ईद में खरीदारी के लिए नहीं हैं लोगों की जेब में रुपए !



---रंजीत लुधियानवी, हावड़ा, 11 जून 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

ईद में खरीददारी करने के लिए लोगों की जेब में रुपए नहीं हैं। गरीब और मध्यमवगर्ग के लोग परिवार के बजट में कटौती कर रहे हैं। दूसरी ओर दान करने वाले धनी भी मंदी की मार झेल रहे हैं। इसलिए वे भी जकात के खर्च में कटौती कर रहे हैं।

रमजान का पावन महीना समाप्त होने वाला है और इसी हफ्ते ईद है, लेकिन इसके बाद भी कारोबार में मंदी से लोग परेशान हैं। हावड़ा जिले के उलबेड़िया में एक दुकानदार ने बताया कि दिनभर में मुश्किल से एक पायजामा-कुर्ता बिक रहा है दूसरों का कहना था कि ज्यादा से ज्यादा दो-तीन सेट ही बिक रहे हैं। फुटपाथ से लेकर छोटी-बड़ी दुकान के सभी दुकानदारों का एक ही गम है कि बिक्री नहीं हो रही है। एक तो बारिश के कारण कारोबार प्रभावित हो रहा है, दूसरे महंगाई का असर दिख रहा है। हालांकि शाम ढलने पर बाजारों में भीड़ तो बढ़ रही है लेकिन बिक्री आशानुरूप नहीं हो रही है।

गौरतलब है कि हावड़ा के ग्रामीण इलाकों उलबेड़िया, बागनान, आमता, बाउड़िया जैसे इलाकों में माना जाता है कि अल्पसंख्यक समुदाय की खासी आबादी है। उलबेड़िया लोकसभा इलाके में 40 फीसद से ज्यादा अल्पसंख्यक मतदाता हैं। लेकिन इसके बावजूद सुबह 10 बजे खुलने वाली दुकानें ग्राहकों के इंतजार में राह पर पलके बिठाए बैठी दिखती हैं। नोटबंदी के बाद कपड़ा उद्योग तबाह हो गया था, लेकिन दुकानदारों का कहना है कि बीते दो साल से भी इस साल हालत और ज्यादा खराब है। ईद के मौके पर लगभग हर श्रेणी के लोगों ने खरीददारी में कटौती कर रखी है। गरीबों को दान देने के लिए सभा -संस्थाओं की ओर से जिस मात्रा में कपड़े खरीदे जाते थे, इस साल उसमें भी भारी कटौती देखी जा रही है।

उलबेड़िया बाजार के फुटपाथ पर अस्थायी कपड़ों की दुकान लगाने वाले निजामुद्दीन ने बताया कि दिन भर में एक जोड़ी कपड़ा ही बिक्री हुआ है। दूसरी ओर, करीब एक दुकानदार शेख नजरुल ने बताया कि दो जोड़े पायजामा-कुर्ता दिन भर में बिके हैं। बड़े दुकानदारों की हालत भी ऐसी ही है। रमजान माह के अंतिम हफ्ते में भारी बिक्री होती है। लेकिन इस साल ऐसा नहीं हो रहा है।

बागनान के खोकन घोषाल हों या लुकमान हुसैन, उनका कहना है कि बाजार की हालत से पता चलता है कि लोगों के पास रुपए नहीं हैं। उलबेड़िया के एक कपड़ा विक्रेता देवाशीष बेज के मुताबिक पिछले साल मेरी दुकान पर एक व्यक्ति चार-पांच हजार की खरीददारी करता था। लेकिन इस साल यह घट कर आधी रह गई है।

ईद के मौके पर अमीर लोग गरीबों को कपड़ा दान करते हैं, जिसे जकात कहा जाता है। इसमें साड़ी और लुंगी की बिक्री जमकर होती है। खोकन के मुताबिक इस साल 2500 जकात की साड़ियां खरीद कर लाया था, लेकिन अभी तक महज 200 की बिक्री हुई है। इससे ही लोगों की आर्थिक हालत का पता चलता है।

ईद के कपड़ों में महिलाओं के लिए गाउन और फ्राक, लड़कों के लिए कुर्ता-पायजामा ही बिक्री होता है। बीते 29 सालों से कपड़े का कारोबार कर रहे निजामुद्दीन ने कहा कि बाजार की ऐसी हालत पहले कभी नहीं देखी थी।

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