सीएम की पंचक्रोशी यात्रा : संकल्प नहीं दिलाने का व्यास जी ने किया ऐलान



---हरेन्द्र शुक्ला, वाराणसी, 08 जून 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ दो दिवसीय यात्रा पर 9 जून को काशी आ रहे हैं। काशी प्रवास के दौरान वह केन्द्रीय विकास कार्यरत के अलावा पंचक्रोशी परिक्रमा भी करेंगें। लेकिन उनके पंचक्रोशी यात्रा पर ग्रहण लग गया है। मान्यता के अनुसार श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र से स्थित व्यास भवन से व्यास जी द्वारा संकल्प दिलाकर यह यात्रा शुरु की जाती है लेकिन व्यासपीठ के व्यास पण्डित केदारनाथ मिश्र कारिडोर के नाम पर व्यास भवन सहित परिक्षेत्र में मंदिरों को तोड़े जाने से मर्माहत हैं। उन्होने अपने किराये के आवास से यह ऐलान किया कि वह पंचक्रोशी यात्रा के लिए मुख्यमंत्री योगी को संकल्प नहीं दिलवायेगें।

गौरतलब है कि श्री काशी विश्वनाथ प्रशासन ने कारिडोर के नाम पर गत माह व्यासपीठ का आवास और उसमें स्थित राधा कृष्ण की विलक्षण प्रतिमा को तोड़ दिया है। इसके साथ ही मंडन मिश्र की प्रतिमा को वहीं फेंक दिया। इसके चलते व्यास जी इन दिनों नीलकंठ मुहल्ले में किराये के मकान में परिवार के साथ रह रहे हैं। प्रशासन ने उन्हें बेघर कर दिया है। देव विग्रहों को तोड़े जाने से वे काफी व्यथित हैं। श्री काशी विश्वनाथ कारिडोर के नाम पर मंदिरों को तोड़े जाने और देव विग्रहों की अवमानना से भी वे काफी क्षुब्ध हैं।

शुक्रवार को अपने आवास पर बातचीत के दौरान व्यास जी ने व्यथित मन से कहा कि जो व्यक्ति मंदिरों और देव विग्रहों को तोड़ रहा है, उसे पंचक्रोशी यात्रा का कोई अधिकार नहीं है। यह सब सिर्फ एक दिखावा है। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री व्यासपीठ पर यात्रा प्रारंभ करने के लिये संकल्प लेने आते हैं तो पहले उन्हें यहां गिराये गये मंदिरों का पुनर्निर्माण का संकल्प लेना होगा। अन्यथा उन्हें पंचक्रोशी यात्रा करने का संकल्प नहीं दिलाया जायेगा। उन्होंने कहा कि काशी मंदिरों का शहर है और उसी काशी में मंदिर और देवता नहीं रहेंगे तो फिर काशी का क्या मतलब है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ये अपने को हिन्दू कहते हैं और श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर स्थित मुक्ति मंडप में जूता पहने जवानों की ड्यूटी लगाते हैं, जिससे हिन्दुओं की भावना आहत होती है। जबकि बगल के अन्य धर्मस्थल पर ड्यूटी देने वाले जवान कपड़े के जूते पहन कर रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कारिडोर के बहाने पक्के महाल को उजाड़कर यहां की धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संस्कृति को मिटाने का प्रयास किया जा रहा है। दर्शन पूजन करने आने वाले श्रद्धालुओं के साथ सुरक्षाकर्मियों का दुर्व्यवहार करना अब आम बात हो गया है।

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