में जारी संयुक्‍त प्रेस वक्‍तव्‍य के आधार पर की गई थी। प्रेस वक्‍तव्‍य में एक गैर सरकारी, अलाभकारी, धर्मनिरपेक्ष और स्‍वशासी अंतरराष्‍ट्रीय संस्‍थान स्‍थापित करने को समर्थन दिया गया था। इसके बाद संसद द्वारा नालंदा विश्‍वविद्यालय अधिनियम, 2010 पारित किया गया और प्रभावी हुआ।

वर्तमान प्रस्‍ताव राज्‍य सभा में नालंदा विश्‍वविद्यालय (संशोधन), 2013 को वापस लेने से संबंधित है। 26 अगस्‍त, 2013 को राज्‍य विधेयक सभा में प्रस्‍तुत विधेयक का उद्देश्‍य नालंदा विश्‍वविद्यालय अधिनियम, 2010 के कुछ प्रावधानों में संशोधन करना और कुछ नए प्रावधान जोड़ना था।

नालंदा विश्‍वविद्यालय अधिनियम, 2010 के अनुच्‍छेद 7 के अनुसार नालंदा विश्‍वविद्यालय के गवर्निंग बोर्ड का गठन कर लिया गया है और यह भारत के माननीय राष्‍ट्रपति की स्‍वीकृति से 21.11.2016 से प्रभावी है। प्रस्‍तावित संशोधनों पर आगे बढ़ने के लिए कोई अंतिम निर्णय लेने से पहले नालंदा विश्‍वविद्याल के गवर्निंग बोर्ड के साथ संशोधन विधेयक पर विचार-विमर्श की आवश्‍यकता होगी। वर्तमान गवर्निंग बोर्ड संपूर्ण नालंदा विश्‍वविद्याल अधिनियम, 2010 पर नए सिरे से भी विचार कर सकता है और जहां कही भी आवश्‍यक हो संशोधनों/जोड़ो का सुझाव दे सकता है।

सितंबर, 2014 में विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज द्वारा विश्‍वविद्याल में शिक्षण कार्य का शुभांरभ किया गया था। भारत के माननीय राष्‍ट्रपति विश्‍वविद्यालय के विजि़टर हैं। डॉ• विजय भटकर विश्‍वविद्यालय के चांसलर और प्रोफेसर सुनैना सिंह कुलपति हैं। अभी विश्‍वविद्यालय के तीन अध्‍ययन केंद्रों – स्‍कूल ऑफ हिस्‍टोरिकल स्‍टडीज़, स्‍कूल ऑफ इकोलॉजी एंड एनवायरनमेंट स्‍टडीज़ और स्‍कूल ऑफ बुद्धिस्‍ट स्‍टडीज़ – में 116 विद्यार्थी हैं। इनमें 21 देशों के 35 अंतर्राष्‍ट्रीय विद्यार्थी शामिल है।


(●) मंत्रिमंडल ने प्रगति मैदान में निजी क्षेत्र सहित तीसरे पक्ष द्वारा होटल निर्माण और संचालन के लिए 3.7 एकड़ जमीन के मुद्रीकरण, एल एंड डीओ द्वारा लगाएगए शुल्‍कों की माफी तथा रेल मंत्रालय द्वारा बढ़ाई गई भूमि शुल्‍कों की माफी को स्‍वीकृति दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में प्रगति मैदान में भारत व्‍यापार संवर्धन संगठन (आईटीपीओ) द्वारा 3.7 एकड़ भूमि के मुद्रीकरण को मंजूरी दे दी है। यह कार्य पारदर्शी स्‍पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्‍यम से नि‍जी क्षेत्र सहित तीसरे पक्ष द्वारा होटल निर्माण और संचालन के लिए 99 वर्षों के पट्टे के आधार पर होगा।

यह कदम प्रगति मैदान की विकास परियोजना चरण-1 का हिस्‍सा है, यानी एकीकृत एक्‍जीबिशन सह कंवेंशन सेंटर (आईईसीसी) का हिस्‍सा है। इसकी स्‍वीकृति 2254 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत के साथ जनवरी, 2017 में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति द्वारा की गई थी। आईईसीसी परियोजना के अंतर्गत सात हजार लोगों के बैठने की व्‍यवस्‍था, 1,00,000 वर्ग मीटर का प्रदर्शनी क्षेत्र और 4800 वाहनों की बेसमेंट पार्किंग सुविधा के साथ विश्‍व स्‍तरीय अत्‍याधुनिक एक्‍जीबिशन सह कंवेंशन सेंटर बनाने का प्रस्‍ताव है। प्रगति मैदान के आस-पास के क्षेत्रों में यातायात भीड़-भाड़ दूर करने के कदमों से क्षेत्र में भीड़-भाड़ में कमी आएगी।

भूमि के मुद्रीकरण के माध्‍यम से उगाहे गए कोष का इस्‍तेमाल आईईसीसी परियोजना के धन पोषण के एक उपाय के रूप में किया जाएगा। आईईसीसी परियोजना व्‍यापार प्रोत्‍साहन के लिए शिखर स्‍तरीय बैठकों तथा प्रदर्शनि‍यों / कार्यक्रमों को आयोजित करने के लिए केंद्र सरकार और राज्‍य सरकारों के लिए आवश्‍यक है।

आईईसीसी परियोजना और यातायात भीड़-भाड़ दूर करने का कार्य तेजी से चल रहा है। आटीपीओ ने कहा है कि पूरी परियोजना सितंबर, 2019 तक पूरी होने की उम्‍मीद है। आईईसीसी परियोजना से भारतीय व्‍यापार को लाभ होगा तथा भारत का विदेश व्‍यापार बढ़ाने में मदद मिलेगी।


(●) मंत्रिमंडल ने बांध सुरक्षा विधेयक, 2018 को संसद में प्रस्‍तुत करने के प्रस्‍ताव को स्‍वीकृति दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बांध सुरक्षा विधेयक 2018 को संसद में प्रस्‍तुत करने के प्रस्‍ताव को स्‍वीकृति दे दी है।

• लाभ : यह विधेयक राज्‍यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को एकरूप बांध सुरक्षा प्रक्रियाओं को अपनाने में मदद देगा, जिससे बांधों की सुरक्षा सुनिश्‍चित होगी और इन बांधों से होने वाले लाभ सुरक्षित रहेंगे। इससे मानव जीवन, पशु धन और संपत्ति की सुरक्षा में भी मदद मिलेगी।

अग्रणी भारतीय विशेषज्ञों और अतंर्राष्‍ट्रीय विशेषज्ञों के साथ व्‍यापक विचार विर्मश के बाद प्रारूप विधेयक को अंतिम रूप दिया गया है।

• विवरण

· विधेयक में देश में निर्दिष्‍ट बांधों की उचित निगरानी, निरीक्षण, संचालन तथा रख-रखाव का प्रावधान है, ताकि उनका सुरक्षित काम-काज सुनिश्‍चित किया जा सके।

· विधेयक में बांध सुरक्षा पर राष्‍ट्रीय समिति गठित करने का प्रावधान है। यह समिति बांध सुरक्षा नीतियों को विकसित करेगी और आवश्‍यक नियमनों की सिफारिश करेगी।

· विधेयक में राष्‍ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण का गठन नियामक संस्‍था के रूप में करने का प्रावधान है। यह प्राधिकरण नीति, दिशा-निर्देश और देश में बांध सुरक्षा के लिए मानकों को लागू करेगा।

· विधेयक में राज्‍य सरकार द्वारा बांध सुरक्षा पर राज्‍य समिति गठित करने का प्रावधान है।

• राष्‍ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण

· यह प्राधिकरण बांध सुरक्षा संबंधी डाटा और व्‍यवहारों के मानकीकरण के लिए राज्‍य बांधसुरक्षा संगठनों और बांधों के मालिकों के साथ संपर्क बनाए रखेगा।

· प्राधिकरण राज्‍यों तथा राज्‍य बांध सुरक्षा संगठनों को तकनीकी और प्रबंधकीय सहायता उपलब्‍ध कराएगा।

· प्राधिकरण देश के सभी बांधोंका राष्‍ट्रीय स्‍तर पर डाटा बेस तथा प्रमुख बांध विफलताओं का रिकॉर्ड रखेगा।

· प्राधिकरण किसी प्रमुख बांध की विफलताओं के कारणों की जांच करेगा।

· प्राधिकरण नियमित निरीक्षण के लिए तथा बांधों की विस्‍तृत जांच के लिए मानक दिशा-निर्देशों और नियंत्रण सूचियों को प्रकाशित करेगा और अद्यतन रखेगा।

· प्राधिकरण उन संगठनों की मान्‍यता या प्रत्‍ययन का रिकॉर्ड रखेगा, जिन्‍हें जांच, नए बांधों की डिजाइन और निर्माण का कार्य सौंपा जा सकता है।

· प्राधिकरण दो राज्‍यों के राज्‍य बांध सुरक्षा संगठन के बीच या किसी राज्‍य बांध सुरक्षा संगठन और उस राज्‍य के बांध के स्‍वामी के बीच विवाद का उचित समाधान करेगा।

· कुछ मामलों में जैसे, एक राज्‍य का बांध दूसरे राज्‍य के भू-भाग में आता है तो राष्‍ट्रीय प्राधिकरण राज्‍य बांध सुरक्षा संगठन की भूमिका भी निभाएगा और इस तरह अंतर-राज्‍य विवादों के संभावित कारणों को दूर करेगा।

• बांध सुरक्षा पर राज्‍य समिति

यह समिति राज्‍य में निर्दिष्‍ट सभी बांधों की उचित निगरानी, निरीक्षण, संचालन और रख-रखाव सुनिश्‍चित करेगी। समिति यह सुनिश्‍चित करेगी की बांध सुरक्षा के साथ काम कर रहे हैं। इसमें प्रत्‍येक राज्‍य में राज्‍य बांध सुरक्षा संगठन स्‍थापित करने का प्रावधान है। यह संगठन फील्‍ड बांध सुरक्षा के अधिकारियों द्वारा चलाया जाएगा। अधिकारियों में प्राथमिक रूप से बांध डिजाइन, हाईड्रो मेकेनिकल इंजनीयरिंग, हाईड्रोलॉजी, भू तकनीकी जांच और बांध पुनर्वास क्षेत्र के अधिकारी होंगे।

• पृष्‍ठभूमि

भारत में 5200 से अधिक बड़े बांध हैं और लगभग 450 बांध बनाए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्‍त मझौले और छोटे हजारों बांध हैं। भारत में बांध सुरक्षा के लिए कानूनी और संस्‍थागत व्‍यवस्‍था नही होने के कारण बांध सुरक्षा चिंता का विषय है। असु‍रक्षित बांध खतरनाक हैं और इनके टूटने से आपदा आ सकती है और परिणामस्‍वरूप बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हो सकता है।

बांध सुरक्षा विधेयक, 2018 में बांधसुरक्षा संबंधी सभी विषयों को शामिल किया गया है। इसमें बांध का नियमित निरीक्षण, आपात कार्य योजना, विस्‍तृत सुरक्षा के लिए पर्याप्‍त मरम्‍मत और रख-रखाव कोष इंस्‍ट्रूमेंटेशन तथा सुरक्षा मैनुअल शामिल हैं। इसमें बांध सुरक्षा का दायित्‍व बांध के स्‍वामी पर है और विफलता के लिए दंड का प्रावधान है।


(●) मंत्रिमंडल ने आईसीएमआर और आईएनएसईआरएम, फ्रांस के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल को भारतीय चिकित्‍सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और इंस्‍टीट्यूट नेशनल द ला सांतित द ला रिसर्चेमेडिकाले (आईएनएसईआरएम), फ्रांस के बीच मार्च 2018 को किए गए समझौते ज्ञापन (एमओयू) के बारे में अवगत कराया गया।

• विशेषताएं

इस एमओयू का उद्देश्‍य चिकित्‍सा, जैविक विज्ञान और स्‍वास्‍थ्‍य अनुसंधान क्षेत्र में आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग करना है। दोनों पक्षों के बेहतरीन वैज्ञानिक तरीकों के आधार पर दोनों देशों के बीच निम्‍नलिखित क्षेत्रों पर विशेष ध्‍यान केंद्रित करने पर सहमति बनी :

• मधुमेह और मेटाबोलिक विकार;
• जीन एडिटिंग तकनीक के आचार और नियामकता मुद्दे पर केंद्रित जैविक नैतिकता
• दुर्लभ बीमारियां
• दोनों पक्षों के बीच चर्चा के बाद आपसी हित के अन्‍य क्षेत्र पर विचार किया जाएगा

इस एमओयू से आईसीएमआर और आईएनएसईआरएम के बीच अंतर्राष्‍ट्रीय वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी सहयोग के खाके के अंतर्गत आपसी हित के क्षेत्र में संबंध और सुदृढ़ होंगे। दोनों पक्षों की वैज्ञानिक उत्‍कृष्‍टता से विशिष्‍ट क्षेत्र में स्‍वास्‍थ्‍य अनुसंधान पर सफल कार्य करने में मदद मिलेगी।


(●) मंत्रिमंडल की संयुक्त रूप से डाक टिकट जारी पर भारत और वियतनाम के बीच हुए समझौता ज्ञापन को मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल को भारत और वियतनाम के डाक विभागों द्वारा संयुक्‍त रूप से डाक टिकट जारी करने के बारे में जानकारी दी गई।

भारत-वियतनाम: ‘प्राचीन वास्‍तुशिल्‍प’ विषय पर संयुक्‍त रूप से डाक टिकट जारी करने के लिए संचार मंत्रालय के डाक विभाग और वियत नारा पोस्‍ट के बीच आपसी सहमति बनी। संयुक्‍त डाक टिकट 25.01.2018 को जारी किए गए थे।

भारत-वियतनाम संयुक्‍त स्‍मारक डाक टिकट पर भारत का सांची स्‍तूप और वियतनाम का फो मिन्‍ह पगोडा बना हुआ है। संयुक्‍त डाक टिकट जारी करने के लिए भारत और वियतनाम के डाक विभागों के बीच 18.12.2017 को समझौता ज्ञापन (एमओयू) कर हस्‍ताक्षर हुए थे।


(●) मंत्रिमंडल ने पूर्वोत्‍तर परिषद के पुनर्गठन को स्‍वीकृति दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पूर्वोत्‍तर परिषद के पुनर्गठन को स्‍वीकृति दे दी है। पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास मंत्रालय द्वारा पूर्वोत्‍तर परिषद के पुनर्गठन में केंद्रीय गृहमंत्री को संस्‍था का पदेन अध्‍यक्ष बनाने का प्रस्‍ताव किया गया था। इस संस्‍था में सभी आठ पूर्वोत्‍तर राज्‍यों के राज्‍यपाल और मुख्‍यमंत्री सदस्‍य हैं। म‍ंत्रिमंडल ने पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) को परिषद के उपाध्‍यक्ष के रूप में कार्य करने की भी स्‍वीकृति दे दी है।

• प्रभाव

एनईसी राज्‍य और केंद्र सरकार के माध्‍यम से विभिन्‍न परियोजनाओं को लागू करती है। नई व्‍यवस्‍था के अंतर्गत पूर्वोत्‍तर परिषद के अध्‍यक्ष गृह मंत्री होंगे और पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास राज्‍य मंत्री उपाध्‍यक्ष होंगे तथा पूर्वोत्‍तर राज्‍यों के राज्‍यपाल तथा मुख्‍यमंत्री इसके सदस्‍य होंगे। यह परिषद अंतर-राज्‍य विषयों पर विस्‍तृत विचार-विमर्श के लिए मंच प्रदान करेगी और भविष्‍य में अपनाये जाने वाले समान दृष्टिकोणों पर विचार भी करेगी।

एनईसी अब मादक द्रव्‍यों की तस्‍करी, हथियारों और गोला-बारूदों की तस्‍करी, सीमा विवादों जैसे अंतर-राज्‍य विषयों पर विचार-विमर्श के लिए विभिन्‍न क्षेत्रीय परिषदों द्वारा किए जा रहे कार्यों को करेगी।

एनईसी के नए स्‍वरूप से यह पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के लिए कारगर संस्‍था बनेगी।

परिषद समय-समय पर परियोजना में शामिल परियोजनाओं / योजनाओं के कार्यान्‍वयन की समीक्षा करेगी, इन परियोजनाओं आदि के लिए राज्‍यों के बीच समन्‍वय के लिए कारगर उपायों की सिफारिश करेगी। परिषद को केंद्र सरकार द्वारा दी गई शक्तियां प्राप्‍त होंगी।

• पृष्‍ठभूमि

एनईसी की स्‍थापना पूर्वोत्‍तर परिषद अधिनियम, 1971 के अंतर्गत की गई थी। इसकी स्‍थापना संतुलित और समन्वित विकास सुनिश्‍चित करने तथा राज्‍यों के साथ समन्‍वय में सहायता देने के‍ लिए शीर्ष संस्‍था के रूप में की गई थी। 2002 के संशोधन के बाद एनईसी को पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के लिए क्षेत्रीय नियोजन संस्‍था के रूप में कार्य करने का अधिकार दिया गया है और एनईसी इस क्षेत्र के लिए क्षेत्रीय योजना बनाते समय दो या अधिक राज्‍यों को लाभ पहुंचाने वाली योजनाओं और परियोजनाओं को प्राथमिकता देगी। परिषद सिक्किम के मामले में विशेष परियोजनाएं और योजनाएं बनाएगी।


(●) मंत्रिमंडल की भारत और पेरू के बीच समझौते को मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और पेरू के बीच हुए समझौते को मंजूरी दी। इस समझौते पर मई 2018 में लीमा, पेरू में हस्‍ताक्षर किए गए थे।

इस समझौते का उद्देश्‍य नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा के मामलों में आपसी लाभ, और समानता के आधार पर तकनीकी द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए सहयोगात्‍मक संस्‍थागत संबंध स्‍थापित करना है। इस समझौते के तहत कार्यान्‍वयन के लिए कार्य योजना तैयार करने हेतु एक संयुक्‍त समिति गठित की गई है।

इस समझौते से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग सुदृढ़ होगा।


(●) मंत्रिमंडल ने केन्द्रीय सूची में अन्य पिछड़े वर्गों के अंदर उप-श्रेणीकरण के विषय पर विचार के लिए गठित आयोग के कार्यकाल विस्तार को स्वीकृति दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने केन्द्रीय सूची में अन्य पिछड़े वर्गों के आयोग का कार्यकाल अंतिम रूप से वर्तमान 20, जून 2018 से बढ़ाकर 31 जूलाई, 2018 तक करने की स्वीकृति दे दी है।

आयोग ने राज्य सरकारों, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोगों, विभिन्न समुदायिक संगठनों तथा पिछड़े वर्गों और समुदायों से जुड़े जनसाधारण सहित हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया। आयोग ने उच्च शैक्षिणक संस्थानों में दाखिल श्रेणीवार अन्य पिछड़े वर्गों के रिकॉर्ड प्राप्त करने के साथ-साथ केन्द्रीय विभागों, केन्द्रीय सार्वजनिक प्रतिष्ठानों, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों में इसी तरह की श्रेणियों के अनुसार भर्तियों का डाटा प्राप्त किया।

संग्रहित किए गए डाटा पर विस्तृत विचार के लिए आयोग ने 31 जूलाई, 2018 तक कार्यकाल बढ़ाने का अनुरोध किया है।

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