रेलवे और राज्य सरकार की रस्सा-कस्सी में फँसे मासूम



---उमेश तिवारी, हावड़ा, 20 मार्च 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

● बच्चों को भूले एसी वाले, पसीना और अँधेरे में बहा भविष्य

● 14 साल बीत गये, इस स्कूल में न बिजली पहुँची न ही पानी

बहुत जल्दी रामनवमी मनायी जायेगी। अयोध्या में श्रीराम का वनवास तो 14 साल बाद खत्म हो गया है मगर ऐसा लगता है कि उनका अक्स जिन मासूमों में दिखता है, उनकी तकदीर में 14 साल 14 जन्म में भी खत्म नहीं होने वाले हैं। हम बात कर रहे हैं उन बच्चों की, जिनको देश का भविष्य कहा जाता है मगर जहाँ उनका भविष्य गढ़ने के लिए भेजा जाता है, वहाँ इन मासूमों की तकदीर गर्मी में झुलस रही है, स्याही पसीने में बह रही है और तकदीर में लगता है कि अँधेरे के सिवाय कुछ नहीं। शिक्षा को अधिकार बनाने वाले कानून की धज्जियाँ उड़ते देखना हो तो हावड़ा के इस स्कूल में आपका स्वागत है और विडम्बना देखिये कि स्कूल का नाम भी उसके नाम है जिनको भारत का भविष्य निर्माता कहा जाता है। स्कूल का नाम है श्री नेहरू शिक्षा सदन, टिकियापाड़ा। बच्चों के चाचा नेहरू बच्चों से प्यार करते थे मगर इस स्कूल में जिन परिस्थितियों के बीच बच्चे पढ़ रहे हैं, उसे देखकर वह भी शायद कातर हुए बगैर नहीं रहते। पंडित जी जिस पार्टी से थे, उस पार्टी के प्रतिनिधि तक यहाँ झाँकने नहीं आते। टिकियापाड़ा के बीएनआर रेलवे कॉलोनी के इस सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए न तो प्रकाश है और न ही पंखे की व्यवस्था जिससे उन्हें गर्मी से राहत मिल सके। बरसात में तो स्कूल की अवस्था और गंभीर हो जाती है। घुटनों तक के पानी में चलकर उन्हें स्कूल में प्रवेश करना पड़ता है।

टिकियापाड़ा के बीएनआर रेलवे कॉलोनी में वर्ष 1966 में बने इस प्राथमिक विद्यालय में एक सौ के लगभग बच्चे हैं, जो अति निर्धन परिवार से ताल्लुक रखते हैं। इनके माँ-बाप भी चाहते हैं कि मेरा बेटा पढ़-लिखकर बड़ा आदमी बने, इंसान बने लेकिन उन्हें इंसान बनाने के लिए मूलभूत सुविधा तक इस विद्यालय में नहीं है। कई गरीब घर की बेटियाँ भी इस स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर रही हैं लेकिन उनका पूरा समय पसीना पोछने में ही चला जाता है। जहाँ धनाढ्य बच्चों के लिए सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस अंग्रेजी माध्यम की स्कूलें हैं, वहीं इस विद्यालय में बिजली तक की व्यवस्था नहीं है।

• 14 वर्षों से नहीं है बिजली

इसी प्रांगण में चलनेवाली एक अपर प्राइमरी स्कूल टिकियापाड़ा श्री नेहरू शिक्षा सदन के टीचर इंचार्ज एस.एन.राय का कहना है कि बिजली को लेकर स्कूल प्रशासन ने 2004 में रेलवे से आग्रह किया था लेकिन उनका हृदय नहीं पसीजा। बाध्य होकर स्कूल को कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। कोर्ट की ओर से तत्काल बिजली मुहैया कराने का निर्देश दिया गया लेकिन पूर्व रेलवे की ओर से हमें स्कूल को खाली करने की नोटिस थमा दी गई। बाध्य होकर हमें कोर्ट से स्थागना आदेश लेना पड़ा।

• नहीं है पेयजल की व्यवस्था

राज्य सरकार के अधीन चलनेवाले इस विद्यालय में नगर निगम की ओर से एक चांपाकल लगाया गया है जिसमें से नमक युक्त पानी निकलता है़। मीठे पानी का एक नल है लेकिन उसमें से बूंद-बूंद पानी गिरता है। कुल मिलाकर पीने के पानी के लिए नौनिहालों को तरसना पड़ता है। टाली की छत वाले इस विद्यालय में बारिश के दिनों में पानी भी टपकता है।

• स्कूल प्रशासन का कहना है

श्री नेहरू शिक्षा सदन के प्रधानाध्यापक गौतम शर्मा का कहना है कि स्कूल की सबसे बड़ी समस्या बिजली की है। रेलवे से कई बार आग्रह किया गया परन्तु कोई फर्क नहीं पड़ा। कहते हैं उनके लिस्ट में ही यह स्कूल नहीं है। जिला इंस्पेक्टर से भी बिजली के कनेक्शन के लिए आग्रह किया गया है। डर है कि कहीं बच्चे शिक्षा से वंचित न हो जाएं। पार्षद विभाष हाजरा की देन है कि उन्होंने एक चांपाकल लगवा दिया है।

• रेलवे प्रशासन का कहना है

पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी रवि महापात्रा का कहना है कि इस संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। जानकारी लेने के पश्‍चात ही वे प्रतिक्रिया दे पाएंगे।

कारण कुछ भी हो लेकिन सरकारी व्यवस्था बच्चों के बीच भेदभावों को दर्शाती है। जहाँ एक ओर कुछ बच्चों को आधुनिक तरीके से शिक्षा दी जा रही है वहीं दूसरी ओर इन नौनिहालों को दो बूंद पानी, प्रकाश और पंखे के लिए तरसना पड़ रहा है। फिलहाल, मामला कोर्ट में विचाराधीन है।

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